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Kaithal News: रेवाड़ी से आई 10 बसों में से अधिकांश खराब

Mon, 07 Jul 2025 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 07 Jul 2025 01:22 AM IST
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Most of the 10 buses that came from Rewari were in bad condition
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। सरकार की ओर से एक दिन पहले ही रेवाड़ी से कैथल डिपो में भेजी गई 10 बसों में से अधिकांश बसें खस्ताहाल हैं। इन बसों में सबसे ज्यादा दिक्कत सीटों के फटे होने और शीशों के टूटने की है। बावजूद इसके परिवहन विभाग ने बिना किसी मरम्मत के इन्हें सीधे स्थानीय रूटों पर भेज दिया।

इससे रोडवेज कर्मचारी यूनियन के सदस्यों में नाराजगी है। यूनियन नेताओं ने कहा कि इन बसों को डिपो पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद रूटों पर भेज दिया गया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कम से कम इनकी ठीक से जांच तो की जानी चाहिए थी।
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डिपो में बसों की संख्या बढ़ी, लेकिन खराब बसों की गिनती भी 70 पहुंची

फिलहाल कैथल डिपो के बेड़े में कुल 202 बसें हैं, जिनमें 70 बसें खराब पड़ी हैं। पिछले साल नवंबर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदेश के एनसीआर जिलों में ग्रैप लागू किया गया था। इसके चलते बीएस-3 और बीएस-4 तकनीक की बसों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद एनसीआर जिलों से दूसरी जगहों पर बसें भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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यात्रियों की लगातार

बढ़ रही परेशानी

कैथल डिपो में लगातार जर्जर बसें आने से यात्रियों की परेशानी कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। सरकार नई बसें भेजने की बजाय पुराने वाहन ही बेड़े में शामिल कर रही है। -जगदीप सिंह, परिचालक, कैथल डिपो

बसों की खराब होने की समस्या है अधिक

सबसे ज्यादा समस्या बीच रास्ते में बसों के खराब होने की है। इससे परिचालकों और चालकों दोनों को दिक्कत होती है। सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। - रोशन कुमार, चालक, कैथल डिपो

एनसीआर जिलों से आने वाली बसों में कुछ कमियां होती हैं, जिन्हें समय-समय पर दूर किया जाता है। यात्रियों की सुविधा के अनुसार मरम्मत का काम चल रहा है। - अनिल चोपड़ा, कार्यशाला प्रबंधक, कैथल डिपो
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