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सत्यम् शिवम् सुन्दरम् केवल सूत्र वाक्य नहीं, भारतीय जनसंचार की अवधारणा : डॉ. अभिषेक गोयल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:26 PM IST
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Satyam Shivam Sundaram is not just a formula, it is the concept of Indian mass communication: Dr. Abhishek Goyal
कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य। विज्ञप्ति
कैथल। डॉ. बीआर अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, कैथल के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की ओर से दूरदर्शन दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को भारत में टेलीविजन प्रसारण के विकास, दूरदर्शन की भूमिका और जनसंचार के क्षेत्र में इसके योगदान की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने दूरदर्शन की विकास यात्रा और बदलते टेलीविजन पत्रकारिता के स्वरूप पर अपने विचार भी साझा किए।
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विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक गोयल ने बताया कि भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली में प्रायोगिक सेवा के रूप में हुई थी। प्रारंभ में यह आकाशवाणी के अंतर्गत संचालित होता था। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन का सत्यम् शिवम् सुन्दरम् केवल सूत्र वाक्य नहीं, बल्कि भारतीय जनसंचार की ऐसी अवधारणा को दर्शाता है जिसमें सत्य सूचना, समाज कल्याण और प्रभावी प्रस्तुति को समान महत्व दिया जाता है। उन्होंने बताया कि दूरदर्शन के लोगो का मूल डिजाइन एनआईडी के छात्र देवाशीष भट्टाचार्य ने तैयार किया था जिसमें बाद में बदलाव किए गए। डॉ. मोनिका जाखड़ ने कहा कि दूरदर्शन ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को देश के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. वीरेंद्र खटकड़ ने बताया कि 1 अप्रैल 1976 को टेलीविजन सेवा को आकाशवाणी से अलग कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन अलग विभाग बनाया गया।
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डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि दूरदर्शन ने भारत में टेलीविजन पत्रकारिता को मजबूत आधार दिया और समाचार एवं समसामयिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनमत निर्माण में योगदान किया। डॉ. मेहर सिंह ने कहा कि दूरदर्शन मनोरंजन के साथ शिक्षा और जनजागरूकता का भी प्रभावी माध्यम रहा है। ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों तक सूचना पहुंचाने में इसकी भूमिका उल्लेखनीय रही।
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डॉ. अमित पाहवा ने कहा कि दूरदर्शन की यात्रा भारतीय मीडिया के विकास की महत्वपूर्ण कहानी है। तकनीकी बदलाव के साथ मीडिया की भाषा, प्रस्तुति और दर्शकों की अपेक्षाएं भी बदल रही हैं। कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य। विज्ञप्ति

कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य। विज्ञप्ति

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