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वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच शुरू हुआ कैथल में पहली बार महारुद्र यज्ञ
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कैथल। छोटी काशी के नाम से पहचान रखने वाले कैथल शहर स्थित महाभारतकालीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में बुधवार को सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महारुद्र यज्ञ आरंभ हो गया। सुबह आठ बजे आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार, समाजसेवी कैलाश बंसल, राजेश गर्ग और आईपीएस राजपाल सिंह ने बतौर अतिथि महामंडलेश्वर योगी यतिंद्रानंद गिरी (श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा) की मौजूदगी में हवन-पूजन शुरू कराया। काशी से आए विद्वान ब्राह्मणों ने पहले दिन के सभी यजमानों की विधिवत पूजा अर्चना के बाद उन्हें यज्ञ मंडप में प्रवेश कराया। इसके बाद पूरे दिन घी और हवन सामग्री की आहुति से शहर का वातावरण अध्यात्मिक होता रहा।
यज्ञशाला में नौ वेदियां बनाई गईं हैं, जिन पर यजमानों ने परिवार के सदस्यों के साथ घी और हवन सामग्री की आहुति डाली। पहले सत्र में महारुद्र यज्ञ दोपहर डेढ़ बजे तक चला। इसके बाद कुछ देर का विश्राम हुआ। तीन बजे फिर यज्ञ शुरू हुआ, जो शाम छह बजे तक चला। शाम को आयकर कमिश्नर लुधियाना देवेंद्र अहलावत ने महारुद्र यज्ञ में भाग लिया। उन्होंने यज्ञशाला की परिक्रमा की और संतों का आशीर्वाद लिया। महारुद्र यज्ञ के पहले दिन जहां विद्वान ब्राह्मणों ने धार्मिक संकल्प कराया, वहीं आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने मानवीय, राष्ट्रीय और सामाजिक संकल्प करवाया। उन्होंने कहा कि महारुद्र के आशीर्वाद से सभी के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। जीवन में कोई गलती भी हो जाए तो महारुद्र मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। वे सुधरने का अवसर देते हैं। इस यज्ञ की कामना यही है कि सभी का कल्याण हो। इस यज्ञ में कामना है कि इससे कोरोना जैसी महामारी समाप्त हो। संयुक्त राष्ट्र से ही पूरे विश्व में गाय की हत्या पर रोक लगे। भारत अखंड हो। कैलाश मानसरोवर चीन के कब्जे से मुक्त हो। सीमाओं पर शांति आए। दंगे, फसाद, आतंक और माओवाद न हो। प्रेम और सदभाव के मार्ग पर चलें। ऐसा संकल्प लिया गया है। भव्य आयोजन के लिए उन्होंने श्री ग्यारह रुद्री मंदिर समिति की पीठ थपथपाई और कहा कि सभी को इस हवन में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहिए।
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यज्ञशाला में नौ वेदियां बनाई गईं हैं, जिन पर यजमानों ने परिवार के सदस्यों के साथ घी और हवन सामग्री की आहुति डाली। पहले सत्र में महारुद्र यज्ञ दोपहर डेढ़ बजे तक चला। इसके बाद कुछ देर का विश्राम हुआ। तीन बजे फिर यज्ञ शुरू हुआ, जो शाम छह बजे तक चला। शाम को आयकर कमिश्नर लुधियाना देवेंद्र अहलावत ने महारुद्र यज्ञ में भाग लिया। उन्होंने यज्ञशाला की परिक्रमा की और संतों का आशीर्वाद लिया। महारुद्र यज्ञ के पहले दिन जहां विद्वान ब्राह्मणों ने धार्मिक संकल्प कराया, वहीं आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने मानवीय, राष्ट्रीय और सामाजिक संकल्प करवाया। उन्होंने कहा कि महारुद्र के आशीर्वाद से सभी के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। जीवन में कोई गलती भी हो जाए तो महारुद्र मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। वे सुधरने का अवसर देते हैं। इस यज्ञ की कामना यही है कि सभी का कल्याण हो। इस यज्ञ में कामना है कि इससे कोरोना जैसी महामारी समाप्त हो। संयुक्त राष्ट्र से ही पूरे विश्व में गाय की हत्या पर रोक लगे। भारत अखंड हो। कैलाश मानसरोवर चीन के कब्जे से मुक्त हो। सीमाओं पर शांति आए। दंगे, फसाद, आतंक और माओवाद न हो। प्रेम और सदभाव के मार्ग पर चलें। ऐसा संकल्प लिया गया है। भव्य आयोजन के लिए उन्होंने श्री ग्यारह रुद्री मंदिर समिति की पीठ थपथपाई और कहा कि सभी को इस हवन में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहिए।
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