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महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में तैयार होंगे राजधर्म और पुराणों के ज्ञाता
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Knowledge of Rajdharma and Puranas will be prepared in Maharishi Valmiki Sanskrit University
- फोटो : Kaithal
प्रदेश के एकमात्र महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में अब राजधर्म और पुराणों के ज्ञाता तैयार होंगे। विश्वविद्यालय ने इस बार नए सत्र 2021-22 से धर्मशास्त्र और पुराण इतिहास डिग्री के नए कोर्स शुरू किए हैं। इन दोनों कोर्सेस में शिक्षा ग्रहण कर विद्यार्थी शास्त्री और आचार्य दोनों प्रकार की डिग्रियां हासिल कर सकेंगे। दोनों की कक्षाएं भी इसी वर्ष से शुरू कर दी जाएंगी, जिनमें दाखिले के लिए विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में पंजीकरण करना भी शुरू कर दिया है।
आचार्य में 35-35 व शास्त्री में निर्धारित की गई हैं 50-50 सीटें
विश्वविद्यालय में नए शुरू किए गए इन दो कोर्सेस में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए सीटों का भी पहले ही निर्धारण कर दिया गया है। इनमें आचार्य अर्थात एमए की डिग्री के लिए दोनों की 35-35 सीटें निर्धारित की गई हैं। दूसरी ओर शास्त्री अर्थात बीए की डिग्री के लिए दोनों कोर्सेस में 50-50 विद्यार्थी दाखिला ले सकेंगे।
धर्मशास्त्र में विद्यार्थियों को पुराने समय के राजधर्म के बारे में शिक्षा दी जाएगी और उसके अनुसार वर्तमान राजकाज के नियमों को सरल व मजबूत करने का बारे बताया जाएगा। इसके अलावा पुराण इतिहास में पुराणों का ज्ञान विद्यार्थियों को दिया जाएगा और वर्तमान परिवेश में सुधार के बारे में विद्यार्थियों को शिक्षण दिया जाएगा। प्रदेशभर के युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।
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विश्वविद्यालय के कुलपति राजकुमार मित्तल ने बताया कि इसी वर्ष से विश्वविद्यालय में दोनों कोर्स शुरू किए गए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आकर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को इससे काफी लाभ होगी। दोनों डिग्री विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ रोजगारपरक भी हैं। इससे भारतीय नई शिक्षा नीति को बल मिलेगा और विद्यार्थी प्राचीन भारतीय संस्कृति को भी जान सकेंगे।
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आचार्य में 35-35 व शास्त्री में निर्धारित की गई हैं 50-50 सीटें
विश्वविद्यालय में नए शुरू किए गए इन दो कोर्सेस में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए सीटों का भी पहले ही निर्धारण कर दिया गया है। इनमें आचार्य अर्थात एमए की डिग्री के लिए दोनों की 35-35 सीटें निर्धारित की गई हैं। दूसरी ओर शास्त्री अर्थात बीए की डिग्री के लिए दोनों कोर्सेस में 50-50 विद्यार्थी दाखिला ले सकेंगे।
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धर्मशास्त्र में विद्यार्थियों को पुराने समय के राजधर्म के बारे में शिक्षा दी जाएगी और उसके अनुसार वर्तमान राजकाज के नियमों को सरल व मजबूत करने का बारे बताया जाएगा। इसके अलावा पुराण इतिहास में पुराणों का ज्ञान विद्यार्थियों को दिया जाएगा और वर्तमान परिवेश में सुधार के बारे में विद्यार्थियों को शिक्षण दिया जाएगा। प्रदेशभर के युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।
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विश्वविद्यालय के कुलपति राजकुमार मित्तल ने बताया कि इसी वर्ष से विश्वविद्यालय में दोनों कोर्स शुरू किए गए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आकर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को इससे काफी लाभ होगी। दोनों डिग्री विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ रोजगारपरक भी हैं। इससे भारतीय नई शिक्षा नीति को बल मिलेगा और विद्यार्थी प्राचीन भारतीय संस्कृति को भी जान सकेंगे।