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निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति के मोल...
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My language progress is oh, the price of all progress...
- फोटो : Kaithal
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हिंदी भाषा को लेकर अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे हिंदी हैं हम अभियान के तहत डॉ. बीआर आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने हिंदी भाषा को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए। शिक्षकों ने बताया कि एक शोध के अनुसार इस समय विश्व में हर छठवां व्यक्ति हिंदी भाषा का जानकार है। बच्चों को शुरुआत से ही अपनी मातृभाषा सिखाई जाए।
प्राचार्या प्रो. सुनीता अरोड़ा ने कहा कि भाषा को बढ़ावा देने के लिए हमें सबसे पहले इसके महत्व को समझना जरूरी है। भारत जैसे देश में जहां बहुभाषायी लोग रहते हैं, वहां हिंदी सबको एक सूत्र में पिरो कर रखने का कार्य कर रही है। हमारे देश के किसी भी कोने में हम तभी एक दूसरे से संवाद कर सकते हैं, जब एक संवाद का एक प्रबल माध्यम हमारे पास होगा। इसके लिए भी हिंदी भाषा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे देश में सरकारी कार्यालयों का कामकाज हिंदी में होगा तो भाषा को काफी बढ़ावा मिलेगा।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा दीक्षित ने कहा कि 14 सितंबर 1947 से हिंदी को हमारी राजभाषा के रूप में मान्यता मिली हुई है। हिंदी को हमारी राष्ट्रभाषा बनाना चाहिए। हमारी व्यवस्था शुरू से अंग्रेजी पर आधारित रही है, जिसका अनुवाद करने की भी आवश्यकता है। डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल के शोधानुसार हिंदी विश्व की नंबर एक भाषा है। विश्व की करीब 8 अरब की आबादी में हर छठवां व्यक्ति हिंदी भाषा का जानकार है। हम अपने व्यवहार में हिंदी भाषा को लाकर भी इसका विस्तार कर सकते हैं।
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फिजिक्स शिक्षिका डॉ. मीना शर्मा ने कहा कि पाठ्यक्रम में भी हिंदी के आधार को अनिवार्यता देनी चाहिए। विज्ञान जैसे विषयों में भी ज्यादा से ज्यादा हिंदी का प्रयोग हो। इससे बच्चे हिंदी भाषा के बारे में ज्यादा जान सकेंगे और भाषा के विस्तार को बल मिलेगा। उन्होंने भाषा के महत्व को काव्य के माध्यम से भी प्रस्तुत किया कि-
हिंदी सीमा तोडक़र चली विश्व के द्वार, वैज्ञानिक आधार पर प्रसिद्धि मिली अपार,
अब तो मिलना चाहिए हिंदी को सम्मान, पूर्ण राष्ट्र भाषा बने ऐसा लो संज्ञान...।
फिजिक्स शिक्षिका डॉ. नीलम ने हिंदी भाषा को लेकर दो पंक्तियां कही कि निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति के मोल....। उन्होंने कहा कि जब भी हमें चोट लगती है तो हम सबसे पहले मां शब्द बोलते हैं। हमें जब भी कोई दुख होता है तो हम सबसे पहले अपनी मां और मातृभाषा को याद करते हैं। हमें तकनीकी युग में दूसरी भाषा भी सीखनी चाहिए, लेकिन हमारी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि अपने बच्चों को सबसे पहले मातृभाषा ही सिखाई जाए।
प्रो. रुपाली ने कहा कि हिंदी भाषा हमारे गौरव और स्वाभिमान की भाषा है। यह विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक हिंदी भाषा का नाम और ज्यादा शक्तिशाली भाषाओं में शामिल हो जाएगा। हमारे देश की करीब 18 करोड़ आबादी हिंदी भाषा का प्रयोग कर रही है। दुनिया के 150 देशों में हिंदी भाषा बोली जाती है। दुनिया में नेट पर जितने सर्च इंजिन हैं, उनमें 90 प्रतिशत अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता है। हमारा प्रयास हो कि सर्च इंजन में भी हिंदी भाषा को महत्वपूर्ण स्थान मिले।
