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Kaithal News: चाय वाले की बेटी खुशी ने एशियन गेम्स में नाम किया रोशन

Thu, 30 Oct 2025 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 30 Oct 2025 12:19 AM IST
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Khushi, daughter of a tea seller, made her name shine in the Asian Games.
खुशी का स्वागत करती हुईं डीसी व बीजेपी जिला अध्यक्ष।
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। चाय की रेहड़ी लगाने वाले पिता की बेटी खुशी सैनी (15) ने बहरीन में आयोजित एशियन गेम्स के कुराश मुकाबले में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। कैथल लौटने पर डीसी प्रीति व भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति सैनी ने खुशी को मेडल पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर एसडीएम अजय सिंह भी मौजूद रहे।

डीसी प्रीति ने कहा कि खुशी की यह उपलब्धि कैथल सहित पूरे हरियाणा के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं। उन्होंने खुशी को भविष्य में स्वर्ण पदक जीतने का संकल्प लेकर और मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह खुशी की लगातार दूसरी बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण कोरिया में हुई एशियन चैंपियनशिप के कुराश मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। डीसी प्रीति ने खुशी के पिता सतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी बेटी को आगे बढ़ने से नहीं रोका, यह पूरे समाज के लिए मिसाल है।
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दो वर्षों में मिली पहचान ःखुशी के कोच जोगिंदर सिंह और संदीप कुमार ने बताया कि खुशी मात्र दो साल पहले कुराश खेल से जुड़ी थीं। इससे पहले वह कुश्ती खेलती थीं। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में एशियन स्तर पर पदक जीतना उनकी लगन, अभिभावकों के समर्पण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। इस अवसर पर डीआईपीआरओ नसीब सिंह सैनी, समाजसेवी अनिल कुमार, जिला खेल अधिकारी राज रानी, बॉक्सिंग कोच गुरमीत सिंह, कैथल कुराश एसोसिएशन के सचिव मनोज कुमार व संदीप दीवाल उपस्थित रहे और खुशी की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।
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कुराश क्या है ः कुराश उज्बेकिस्तान से प्राचीन मार्शल आर्ट है जो जैकेट कुश्ती का एक रूप है। इस खेल में, खिलाड़ी एक-दूसरे की जैकेट (जिसे यख्ताक कहते हैं) को पकड़कर, प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर पटककर हराने की कोशिश करते हैं।


चाय की रेहड़ी से शुरू हुई बेटी के सपनों की उड़ान
खुशी के पिता सतीश कुमार सैनी कैथल में पुराने हिंद सिनेमा के पास चाय की रेहड़ी लगाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की खेल यात्रा में कभी रुकावट नहीं आने दी। रोज़ सुबह-शाम वे खुशी को प्रशिक्षण के लिए स्टेडियम छोड़ने जाते हैं और फिर अपने काम में जुट जाते हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति सैनी ने कहा कि खुशी और उनके पिता ने यह दिखा दिया कि कड़ी मेहनत और संकल्प किसी भी आर्थिक कठिनाई से बड़ी ताकत होती है। एसडीएम अजय सिंह ने भी खुशी, उनके परिवार और कोच को बधाई दी।
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