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Kaithal News: जेल कर्मियों को पुलिस के समान मिले वेतन ः चरण
Fri, 12 Sep 2025 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 12 Sep 2025 01:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा जेल वार्डर्स क्लास-सी वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य प्रधान चरण सिंह ने कहा कि प्रदेश में पहले जेल कर्मचारियों के वेतन व भत्ते पुलिस के बराबर होते थे, लेकिन सातवें वेतन आयोग के बाद असमानता पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस का ग्रेड पे 20 हजार कर दिया गया, जिससे उनकी बेसिक पे 21,700 रुपये हो गई, जबकि जेल कर्मचारियों को मात्र 1900 ग्रेड पे पर रख दिया गया।
क्लर्कों ने आंदोलन करके अपना ग्रेड पे पुलिस के बराबर करवा लिया, लेकिन जेल कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते। परिणामस्वरूप ग्रुप-सी में सबसे कम ग्रेड पे जेल कर्मचारियों का रह गया है।
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चरण सिंह ने कहा कि यह जेल कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है। हमारी वर्दी भत्ता, राशन भत्ता और वाहन भत्ता पहले पुलिस के बराबर था, लेकिन बाद में केवल पुलिस का भत्ता बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि हमारी ड्यूटी भी 24 घंटे की होती है और हमें खतरनाक बंदियों के बीच काम करना पड़ता है। कई बार हमें धमकियां भी मिलती हैं। इसके बावजूद वेतन और भत्तों में समानता नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि जेल वेलफेयर क्लास-थ्री एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से कई बार मिल चुकी है, लेकिन अब तक वार्डर से लेकर सहायक अधीक्षक तक किसी का भत्ता नहीं बढ़ाया गया। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो जेल कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
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कैथल। हरियाणा जेल वार्डर्स क्लास-सी वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य प्रधान चरण सिंह ने कहा कि प्रदेश में पहले जेल कर्मचारियों के वेतन व भत्ते पुलिस के बराबर होते थे, लेकिन सातवें वेतन आयोग के बाद असमानता पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस का ग्रेड पे 20 हजार कर दिया गया, जिससे उनकी बेसिक पे 21,700 रुपये हो गई, जबकि जेल कर्मचारियों को मात्र 1900 ग्रेड पे पर रख दिया गया।
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क्लर्कों ने आंदोलन करके अपना ग्रेड पे पुलिस के बराबर करवा लिया, लेकिन जेल कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते। परिणामस्वरूप ग्रुप-सी में सबसे कम ग्रेड पे जेल कर्मचारियों का रह गया है।
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चरण सिंह ने कहा कि यह जेल कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है। हमारी वर्दी भत्ता, राशन भत्ता और वाहन भत्ता पहले पुलिस के बराबर था, लेकिन बाद में केवल पुलिस का भत्ता बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि हमारी ड्यूटी भी 24 घंटे की होती है और हमें खतरनाक बंदियों के बीच काम करना पड़ता है। कई बार हमें धमकियां भी मिलती हैं। इसके बावजूद वेतन और भत्तों में समानता नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि जेल वेलफेयर क्लास-थ्री एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से कई बार मिल चुकी है, लेकिन अब तक वार्डर से लेकर सहायक अधीक्षक तक किसी का भत्ता नहीं बढ़ाया गया। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो जेल कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।