डॉ. अभिषेक गोयल ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। हमें अपने विचारों का आदान प्रदान हिंदी भाषा में ही ज्यादा करना चाहिए। इसी बात को लेकर केंद्र सरकार भी कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति में भी यह छूट दी गई है कि कोई विद्यार्थी किसी विषय को हिंदी में पढऩा चाहता है तो पढ़ सकता है। इसी प्रकार से इसमें यह भी कहा गया है कि बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जाए।
प्रो. अमित पाहवा ने कहा कि हिंदी भाषा हमारे राष्ट्र की सूत्रधार है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग बोलियां बोली जाती हैं, लेकिन हिंदी भाषा सबको एक सूत्र में पिरोकर रखने वाली भाषा है। हिंदी को अब विदेशों में भी बढ़ावा मिल रहा है। चीन, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका के विश्वविद्यालय भी अब हिंदी भाषा को पढ़ा रहे हैं। भाषा के साथ ही हमारी संस्कृति का विकास हो रहा है।
प्रो. सुभाष शर्मा ने कहा कि हृदय नहीं वह पत्थर है, जिसे स्वदेश से प्यार नहीं, अगर इन बातों को हम सारगर्भित देखना चाहते हैं तो भी हमें हिंदी भाषा को ज्यादा महत्व देना चाहिए। हमारा देश प्रेम भी तभी सार्थक होता है, जब हम मातृभाषा को बढ़ावा देंगे। हिंदी भाषा पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती है। नई शिक्षा नीति में भी हिंदी भाषा को विशेष महत्व दिया गया है। जितना भी हमारा अब पाठ्यक्रम होगा, वह हमारी मातृभाषा में छोटे बच्चों को प्रेषित होगा।
प्रो. विरेंद्र खटकड़ ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए, तभी हम भाषा के विस्तार को लेकर कुछ नया प्रयास कर सकते हैं। भाषा को एक नई बुलंदी तक पहुंचा सकते हैं। किसी भी देश के विकास में वहां की भाषा महत्वपूर्ण है। हम हिंदी को अपने व्यवहार में प्रयोग करेंगे तो इससे भाषा का विकास होगा। बच्चों को शुरू से ही हिंदी भाषा पढ़ाने से हिंदी का विकास होगा। सरकारी कार्यालयों में भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग होना चाहिए।
प्रो. नवीन वर्मा ने कहा कि हमारे देश में हिंदी को महत्व देना सबसे जरूरी है। यह भाषा संचार का बड़ा माध्यम है। देश के किसी भी कोने में जाकर हिंदी भाषा में आसानी ने अपने विचारों का आदान प्रदान कर सकते हैं। हिंदी भाषा हमारे देश में इंटरनेट का माध्यम बननी चाहिए। हमारे बच्चों को हम अन्य भाषाएं सिखाएं, लेकिन हिंदी भाषा को विशेष महत्व दें।
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प्राचार्या प्रो. सुनीता अरोड़ा ने कहा कि भाषा को बढ़ावा देने के लिए हमें सबसे पहले इसके महत्व को समझना जरूरी है। भारत जैसे देश में जहां बहुभाषायी लोग रहते हैं, वहां हिंदी सबको एक सूत्र में पिरो कर रखने का कार्य कर रही है। हमारे देश के किसी भी कोने में हम तभी एक दूसरे से संवाद कर सकते हैं, जब एक संवाद का एक प्रबल माध्यम हमारे पास होगा। इसके लिए भी हिंदी भाषा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे देश में सरकारी कार्यालयों का कामकाज हिंदी में होगा तो भाषा को काफी बढ़ावा मिलेगा।
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हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा दीक्षित ने कहा कि 14 सितंबर 1947 से हिंदी को हमारी राजभाषा के रूप में मान्यता मिली हुई है। हिंदी को हमारी राष्ट्रभाषा बनाना चाहिए। हमारी व्यवस्था शुरू से अंग्रेजी पर आधारित रही है, जिसका अनुवाद करने की भी आवश्यकता है। डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल के शोधानुसार हिंदी विश्व की नंबर एक भाषा है। विश्व की करीब 8 अरब की आबादी में हर छठवां व्यक्ति हिंदी भाषा का जानकार है। हम अपने व्यवहार में हिंदी भाषा को लाकर भी इसका विस्तार कर सकते हैं।
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फिजिक्स शिक्षिका डॉ. मीना शर्मा ने कहा कि पाठ्यक्रम में भी हिंदी के आधार को अनिवार्यता देनी चाहिए। विज्ञान जैसे विषयों में भी ज्यादा से ज्यादा हिंदी का प्रयोग हो। इससे बच्चे हिंदी भाषा के बारे में ज्यादा जान सकेंगे और भाषा के विस्तार को बल मिलेगा। उन्होंने भाषा के महत्व को काव्य के माध्यम से भी प्रस्तुत किया कि-
