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हक के लिए सड़क पर उतरी बेटियां...
kaithal beauro
Updated Thu, 25 May 2017 12:05 AM IST
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- फोटो : kaithal beuaro
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राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एवं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नंबर 4 की छात्राएं बुधवार को अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आईं। दसवीं के परीक्षा परिणाम में पहले पास व बाद में फेल दिखाए जाने पर दो दिनों तक कोई सुनवाई ना होने पर सुबह धरना दिया। बाद में अध्यापकों द्वारा नाम काटने की धमकी दी तो छुट्टी के बाद शहर के पिहोवा चौक पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे तक जाम लगाकर बेटियों ने अपना हक मांगा। शिक्षा मंत्री व शिक्षा बोर्ड के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्कूल की इन बेटियों ने अपने साइकिल आड़े-तिरछे खड़ा करके चौक को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया। भरी दोपहर को लगे जाम के कारण लोगों को काफी दिक्कतें हुईं। लेकिन बेटियों की बात सुनकर काफी संख्या में लोग भी उनके साथ हो लिए।
स्कूल की डे्रस में जाम लगा रही बेटियों ने कहा कि उन्हें दो दिन पूर्व जारी किए गए परीक्षा परिणाम में पहले पास दिखा दिया गया। फिर फेल कर दिया गया। अध्यापकों से बात की तो कहा चैक करवाएंगे। बाद मेें कहा गया कि रि-चेकिंग के लिए 900 रुपये लगेंगे। वे गरीब माता-पिता की बेटियां हैं। कैसे वे इतने पैसे लाएंगे। पहले ही मुश्किल से पढ़ रही हैं। एक सब्जेक्ट में 80 तो दूसरे सब्जेक्ट में महज 2 अंक कैसे आ सकते हैं। उनकी एक साल की मेहनत पर पानी फिर गया।
एक बेटी ने रोते हुए कहा कि सर... हमारी कोई नहीं सुन रहा। घर वाले अब शादी करने की बात कह रहे हैं। कैसे सफल होगा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा।
इसी प्रकार से सोनिया का कहना था कि मेरे पापा को पेरालाइज हुआ है। मेरी मां दूसरों के घर झाड़ू पोछा करती हैं। छुट्टी के दिन मैं भी पोछा मारने जाती हूं। अब मैं फेल हो गई हूं तो आगे कौन बेटियों को पढ़ाएगा।
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इसी प्रकार से नवप्रीत का कहना था कि सर...मेरी मां हमें आटा चक्की चलाते हुए पढ़ा रही हैं। मैं फेल हो गई तो...आगे कौन पढ़ाएगा। इस तरह से बेटियों की आंखों से आंसू निकल आए। कई बेटियों ने रोते हुए कहा कि उनका परिणाम खराब आया है। वे फेल नहीं हो सकतीं।
इस तरह चौक के कभी एक ओर तो कभी दूसरी ओर बेटियां जाम लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद करती रहीं।
सूचना मिलते ही एसएचओ अशोक कुमार मौके पर पहुंचे। उनकी सूचना पर डीईओ निर्मल तनेजा व डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं को आश्वासन दिया कि जिस भी छात्रा को अपने परिणाम पर शंका है। वह शिकायत दे दे। वह स्वयं सुबह स्कूल में पहुंच कर शिकायत प्राप्त करेंगे और बिना किसी फीस के उनकी रि-चैकिंग करवाई जाएगी। इस आश्ववासन के बाद बेटियां अपने साइकिल उठाकर घरों की ओर निकल गईं।
सर लिखित में दो..:-जाम लगा रही बेटियों को अधिकारियों पर जैसे यकीन ही नहीं था। पूरी तरह से आश्वासन देने के बावजूद जाम लगा रही बेटियों ने कहा कि उन्हें लिखित में दो कि उनकी समस्या का समाधान होगा। मुश्किल से किसी तरह समझा-बुझाकर वे सड़क से हटने पर राजी हुईं।
एक स्कूल में 249 में से महज 70 तो दूसरे में 36 में से महज 6 पास:-राजकीय सीनियर सैकेंडरी में 249 में से महज 70 बेटियां तो राजकीय उच्च विद्यालय में 36 में से महज 6 बेटियों को पास दिखाया गया है।
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स्कूल की डे्रस में जाम लगा रही बेटियों ने कहा कि उन्हें दो दिन पूर्व जारी किए गए परीक्षा परिणाम में पहले पास दिखा दिया गया। फिर फेल कर दिया गया। अध्यापकों से बात की तो कहा चैक करवाएंगे। बाद मेें कहा गया कि रि-चेकिंग के लिए 900 रुपये लगेंगे। वे गरीब माता-पिता की बेटियां हैं। कैसे वे इतने पैसे लाएंगे। पहले ही मुश्किल से पढ़ रही हैं। एक सब्जेक्ट में 80 तो दूसरे सब्जेक्ट में महज 2 अंक कैसे आ सकते हैं। उनकी एक साल की मेहनत पर पानी फिर गया।
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एक बेटी ने रोते हुए कहा कि सर... हमारी कोई नहीं सुन रहा। घर वाले अब शादी करने की बात कह रहे हैं। कैसे सफल होगा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा।
इसी प्रकार से सोनिया का कहना था कि मेरे पापा को पेरालाइज हुआ है। मेरी मां दूसरों के घर झाड़ू पोछा करती हैं। छुट्टी के दिन मैं भी पोछा मारने जाती हूं। अब मैं फेल हो गई हूं तो आगे कौन बेटियों को पढ़ाएगा।
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इसी प्रकार से नवप्रीत का कहना था कि सर...मेरी मां हमें आटा चक्की चलाते हुए पढ़ा रही हैं। मैं फेल हो गई तो...आगे कौन पढ़ाएगा। इस तरह से बेटियों की आंखों से आंसू निकल आए। कई बेटियों ने रोते हुए कहा कि उनका परिणाम खराब आया है। वे फेल नहीं हो सकतीं।
इस तरह चौक के कभी एक ओर तो कभी दूसरी ओर बेटियां जाम लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद करती रहीं।
सूचना मिलते ही एसएचओ अशोक कुमार मौके पर पहुंचे। उनकी सूचना पर डीईओ निर्मल तनेजा व डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं को आश्वासन दिया कि जिस भी छात्रा को अपने परिणाम पर शंका है। वह शिकायत दे दे। वह स्वयं सुबह स्कूल में पहुंच कर शिकायत प्राप्त करेंगे और बिना किसी फीस के उनकी रि-चैकिंग करवाई जाएगी। इस आश्ववासन के बाद बेटियां अपने साइकिल उठाकर घरों की ओर निकल गईं।
सर लिखित में दो..:-जाम लगा रही बेटियों को अधिकारियों पर जैसे यकीन ही नहीं था। पूरी तरह से आश्वासन देने के बावजूद जाम लगा रही बेटियों ने कहा कि उन्हें लिखित में दो कि उनकी समस्या का समाधान होगा। मुश्किल से किसी तरह समझा-बुझाकर वे सड़क से हटने पर राजी हुईं।
एक स्कूल में 249 में से महज 70 तो दूसरे में 36 में से महज 6 पास:-राजकीय सीनियर सैकेंडरी में 249 में से महज 70 बेटियां तो राजकीय उच्च विद्यालय में 36 में से महज 6 बेटियों को पास दिखाया गया है।