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Kaithal News: कलायत में पार्षद संजय की सदस्यता बरकरार
Fri, 20 Jun 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 20 Jun 2025 01:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। नगर पालिका कलायत के वार्ड 10 से महज एक वोट से पार्षद पद पर विजयी हुए संजय सिंगला की सदस्यता नंबरदार पद पर रहते हुए भी यथावत बनी रहेगी। राज्य चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि नंबरदार का पद लाभ के पद की श्रेणी में नहीं आता और इस आधार पर कोई अयोग्यता नहीं बनती।
संजय सिंगला की सदस्यता को लेकर उनके प्रतिद्वंदी उम्मीदवार विनोद गर्ग ने राज्य चुनाव आयोग समेत विभिन्न स्तरों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि सिंगला ने नंबरदार पद पर रहते हुए पार्षद चुनाव लड़ा, जो नियमों के विरुद्ध है। आयोग ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त कैथल, नगर पालिका सचिव और एसडीएम कलायत को पत्र भेजा।
राज्य चुनाव आयोग ने अपने पत्र में हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा 13ए(1)(ए)(बी), हरियाणा राज्य विधान (अयोग्यता निवारण) अधिनियम 1974 की धारा 3(1)(ए) तथा सर्वोच्च न्यायालय के 29 नवंबर 2010 के अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य चुनाव आयोग मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नंबरदार का पद लाभ का पद नहीं माना गया है। इसलिए संजय सिंगला की पार्षद पद पर नियुक्ति वैध है।
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विवाद पर आयोग की स्थिति स्पष्ट
राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त धनपत सिंह ने बताया कि कोई भी नंबरदार नगर निगम, परिषद या समिति में पार्षद, अध्यक्ष अथवा मेयर के चुनाव में भाग ले सकता है, बशर्ते वह क्षेत्र का मतदाता हो और पात्रता की शर्तें पूरी करता हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम चुनाव नियम 8(एच) और 21(डी) के तहत वह उम्मीदवार अयोग्य माना जाता है जो सरकार के अधीन लाभ का कोई पद धारण करता हो। उसे चुनाव लड़ने से वंचित किया जाएगा; लेकिन चूंकि नंबरदार को वेतन नहीं मिलता, केवल मानदेय दिया जाता है, अत: यह लाभ का पद नहीं माना जाता। इसलिए वह चुनाव लड़ सकता है और जनप्रतिनिधि के पद पर बना रह सकता है।
नंबरदारों को राहत
राज्य चुनाव आयोग के इस निर्णय से संजय सिंगला की सदस्यता तो सुरक्षित रही ही, साथ ही प्रदेश भर में पार्षद या जनप्रतिनिधि पदों पर कार्यरत अन्य नंबरदारों को भी राहत मिली है। यह फैसला ऐसे सभी मामलों में मार्गदर्शन का आधार बनेगा, जहां दो पदों पर होने को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।
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कलायत। नगर पालिका कलायत के वार्ड 10 से महज एक वोट से पार्षद पद पर विजयी हुए संजय सिंगला की सदस्यता नंबरदार पद पर रहते हुए भी यथावत बनी रहेगी। राज्य चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि नंबरदार का पद लाभ के पद की श्रेणी में नहीं आता और इस आधार पर कोई अयोग्यता नहीं बनती।
संजय सिंगला की सदस्यता को लेकर उनके प्रतिद्वंदी उम्मीदवार विनोद गर्ग ने राज्य चुनाव आयोग समेत विभिन्न स्तरों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि सिंगला ने नंबरदार पद पर रहते हुए पार्षद चुनाव लड़ा, जो नियमों के विरुद्ध है। आयोग ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त कैथल, नगर पालिका सचिव और एसडीएम कलायत को पत्र भेजा।
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राज्य चुनाव आयोग ने अपने पत्र में हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा 13ए(1)(ए)(बी), हरियाणा राज्य विधान (अयोग्यता निवारण) अधिनियम 1974 की धारा 3(1)(ए) तथा सर्वोच्च न्यायालय के 29 नवंबर 2010 के अनोख सिंह बनाम पंजाब राज्य चुनाव आयोग मामले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नंबरदार का पद लाभ का पद नहीं माना गया है। इसलिए संजय सिंगला की पार्षद पद पर नियुक्ति वैध है।
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विवाद पर आयोग की स्थिति स्पष्ट
राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त धनपत सिंह ने बताया कि कोई भी नंबरदार नगर निगम, परिषद या समिति में पार्षद, अध्यक्ष अथवा मेयर के चुनाव में भाग ले सकता है, बशर्ते वह क्षेत्र का मतदाता हो और पात्रता की शर्तें पूरी करता हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम चुनाव नियम 8(एच) और 21(डी) के तहत वह उम्मीदवार अयोग्य माना जाता है जो सरकार के अधीन लाभ का कोई पद धारण करता हो। उसे चुनाव लड़ने से वंचित किया जाएगा
नंबरदारों को राहत
राज्य चुनाव आयोग के इस निर्णय से संजय सिंगला की सदस्यता तो सुरक्षित रही ही, साथ ही प्रदेश भर में पार्षद या जनप्रतिनिधि पदों पर कार्यरत अन्य नंबरदारों को भी राहत मिली है। यह फैसला ऐसे सभी मामलों में मार्गदर्शन का आधार बनेगा, जहां दो पदों पर होने को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।