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Kaithal News: 4.40 लाख एकड़ में धान, 11 लाख टन फसल अवशेष का हो सकेगा प्रबंधन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 12:36 AM IST
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Management of 11 lakh tonnes of crop residue from paddy cultivated across 4.40 lakh acres will be possible.
एक स्टॉक में रखी पराली। संवाद
सोनू थुआ
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कैथल। धान की कटाई के साथ जिले में निकलने वाली करीब 11 लाख मीट्रिक टन पराली इस बार खेतों में आग का कारण नहीं, बल्कि चारा, ऊर्जा और उद्योग के लिए कच्चा माल बनेगी। जिले में 4.40 लाख एकड़ में धान की खेती से निकलने वाले फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। योजना के तहत 4.30 लाख मीट्रिक टन अवशेष खेत में ही मिलाया जाएगा जबकि 5.70 लाख टन पराली को खेतों से बाहर निकालकर उपयोग में लाया जाएगा।
इसके लिए मशीनरी से लेकर औद्योगिक इकाइयों और पशु चारे तक की व्यवस्था को योजना में शामिल किया गया है। खेतों से बाहर निकाली जाने वाली 5.70 लाख मीट्रिक टन पराली के लिए जिले में खपत का नेटवर्क तैयार किया गया है। इसमें करीब एक लाख टन अवशेष पशु चारे के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। वहीं 20 इकाइयों को भी पराली की खपत से जोड़ा गया है। इन इकाइयों की कुल वार्षिक उपयोग क्षमता 5.662 लाख मीट्रिक टन है और इनके पास करीब 4.50 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इन इकाइयों में छह बॉयलर, तीन बायोमास बिजली संयंत्र, छह पेलेट प्लांट, पांच एग्रीगेटर और पशु चारे से जुड़ी एक इकाई शामिल है। यहां पराली से ऊर्जा और पेलेट तैयार करने के साथ चारे के रूप में भी इसका उपयोग होगा।
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4050 मशीनें तैयार, 2.25 लाख एकड़ में गांठ बनाने की क्षमता
पराली प्रबंधन के लिए जिले में 4050 सीआरएम मशीनें उपलब्ध हैं। इनमें 3800 इन-सीटू और 250 एक्स-सीटू मशीनें शामिल हैं। उपलब्ध 250 स्ट्रॉ बेलर करीब 2.25 लाख एकड़ में पराली की गांठ बनाने में सक्षम हैं। एक्स-सीटू प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए 150 अतिरिक्त स्ट्रॉ बेलर की जरूरत का आकलन किया गया है।
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272 गांवों में किसानों को बताया जा रहा समाधान
पराली प्रबंधन के लिए जिले के 272 गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर और हॉटस्पॉट गांवों में किसानों को मशीनों के इस्तेमाल और अवशेष प्रबंधन के तरीकों की जानकारी दी जा रही है। खेत में अवशेष मिलाने, गांठ तैयार करने और उसे उद्योगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया जाएगा।
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पिछले वर्ष पराली जलाने की 72 जगह मिली थी सूचना
पिछले वर्ष जिले में 72 स्थानों पर पराली जलाने की सूचना मिली थी। इस बार निगरानी व्यवस्था को गांव स्तर तक मजबूत किया गया है। गांवों को रेड और येलो जोन में चिह्नित किया गया है। जिला और उपमंडल स्तर पर टीमें मशीनरी की उपलब्धता और फसल अवशेष प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखेंगी। जिला स्तर पर एसडीओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है जबकि उपमंडल स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में टीमें काम करेंगी।
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छह गांवों पर विशेष नजर
पिछले वर्षों के आंकड़ों के आधार पर जिले के कुछ गांवों को पराली जलाने के मामले में संवेदनशील माना गया है। कार्ययोजना में देबवन, पबनावा, कैलरम, खरौदी, सीवन और थेह खरक समेत पांच गांवों को प्रमुखता से चिह्नित किया गया है। जिले में वर्ष 2023 में 62 रेड जोन गांव थे, जो 2024 में घटकर 46 और 2025 में 15 रह गए हैं। कैथल में बासमती, 1121, पीआर व मुच्छल किस्म की धान रोपाई हर वर्ष होती है।

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अवशेष में आग न लगाएं किसान : सतीश
कृषि उपमंडल अधिकारी सतीश नारा व सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने कहा विभाग पूरी तरह से फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर तैयार है। किसानों से आह्वान है कि वे फलस अवशेषों में आग न लगाए बल्कि उसका प्रबंधन करें।
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