Kaithal: निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, हंगामा
सिविल लाइन थाना में पहुंचे सब इंस्पेक्टर राजकुमार ने कहा कि उन्हें परिजनों की तरफ से अभी तक शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत मिलती है इस पर जांच शुरू की जाएगी। जांच के दौरान कोई लापरवाही मिलती है तो फिर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कैथल के करनाल रोड स्थित निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। महिला की मौत होने के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। इस दौरान गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा भी किया। मामले की जानकारी मिलते ही अस्पताल में सिविल लाइन थाना से पुलिस भी पहुंची। परिजनों का आरोप था कि डॉक्टरों ने सही ढंग से इलाज न कर लापरवाही बरती है, जिस कारण महिला की मौत हुई है। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला ठीक हो चुकी थी, उन्हें अचानक दौरा आया और उनकी मौत हो गई। जबकि प्लेटलेट्स बढ़ गई थी और बुखार भी ठीक हो गया था।
ऋषि नगर निवासी मृतक महिला के जेठ राजेंद्र कुमार ने बताया कि उसकी 28 वर्षीय भाभी मेनका को 18 नवंबर को बुखार की शिकायत थी। इसके बाद वह निजी अस्पताल में उनका इलाज करवाने के लिए पहुंचे थे। सही इलाज न होने के चलते तीसरे दिन ही उसकी भाभी की मौत हो गई। उसने बताया कि उसकी भाभी की प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत थी। दो दिन तक डॉक्टरों का कहना था कि उनकी सेहत में अब सुधार हो चुका है, लेकिन रविवार दोपहर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। दोपहर करीब एक बजे उनकी मौत हो गई।
सिविल लाइन थाना में पहुंचे सब इंस्पेक्टर राजकुमार ने कहा कि उन्हें परिजनों की तरफ से अभी तक शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत मिलती है इस पर जांच शुरू की जाएगी। जांच के दौरान कोई लापरवाही मिलती है तो फिर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
वहीं, अस्पताल संचालक डॉक्टर मुरलीधरन ने कहा कि ऋषि नगर निवासी मेनका को 18 नवंबर को उनके अस्पताल में दाखिल किया गया था, इससे पहले उनका इलाज एक बड़े निजी अस्पताल में चल रहा था। फिर भी उन्होंने महिला को इलाज के लिए दाखिल किया। दो दिन तक किए गए इलाज के दौरान महिला को सांस की दिक्कत आई थी। जबकि प्लेटलेट्स डेढ़ लाख से अधिक थी। उस समय उन्हें एचआरटीसी के लिए स्पॉट एंबुलेंस के जरिए भेजा गया था। जब उन्हें वापस अस्पताल में लाया गया तो उन्हें दौरा आया और फिर सांस लेने में परेशानी हुई। उन्हें सीपीआर दी गई, लेकिन उनकी मौत हुई। इलाज में किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई।