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Kaithal News: पर्यावरण संरक्षण का संदेश ः एक पौधा, एक जीवन
Thu, 05 Jun 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:19 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक पौधा, एक जीवन के संदेश को आत्मसात करते हुए कैथल की अग्रणी सामाजिक संस्था जीवन रक्षक दल पिछले आठ वर्षों से लगातार पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। संस्था अब तक करीब 5,000 पौधे लगा चुकी है, और यह कार्य पूरी तरह से सार्वजनिक स्थलों पर केंद्रित है ताकि पौधों की सही देखरेख और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
संस्था द्वारा मंदिरों, धर्मशालाओं, पार्कों, श्मशान घाटों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण किया जाता है। यही नहीं, संस्था अपने हर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि को पौधा भेंट कर सम्मानित करती है, ताकि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश और भी लोगों तक पहुंचे।
हर वर्ष 600 से अधिक पौधे और 200 त्रिवेणियां ः संस्था के संरक्षक राजू डोहर ने बताया कि वर्ष 2017 में पौधरोपण अभियान की शुरुआत की गई थी। कोरोना के दौरान अभियान को और गति मिली। संस्था हर वर्ष औसतन 600 पौधे विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगाती है। अब तक 200 त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम के संयुक्त पौध) भी रोपित किए जा चुके हैं, जो भारतीय संस्कृति और पारंपरिक आस्था का प्रतीक माने जाते हैं।
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राजू डोहर ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार लकड़ियों से किया जाता है, तो हर व्यक्ति का कर्तव्य बनता है कि वह कम से कम दो पौधे अपने जीवनकाल में जरूर लगाए। उन्होंने कहा कि पौधारोपण सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने का संकल्प है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी ः संस्था का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
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कैथल। एक पौधा, एक जीवन के संदेश को आत्मसात करते हुए कैथल की अग्रणी सामाजिक संस्था जीवन रक्षक दल पिछले आठ वर्षों से लगातार पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। संस्था अब तक करीब 5,000 पौधे लगा चुकी है, और यह कार्य पूरी तरह से सार्वजनिक स्थलों पर केंद्रित है ताकि पौधों की सही देखरेख और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
संस्था द्वारा मंदिरों, धर्मशालाओं, पार्कों, श्मशान घाटों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण किया जाता है। यही नहीं, संस्था अपने हर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि को पौधा भेंट कर सम्मानित करती है, ताकि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश और भी लोगों तक पहुंचे।
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हर वर्ष 600 से अधिक पौधे और 200 त्रिवेणियां ः संस्था के संरक्षक राजू डोहर ने बताया कि वर्ष 2017 में पौधरोपण अभियान की शुरुआत की गई थी। कोरोना के दौरान अभियान को और गति मिली। संस्था हर वर्ष औसतन 600 पौधे विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगाती है। अब तक 200 त्रिवेणी (बरगद, पीपल और नीम के संयुक्त पौध) भी रोपित किए जा चुके हैं, जो भारतीय संस्कृति और पारंपरिक आस्था का प्रतीक माने जाते हैं।
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राजू डोहर ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार लकड़ियों से किया जाता है, तो हर व्यक्ति का कर्तव्य बनता है कि वह कम से कम दो पौधे अपने जीवनकाल में जरूर लगाए। उन्होंने कहा कि पौधारोपण सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने का संकल्प है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी ः संस्था का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।