फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Kali Mata temple is considered to be from Mahabharata period.

Kaithal News: महाभारत कालीन माना जाता है काली माता मंदिर

Sat, 06 Apr 2024 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 06 Apr 2024 02:17 AM IST
विज्ञापन
Kali Mata temple is considered to be from Mahabharata period.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। माता गेट स्थित शहर के ऐतिहासिक सूर्यकुंड डेरे में स्थित काली माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वहीं इस डेरे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में आता है। मान्यता के अनुसार महाभारत काल में पांडव पुत्र युुधिष्ठिर ने कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड माता गेट पर सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था। वहीं, यहां पर स्थित काली माता के मंदिर को बाजीगर समाज की कुलदेवी माना जाता है। इसलिए चैत्र मास की अमावस्या व पहले नवरात्र पर यहां पर भव्य मेला लगता है।

इस बार सोमवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस अवसर पर यहां पर दो दिवसीय मेला आयोजित किया जाएगा। इस मेले के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से तैयारी तेज हैं। इनके तहत मंदिर परिसर को भव्य लाइटें लगाना शुरू कर दी हैं। परिसर के बाहर बाजार भी सज रहे हैं। सूर्यकुंड के साथ यहां पर माता शीतला और माता काली का मंदिर है। भगवान शिव का मंदिर भी यहां है। पूरे मंदिर की दीवारों पर काले-भूरे रंग के ग्रेनाइट पत्थर को जड़ा गया है। मंदिर के बाहरी चारदीवारी में भगवान दत्तात्रेय, भगवान लक्ष्मीनारायण, राधाकृष्ण, हिंगलाज माता, मां दुर्गा, माता बगलामुखी, मां अन्नपूर्णा व गेट पर हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं।
विज्ञापन


हर साल की तरह लगने वाले इस दो दिवसीय मेले में इस बार 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। ये श्रद्धालु हरियाणा सहित पंजाब, यूपी, राजस्थान और यूपी से भी पहुंचेंगे। बच्चों के झूले इत्यादि भी लगाने शुरू कर दी है। इसके साथ ही मेले में पहुंचने वाले लोगों के अस्थायी शौचालय और स्नानघर भी बनाना शुरू कर दिए गए हैं। मेले की तैयारियों के बीच मंदिर के महंत रमनपुरी ने भंडारा सहित अन्य सेवा देने वाले पहुंचे सेवादारों से बातचीत की और उन्हें व्यवस्था बनाने के लिए मंदिर प्रशासन से सहयोग की अपील की। महंत रमनपुरी ने बताया कि डेरा परिसर में स्थित काली माता का मंदिर बाजीगर समाज की कुल देवी मंदिर है। इस मेले सबसे अधिक संख्या बाजीगर समाज के लोग ही मां काली की पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार मेले के दोनों दिन जाम की स्थिति से बचने के लिए चीका बाईपास से लेकर सीवन गेट और माता गेट से कमेटी चौक का रूट डायवर्ट किया जाएगा। इसके लिए पुलिस प्रशासन से गुजारिश की गई है। बताया कि मेले में 200 से अधिक सेवादार दो दिन तक सेवा में तैनात रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है इतिहास
महंत रमनपुरी ने बताया कि डेरे में स्थित काली माता का मंदिर काफी प्राचीन है। इसकी काफी मान्यता है। आजादी से पहले बाजीगर समाज के बुजुर्ग कलवा पीर महाकाली के परम भक्त होते थे। वह लाहौर में रहते थे। सैकड़ों वर्ष पहले की बात है कि एक समय वह मां काली की आराधना कर रहे थे। उस समय जब वे रात के समय सोए तो मां काली ने उन्हें सपने में दर्शन दिए। फिर कहा कि उन्हें सुबह एक बकरा दिखेगा। उस बकरे के साथ चलना। जहां पर भी यह बकरा जाकर रुक जाए तो वहां पर ही मेरा मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना करना। माता की बताई गई बातों के अनुसार बकरा सूर्यकुंड डेरे में आकर रूका। इसके बाद से ही कलवा पीर यहां पर आकर बस गए। इस समय भी कलवा पीर की समाधि बनी है और उनका धुना लगा है। तभी से लेकर बाजीगर समाज की कुल देवी का मंदिर यहां पर ही बन गया। बाजीगर समाज में माता काली के मंदिर में माथा टेकने के बाद ही समाज के युवा व युवतियां अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed