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Kaithal News: कलायत का गांव दुब्बल बना ग्रामीण समृद्धि का मॉडल

Fri, 28 Nov 2025 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 28 Nov 2025 01:42 AM IST
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Kalayat's village Dubbal becomes a model of rural prosperity
निशीकांत शर्मा
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कलायत। उपमंडल का एक छोटा-सा गांव आज आर्थिक आत्मनिर्भरता की बड़ी मिसाल बन गया है। गांव दुब्बल न केवल अपनी कृषि क्रांति के लिए चर्चित हो रहा है, बल्कि आसपास के आधा दर्जन गांवों के करीब एक हजार लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करवा रहा है।

गांव की 175 एकड़ भूमि पर बने 160 नेट हाउसों में संरक्षित खेती की जा रही है, जिनमें खीरा और रंगीन शिमला मिर्च की बंपर पैदावार मिल रही है। गांव के किसान बलकार सिंह नैन, जो नेट हाउस एसोसिएशन के प्रधान भी हैं, बताते हैं कि कलायत उपमंडल में करीब 400 नेट हाउस हैं, जिनमें से अकेले दुब्बल गांव में 160 हैं।
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बलकार सिंह ने बताया कि पारंपरिक खेती में जहां मुश्किल से गुज़ारा हो पाता था, वहीं अब संरक्षित खेती ने खेती को लाभ का व्यवसाय बना दिया है। उन्होंने बताया कि पहले 18 एकड़ में खेती करके 5 लाख रुपये भी मुश्किल से बचते थे, अब 10 एकड़ में नेट हाउस लगाकर 80 से 90 लाख रुपये सालाना बचत हो रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे विदेश भागने की बजाय स्मार्ट खेती अपनाकर गांव में ही कमाई कर सकते हैं।
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1000 क्विंटल खीरा रोज पहुंच रहा मंडियों में ः बलकार सिंह ने बताया कि वर्तमान में नेट हाउसों में खीरा व रंगीन शिमला मिर्च की शानदार पैदावार हो रही है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ के नेट हाउस से 10 क्विंटल खीरा प्रतिदिन उतर रहा है। केवल गांव दुब्बल से ही रोजाना करीब 1000 क्विंटल खीरा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की मंडियों में भेजा जा रहा है।

व्यापारी खुद गांव में आकर फसल खरीदते हैं। किसानों को खीरे का भाव 25 रुपये प्रति किलो और रंगीन शिमला मिर्च का 150 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। उन्होंने बताया कि दो नेट हाउस से छह माह में 200 क्विंटल तक रंगीन शिमला मिर्च की पैदावार हो रही है। संवाद


यूं आया खेती का ख्याल

बलकार नैन बताते हैं कि वर्ष 2016 में करनाल जाते समय उन्होंने सड़क किनारे बने नेट हाउस देखे। उत्सुकता में उन्होंने एक किसान से बात की और संरक्षित खेती के फायदे जानकर प्रेरित हुए। इसके बाद उन्होंने एचटीआई करनाल से प्रशिक्षण लिया और दो एकड़ भूमि में नेट हाउस लगाकर खीरा, शिमला मिर्च, बैंगन व टमाटर की फसल उगाई। पहले ही साल की शानदार आमदनी ने उन्हें पूरी 18 एकड़ में नेट हाउस लगाने के लिए प्रेरित किया। आज उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों किसान इस तकनीक को अपनाकर स्वावलंबन की राह पर चल पड़े हैं।
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