हिंदी सीमा तोडक़र चली विश्व के द्वार, वैज्ञानिक आधार पर प्रसिद्धि मिली अपार,
अब तो मिलना चाहिए हिंदी को सम्मान, पूर्ण राष्ट्र भाषा बने ऐसा लो संज्ञान...।
फिजिक्स शिक्षिका डॉ. नीलम ने हिंदी भाषा को लेकर दो पंक्तियां कही कि निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति के मोल....। उन्होंने कहा कि जब भी हमें चोट लगती है तो हम सबसे पहले मां शब्द बोलते हैं। हमें जब भी कोई दुख होता है तो हम सबसे पहले अपनी मां और मातृभाषा को याद करते हैं। हमें तकनीकी युग में दूसरी भाषा भी सीखनी चाहिए, लेकिन हमारी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि अपने बच्चों को सबसे पहले मातृभाषा ही सिखाई जाए।
प्रो. रुपाली ने कहा कि हिंदी भाषा हमारे गौरव और स्वाभिमान की भाषा है। यह विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक हिंदी भाषा का नाम और ज्यादा शक्तिशाली भाषाओं में शामिल हो जाएगा। हमारे देश की करीब 18 करोड़ आबादी हिंदी भाषा का प्रयोग कर रही है। दुनिया के 150 देशों में हिंदी भाषा बोली जाती है। दुनिया में नेट पर जितने सर्च इंजिन हैं, उनमें 90 प्रतिशत अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता है। हमारा प्रयास हो कि सर्च इंजन में भी हिंदी भाषा को महत्वपूर्ण स्थान मिले।
डॉ. अभिषेक गोयल ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है। हमें अपने विचारों का आदान प्रदान हिंदी भाषा में ही ज्यादा करना चाहिए। इसी बात को लेकर केंद्र सरकार भी कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति में भी यह छूट दी गई है कि कोई विद्यार्थी किसी विषय को हिंदी में पढऩा चाहता है तो पढ़ सकता है। इसी प्रकार से इसमें यह भी कहा गया है कि बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जाए।
प्रो. अमित पाहवा ने कहा कि हिंदी भाषा हमारे राष्ट्र की सूत्रधार है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग बोलियां बोली जाती हैं, लेकिन हिंदी भाषा सबको एक सूत्र में पिरोकर रखने वाली भाषा है। हिंदी को अब विदेशों में भी बढ़ावा मिल रहा है। चीन, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका के विश्वविद्यालय भी अब हिंदी भाषा को पढ़ा रहे हैं। भाषा के साथ ही हमारी संस्कृति का विकास हो रहा है।
प्रो. सुभाष शर्मा ने कहा कि हृदय नहीं वह पत्थर है, जिसे स्वदेश से प्यार नहीं, अगर इन बातों को हम सारगर्भित देखना चाहते हैं तो भी हमें हिंदी भाषा को ज्यादा महत्व देना चाहिए। हमारा देश प्रेम भी तभी सार्थक होता है, जब हम मातृभाषा को बढ़ावा देंगे। हिंदी भाषा पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती है। नई शिक्षा नीति में भी हिंदी भाषा को विशेष महत्व दिया गया है। जितना भी हमारा अब पाठ्यक्रम होगा, वह हमारी मातृभाषा में छोटे बच्चों को प्रेषित होगा।
प्रो. विरेंद्र खटकड़ ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए, तभी हम भाषा के विस्तार को लेकर कुछ नया प्रयास कर सकते हैं। भाषा को एक नई बुलंदी तक पहुंचा सकते हैं। किसी भी देश के विकास में वहां की भाषा महत्वपूर्ण है। हम हिंदी को अपने व्यवहार में प्रयोग करेंगे तो इससे भाषा का विकास होगा। बच्चों को शुरू से ही हिंदी भाषा पढ़ाने से हिंदी का विकास होगा। सरकारी कार्यालयों में भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग होना चाहिए।
प्रो. नवीन वर्मा ने कहा कि हमारे देश में हिंदी को महत्व देना सबसे जरूरी है। यह भाषा संचार का बड़ा माध्यम है। देश के किसी भी कोने में जाकर हिंदी भाषा में आसानी ने अपने विचारों का आदान प्रदान कर सकते हैं। हिंदी भाषा हमारे देश में इंटरनेट का माध्यम बननी चाहिए। हमारे बच्चों को हम अन्य भाषाएं सिखाएं, लेकिन हिंदी भाषा को विशेष महत्व दें।

My language progress is oh, the price of all progress...- फोटो : Kaithal