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Kaithal News: गेहूं से भरीं मंडियां, किसानों की जेबें खाली
Tue, 14 Apr 2026 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की बंपर आवक के बीच सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आ रहा है। 48 घंटे के भीतर भुगतान के दावे फिलहाल धरातल पर पूरे नहीं उतर पा रहे हैं। मंडियां गेहूं की बोरियों से भरी पड़ी हैं, लेकिन किसानों को भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
मंडियों में अब तक 2.21 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जिसमें से केवल 1.26 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद की गई है। सबसे बड़ी समस्या उठान की बनी हुई है। खरीदी गई फसल में से मात्र 215 मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है, जिससे मंडियों में नई फसल के लिए जगह की कमी हो रही है। जब तक फसल का उठान होकर गोदामों तक नहीं पहुंचता और जे-फॉर्म की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसानों के खातों में भुगतान संभव नहीं हो पाता।
पोर्टल धीमा, गेट पास में भी परेशानी : गेट पास जारी करने के लिए बनाया गया सरकारी पोर्टल भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। पोर्टल की धीमी गति और बंद होने से गेट पास कटवाने में दिक्कतें आ रही हैंै।
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किसान नेता विक्रम ने आरोप लगाया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में तकनीकी खामियां, बायोमेट्रिक सत्यापन और ट्रैक्टरों के लिए अनिवार्य नंबर प्लेट जैसे नियमों ने खरीद प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। कई किसान हफ्तों से अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में डेरा डाले हुए हैं।
मैं तीन दिन पहले मंडी में फसल बेच चुका हूं लेकिन अभी तक खाते में रुपये नहीं आए हैं। -सुनील गोलन, पूंडरी निवासी
फसल बेचे हुए तीन दिन से ऊपर हो चुके हैं, लेकिन फसल बेचने के बाद भी जेब खाली है। - मोनी सिकंदर खेड़ी
मंडी में खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है और उठान प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। किसानों का भुगतान शुरू कर दिया गया है। -नरेंद्र ढुल, मार्केट कमेटी सचिव
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कैथल। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की बंपर आवक के बीच सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आ रहा है। 48 घंटे के भीतर भुगतान के दावे फिलहाल धरातल पर पूरे नहीं उतर पा रहे हैं। मंडियां गेहूं की बोरियों से भरी पड़ी हैं, लेकिन किसानों को भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
मंडियों में अब तक 2.21 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जिसमें से केवल 1.26 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद की गई है। सबसे बड़ी समस्या उठान की बनी हुई है। खरीदी गई फसल में से मात्र 215 मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है, जिससे मंडियों में नई फसल के लिए जगह की कमी हो रही है। जब तक फसल का उठान होकर गोदामों तक नहीं पहुंचता और जे-फॉर्म की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसानों के खातों में भुगतान संभव नहीं हो पाता।
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पोर्टल धीमा, गेट पास में भी परेशानी : गेट पास जारी करने के लिए बनाया गया सरकारी पोर्टल भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। पोर्टल की धीमी गति और बंद होने से गेट पास कटवाने में दिक्कतें आ रही हैंै।
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किसान नेता विक्रम ने आरोप लगाया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में तकनीकी खामियां, बायोमेट्रिक सत्यापन और ट्रैक्टरों के लिए अनिवार्य नंबर प्लेट जैसे नियमों ने खरीद प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। कई किसान हफ्तों से अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में डेरा डाले हुए हैं।
मैं तीन दिन पहले मंडी में फसल बेच चुका हूं लेकिन अभी तक खाते में रुपये नहीं आए हैं। -सुनील गोलन, पूंडरी निवासी
फसल बेचे हुए तीन दिन से ऊपर हो चुके हैं, लेकिन फसल बेचने के बाद भी जेब खाली है। - मोनी सिकंदर खेड़ी
मंडी में खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है और उठान प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। किसानों का भुगतान शुरू कर दिया गया है। -नरेंद्र ढुल, मार्केट कमेटी सचिव