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Kaithal News: विद्यार्थियों को सुनाईं भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियां
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राजकीय आदर्श स्कूल में समर कैंप के दौरान मौजूद विद्यार्थी व शिक्षक। संवाद
- फोटो : 1
कैथल। राजकीय आदर्श संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में समर कैंप के दौरान भारतीय संस्कृति व श्रवण कौशल पर विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय संस्कृति, श्रवण कौशल, लघु कथा, कठपुतली कला व लघु फिल्मों से संबंधित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आनंदपूर्वक सीखने का अनुभव प्राप्त किया। समर कैंप के दौरान कोऑर्डिनेटर सुनील दत्त आत्रेय ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियां सुनाईं। उन्होंने बताया कि दादा-दादी व नाना-नानी की ओर से सुनाई जाने वाली कहानियां केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं बल्कि वे जीवन मूल्यों, संस्कारों और नैतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत भी होती हैं।
इस अवसर पर उन्होंने राजा विक्रमादित्य और राजा भोज की प्रेरणादायक कथाएं सुनाकर विद्यार्थियों को सत्य, न्याय, परोपकार और बुद्धिमत्ता का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि नियमित रूप से कहानियां सुनने से बच्चों में श्रवण कौशल विकसित होता है। इससे उनकी समझने, ध्यान केंद्रित करने और अभिव्यक्ति की क्षमता में वृद्धि होती है। भारतीय संस्कृति से संबंधित लघु कथाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया।
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इस अवसर पर कपिल सिंहमार ने विद्यार्थियों को कठपुतली कला के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कठपुतली भारतीय लोक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देने का भी माध्यम रही है। विद्यार्थियों ने कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत संवादों एवं कला का उत्साहपूर्वक आनंद लिया। वहीं बृजेश कुमार टाया ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित लघु फिल्में दिखाई। इन फिल्मों के माध्यम से बच्चों को संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया गया।
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कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आनंदपूर्वक सीखने का अनुभव प्राप्त किया। समर कैंप के दौरान कोऑर्डिनेटर सुनील दत्त आत्रेय ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियां सुनाईं। उन्होंने बताया कि दादा-दादी व नाना-नानी की ओर से सुनाई जाने वाली कहानियां केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं बल्कि वे जीवन मूल्यों, संस्कारों और नैतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत भी होती हैं।
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इस अवसर पर उन्होंने राजा विक्रमादित्य और राजा भोज की प्रेरणादायक कथाएं सुनाकर विद्यार्थियों को सत्य, न्याय, परोपकार और बुद्धिमत्ता का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि नियमित रूप से कहानियां सुनने से बच्चों में श्रवण कौशल विकसित होता है। इससे उनकी समझने, ध्यान केंद्रित करने और अभिव्यक्ति की क्षमता में वृद्धि होती है। भारतीय संस्कृति से संबंधित लघु कथाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया।
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इस अवसर पर कपिल सिंहमार ने विद्यार्थियों को कठपुतली कला के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कठपुतली भारतीय लोक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश देने का भी माध्यम रही है। विद्यार्थियों ने कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत संवादों एवं कला का उत्साहपूर्वक आनंद लिया। वहीं बृजेश कुमार टाया ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित लघु फिल्में दिखाई। इन फिल्मों के माध्यम से बच्चों को संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया गया।

राजकीय आदर्श स्कूल में समर कैंप के दौरान मौजूद विद्यार्थी व शिक्षक। संवाद- फोटो : 1