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दादी-नानी के नुस्खों से बीमारियों से बचाएंगें बच्चों को
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:20 PM IST
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dr. munish bansal
- फोटो : ब्यूरो
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कैथल। आधुनिकता के बीच आज जब हम अपने पुराने तौर-तरीकों को भूल गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य व जान माल की सुरक्षा के लिए इन तौर-तरीकों को बचाने का बीड़ा उठाया है। विभाग द्वारा टच थेरेपी से होने वाले बच्चों के इलाज के लिए कंगारु मदर केयर यूनिट स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। ताकि दादी-नानी के नुस्खों का प्रयोग कर बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सके।
प्राचीन तौर-तरीकों को भूलने के कारण आ रही हैं परेशानियां
पुराने जमाने से ही दादी व नानी द्वारा नवजात शिशुओं को अपनी गोद के आंचल में छिपा कर बीमारियों से बचाया जाता रहा है। जब भी बच्चा पैदा होता है तो उसे कपड़े में लपेट कर दादी या नानी सहित मां अपनी गोद की छांव में रखती हैं। जिससे बच्चों को टच थेरेपी के माध्यम से अनेकों बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
साथ ही बच्चे की त्वचा में वसा कम होती है। उसे अपनी मां, दादी या नानी की गोद से आवश्यक गर्मी मिल जाती है। जो कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा दिलवा देती है। विशेष रूप से कम वजन वाले बच्चों के लिए यह काफी जरूरी हो जाता है। लेकिन आज के समय में महिलाएं इन तौर-तरीकों से दूर होती जा रही हैं। जिस कारण थोड़ी सी परेशानी पर ही डॉक्टरों की जरूरत पड़ती है।
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महिलाओं को किया जाएगा जागरूक
स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं को इस बारे में जागरूक किया जाएगा कि वे अपने बच्चों को टच थेरेपी के माध्यम से स्वस्थ रखें। उन्हें इस तरह से बच्चों को रखने से होने वाले लाभ की जानकारी दी जाएगी कि वे अपने बच्चों को किन-किन बीमारियों से बचा सकेंगी। उन्हें अनावश्यक अस्पताल की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा।
सिविल सर्जन डा. मुनीष बंसल ने कहा कि जिला अस्पताल में एक कंगारु केयर यूनिट स्थापित की जाएगी। जिसमें कंगारु की तर्ज पर महिलाओं को अपने बच्चे की देखभाल एवं उसे टच थेरेपी के माध्यम से होने वाले लाभ की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस यूनिट में बाकायदा स्टाफ रखा जाएगा। जो महिलाओं को उन पुराने तौर-तरीकों की जानकारी देगा, जिनकी सहायता से महिलाएं गोद में लेकर बच्चों को बीमारियों से मुक्ति दिला देती थी।
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प्राचीन तौर-तरीकों को भूलने के कारण आ रही हैं परेशानियां
पुराने जमाने से ही दादी व नानी द्वारा नवजात शिशुओं को अपनी गोद के आंचल में छिपा कर बीमारियों से बचाया जाता रहा है। जब भी बच्चा पैदा होता है तो उसे कपड़े में लपेट कर दादी या नानी सहित मां अपनी गोद की छांव में रखती हैं। जिससे बच्चों को टच थेरेपी के माध्यम से अनेकों बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
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साथ ही बच्चे की त्वचा में वसा कम होती है। उसे अपनी मां, दादी या नानी की गोद से आवश्यक गर्मी मिल जाती है। जो कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा दिलवा देती है। विशेष रूप से कम वजन वाले बच्चों के लिए यह काफी जरूरी हो जाता है। लेकिन आज के समय में महिलाएं इन तौर-तरीकों से दूर होती जा रही हैं। जिस कारण थोड़ी सी परेशानी पर ही डॉक्टरों की जरूरत पड़ती है।
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महिलाओं को किया जाएगा जागरूक
स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं को इस बारे में जागरूक किया जाएगा कि वे अपने बच्चों को टच थेरेपी के माध्यम से स्वस्थ रखें। उन्हें इस तरह से बच्चों को रखने से होने वाले लाभ की जानकारी दी जाएगी कि वे अपने बच्चों को किन-किन बीमारियों से बचा सकेंगी। उन्हें अनावश्यक अस्पताल की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा।
सिविल सर्जन डा. मुनीष बंसल ने कहा कि जिला अस्पताल में एक कंगारु केयर यूनिट स्थापित की जाएगी। जिसमें कंगारु की तर्ज पर महिलाओं को अपने बच्चे की देखभाल एवं उसे टच थेरेपी के माध्यम से होने वाले लाभ की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस यूनिट में बाकायदा स्टाफ रखा जाएगा। जो महिलाओं को उन पुराने तौर-तरीकों की जानकारी देगा, जिनकी सहायता से महिलाएं गोद में लेकर बच्चों को बीमारियों से मुक्ति दिला देती थी।