{"_id":"646bc80e27e1135754017ddb","slug":"kashvi-khushpreet-ashish-won-gold-medals-in-kurash-kaithal-news-c-18-1-129130-2023-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: कुराश में काशवी, खुशप्रीत आशीष ने जीते स्वर्ण पदक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: कुराश में काशवी, खुशप्रीत आशीष ने जीते स्वर्ण पदक
Tue, 23 May 2023 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 May 2023 01:22 AM IST
विज्ञापन
कैथल। आदर्श गुरुकुल स्कूल पेटवाड़, कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में हुई कैडेट एवं जूनियर नेशनल कुराश चैंपियनशिप में हरियाणा टीम कैडेट और जूनियर लड़के व लड़कियां ओवरऑल चैंपियन बनी। यह प्रतियोगिता 19 से 21 मई तक हुई थी। इसमें काशवी, आशीष, और खुशप्रीत ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीते।
टीम के कोच संदीप डीपीई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दीवाल ने बताया के जिला कैथल से हरियाणा टीम का प्रतिनिधित्व सात खिलाड़ियों ने किया। इसमें काशवी 63 किलो भार वर्ग में स्वर्ण, आशीष 55 किलो भार वर्ग में स्वर्ण और खुशप्रीत 57 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीते हैं। इसी प्रकार रोहित ने 73 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक, अनिल 60 किलो भार वर्ग में जानकी, 52 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीते।
इस उपलब्धि के लिए जिला खेल अधिकारी रामनिवास, जिला शिक्षा अधिकारी रविन्द्र चौधरी, रमेश चहल, ईश्वर ढांडा, राज कमल ढांडा, हरिओम शर्मा, गुरमीत सिंह, सुखबीर, अनिल कुमार, अशोक शर्मा पीजीटी, अनूप धीमान, सुमित शर्मा, गुरमीत सिंह बॉक्सिंग कोच, गुरनाम डीपीई, जोगिंदर जूडो कोच और सपना जूडो कोच ने खिलाड़ियों को बधाई दी। कुराश एसोसिएशन कैथल के महासचिव मनोज कुमार ने बताया कि सभी खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को एसोसिएशन की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन
क्या है कुराश और कैसे हैं इसके नियम
कुराश उज्बेकिस्तन की पारंपरिक मार्शल आर्ट की शैली है। यह कुछ हद तक पहलवानी की तरह ही है। दरअसल, दोनों में बस इतना फर्क है कि इसके नियम थोड़े अलग है। कुराश को आसान भाषा में समझे तो यह कुश्ती का वह रूप है जिसमें शरीर के निचले भाग का उपयोग नहीं किया जा सकता। इस खेल में कमर के नीचे के हिस्से को न तो पकड़ा जाता है और ना ही हिट या उस पर किट मारी जा सकती है। इस खेल में ना तो आर्मवॉक्स किया जाता है और ना ही चोकिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है।
वर्ष 1980 में कुराश को खेल का दर्जा मिला
साल 1980 में ही कुराश को खेल का दर्जा दिया गय। इस खेल के नियम में खिलाड़ी को अपने विरोधी को ग्रांउड पर गिराना होता है।
अगर वह खिलाड़ी अपने विरोधी को मजबूत तरीके से थ्रो करता है तो उसे खलोल कहा जाता है और वह उस बाउट का विजेता बन जाता है। इस खेल में पुरुष का मुकाबला 4 मिनट और महिलाओं का 3 मिनट का होता है। यदि खिलाड़ी विरोधी को उसे की तरफ गिरा देता है तो उसे योनबोश पॉइंट दिया जाता है। 2 योनबोश को एक खलोल माना जाता है। मुकाबलें में सबसे छोटे अंक को चाला कहा जाता है।
विज्ञापन
टीम के कोच संदीप डीपीई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दीवाल ने बताया के जिला कैथल से हरियाणा टीम का प्रतिनिधित्व सात खिलाड़ियों ने किया। इसमें काशवी 63 किलो भार वर्ग में स्वर्ण, आशीष 55 किलो भार वर्ग में स्वर्ण और खुशप्रीत 57 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीते हैं। इसी प्रकार रोहित ने 73 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक, अनिल 60 किलो भार वर्ग में जानकी, 52 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीते।
विज्ञापन
इस उपलब्धि के लिए जिला खेल अधिकारी रामनिवास, जिला शिक्षा अधिकारी रविन्द्र चौधरी, रमेश चहल, ईश्वर ढांडा, राज कमल ढांडा, हरिओम शर्मा, गुरमीत सिंह, सुखबीर, अनिल कुमार, अशोक शर्मा पीजीटी, अनूप धीमान, सुमित शर्मा, गुरमीत सिंह बॉक्सिंग कोच, गुरनाम डीपीई, जोगिंदर जूडो कोच और सपना जूडो कोच ने खिलाड़ियों को बधाई दी। कुराश एसोसिएशन कैथल के महासचिव मनोज कुमार ने बताया कि सभी खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को एसोसिएशन की तरफ से सम्मानित किया जाएगा।
विज्ञापन
क्या है कुराश और कैसे हैं इसके नियम
कुराश उज्बेकिस्तन की पारंपरिक मार्शल आर्ट की शैली है। यह कुछ हद तक पहलवानी की तरह ही है। दरअसल, दोनों में बस इतना फर्क है कि इसके नियम थोड़े अलग है। कुराश को आसान भाषा में समझे तो यह कुश्ती का वह रूप है जिसमें शरीर के निचले भाग का उपयोग नहीं किया जा सकता। इस खेल में कमर के नीचे के हिस्से को न तो पकड़ा जाता है और ना ही हिट या उस पर किट मारी जा सकती है। इस खेल में ना तो आर्मवॉक्स किया जाता है और ना ही चोकिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है।
वर्ष 1980 में कुराश को खेल का दर्जा मिला
साल 1980 में ही कुराश को खेल का दर्जा दिया गय। इस खेल के नियम में खिलाड़ी को अपने विरोधी को ग्रांउड पर गिराना होता है।
अगर वह खिलाड़ी अपने विरोधी को मजबूत तरीके से थ्रो करता है तो उसे खलोल कहा जाता है और वह उस बाउट का विजेता बन जाता है। इस खेल में पुरुष का मुकाबला 4 मिनट और महिलाओं का 3 मिनट का होता है। यदि खिलाड़ी विरोधी को उसे की तरफ गिरा देता है तो उसे योनबोश पॉइंट दिया जाता है। 2 योनबोश को एक खलोल माना जाता है। मुकाबलें में सबसे छोटे अंक को चाला कहा जाता है।