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संतान की दीर्घायु के लिए सकट चौथ का व्रत रखतीं है माताएं : विशाल
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कलायत। हिंदू संस्कृति में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सकट चौथ का व्रत रखने की परंपरा है। संतान की दीर्घायु के लिए माताएं इस व्रत को पूरी श्रृद्धा और आस्था के साथ करती हैं। सकट चौथ का व्रत संतान की सुरक्षा और संकटों से रक्षा के लिए करते हैं। सकट चौथ को तिलकुट चौथ, तिल चौथ, तिलकुट चतुर्थी, माघ चतुर्थी, माघ संकष्टी चतुर्थी आदि नामों से देश भर में जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा करती हैं। सकट चौथ का व्रत हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखते हैं।
संकट चतुर्थी व्रत को लेकर पंडित विशाल शांडिल्य से बात की गई तो उन्होंने बताया की सबसे पहले बात करते हैं सकट चौथ के लिए जरूरी माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि की। पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि 17 जनवरी को सुबह 04: 06 बजे से लेकर 18 जनवरी को सुबह 05: 30 बजे तक है। 17 और 18 जनवरी दोनों दिन सुबह में चतुर्थी तिथि देखकर लोगों के मन में सवाल उठता है कि सकट चौथ का व्रत किस दिन रखें। ऐसे में सकट चौथ का व्रत रखने के लिए उदयातिथि की मान्यता को देखते हैं। उदयातिथि का अर्थ है कि सूर्योदय के समय मिलने वाली तिथि। 17 जनवरी को सूर्योदय सुबह सात बजकर 15 मिनट पर होगा। उस समय माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि होगी। 18 जनवरी को चतुर्थी तिथि सूर्योदय से पहले ही खत्म हो रही है। ऐसे में सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी शुक्रवार को रखा जाएगा।
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सकट चौथ व्रत का महत्व
सकटों को दूर करने वाली चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की खुशहाली और लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। गणेश जी प्रथम पूज्य देवता होने के कारण हर शुभ कार्य से पहले पूजे जाते हैं। इस व्रत में उपवास के साथ गणेश जी की कथा भी सुनी जाती है। मान्यता यह भी है कि इस व्रत को करने से संतान को करियर में बड़ी सफलता प्राप्त होती है।
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चौथ व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
शांडिल्य ने बताया की सकट चौथ व्रत में सुबह की पूजा के लिए दो मुहूर्त सबसे शुभ माने जा रहे हैं। पहला मुहूर्त सुबह पांच बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक है। दूसरा मुहूर्त सुबह आठ बजकर 34 मिनट से लेकर 9 बजकर 53 मिनट तक है। इसके बाद शाम में प्रदोष काल में गणेशजी की पूजा की जाती है और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
सकट चौथ व्रत चंद्रोदय का समय
सकट चौथ व्रत को रात में नौ बजकर 9 मिनट पर चंद्रोदय होगा। इस दिन चंद्रमा को अघ्र्य देकर उनकी पूजा करना काफी शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय पूजा करने से भक्तों पर चंद्रमा की कृपा बरसती है और संतान की आयु लंबी होती है।