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Kaithal News: पानी रोकने पर इनेलो का प्रदर्शन, फोड़े मटके
Tue, 06 May 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 06 May 2025 01:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा का पानी रोकने से नाराज इनेलो ने सोमवार को प्रदर्शन किया। इसके तहत पार्टी की महिलाओं ने पिहोवा चौक पर मटके फोड़कर अपना रोष जताया। प्रदर्शन के कार्यक्रम के तहत कार्यकर्ता पहले जवाहर पार्क में एकत्रित हुए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय में पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सीटीएम गुरविंद्र सिंह को सौंपा।
प्रदर्शन की अगुवाई इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने की। उनके साथ जिला अध्यक्ष अनिल तंवर के अलावा भारी संख्या में महिलाएं एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। इससे पहले जवाहर पार्क में जनसभा की गई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हरियाणा का पानी रोकने के विरोध में पंजाब के सीएम भगवंत मान की प्रतीक के तौर पर शवयात्रा भी निकाली। महिलाओं ने सीएम भगवंत मान के नाम के मटके भी फोड़े।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्य संसदीय सचिव एवं प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की पंजाब से जड़े उखड़ती हुई दिख गई हैं।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोगों ने आम आदमी पार्टी का सफाया कर दिया है। अब पंजाब से भी इस पार्टी को अपना सूपड़ा साफ होता दिख रहा है तो लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने की फिराक में आम आदमी पार्टी सरकार ने अब संघीय ढांचे को नकार कर अराजकता फैलाने का काम किया है। माजरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के फैसले हों, बीबीएमबी के फैसले हों, जल समझौते हों या सुप्रीम कोर्ट के आदेश हों, पंजाब सरकार ने सभी को नकार कर संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि 29 जनवरी 1955 को सबसे पहला पानी बंटवारे का समझौता हुआ। इसके बाद श्रीराम कमेटी की सिफारिशों पर समझौता हुआ। 1971 में तत्कालीन योजना मंत्री दुर्गा प्रसाद धर की अध्यक्षता में कमेटी बनी और उसकी सिफारिशें पर समझौता हुआ। इसके बाद भारत सरकार ने 1976 में पानी बांटा। इसके बाद वधवा कमेटी की सिफारिश पर समझौता हुआ। इसके बाद 31 दिसंबर 1981 को भारत सरकार ने समझौता करवाया। इसके बाद 30 जनवरी 1987 को न्यायमूर्ति बीबी इराडी ने फैसला दिया।
इसके बाद 2002, 2004, 2016 में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले आए। इन सभी समझौतों व फैसलों में हरियाणा को उसका पानी देने की बात कही गई लेकिन पंजाब ने इन किसी भी फैसलों व समझौतों को लागू नहीं किया। पिछले माह बीबीएमबी की तकनीकी कमेटी ने फैसला दिया कि हरियाणा सरकार द्वारा पानी छोड़ा जाना है, वह भी पंजाब ने नहीं माना। इसके बाद 30 अप्रैल को बीबीएमबी ने फैसला दिया, वह भी नहीं माना। दो अप्रैल को हुई बैठक में पंजाब के अधिकारी आए ही नहीं। माजरा ने कह कि हरियाणा का पानी का मामला राजनीति की भेंट चढ़ गया है।
पंजाब के नेताओं को पानी के मुद्दे में राजनीतिक सफलता नजर आती है लेकिन लोग अब जागरूक हो गए हैं।
माजरा ने दावा कर कहा कि आने वाले समय में पंजाब से आम आदमी पार्टी का सूपड़ा साफ होगा। माजरा ने कहा कि इनेलो पार्टी हरियाणा के किसानों के लिए किसी भी स्तर तक लड़ाई लड़ेगी। पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल ने भी जल युद्ध किया था। इसके बाद चौधरी अभय सिंह चौटाला ने भी एसवाईएल के पानी के लिए लगातार संघर्ष किया है। इनेलो पार्टी केंद्र सरकार से मांग करती है कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।
ये लोग रहे मौजूद
इनेलो जिलाध्यक्ष अनिल तंवर, शशी वालिया, रामप्रकाश गोगी, राजा राम माजरा, जसमेर तितरम, पप्पू, मोनी बालू, इंद्र पाई, सुरजीत पबनावा, महाबीर पट्टी अफगान, हलकाध्यक्ष रोहित कुंडू कैलरम, किसान सैल के जिलाध्यक्ष सलिंद्र राणा, ओबीसी अध्यक्ष सोनू वर्मा, जिलाध्यक्ष महिला सैल पूनम सुल्तानी, पवन ढुल, भूपेंद्र जैलदार, राजेश प्यौदा, काला प्यौदा, शहरी अध्यक्ष सतीश गर्ग, प्रदीप सिंह आदि।
टैंकों में बचा है केवल पांच दिन का पानी
कैथल। जनस्वास्थ्य विभाग के पास 11 मई तक सप्लाई करने के लिए स्टोरेज टैंकों में पानी बचा है। ऐसे में अगर नहर में पानी नहीं आया तो शहर में पेयजल की किल्लत बढ़ सकती है। इस समय जिले की सिरसा ब्रांच में 1300 की बजाय 400 क्यूसेक पानी आ रहा है।
शहर की 70 फीसदी आबादी नहरी पानी पर निर्भर है। जनस्वास्थ्य विभाग के पेयजल स्टोरेज टैंकों की क्षमता 10 हजार 817 लाख लीटर है। इसमें रोजाना शहर को 303 लाख लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। समय पर नहर में पानी नहीं आया तो दिक्कत होना तय है। संवाद
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कैथल। पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा का पानी रोकने से नाराज इनेलो ने सोमवार को प्रदर्शन किया। इसके तहत पार्टी की महिलाओं ने पिहोवा चौक पर मटके फोड़कर अपना रोष जताया। प्रदर्शन के कार्यक्रम के तहत कार्यकर्ता पहले जवाहर पार्क में एकत्रित हुए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय में पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सीटीएम गुरविंद्र सिंह को सौंपा।
प्रदर्शन की अगुवाई इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने की। उनके साथ जिला अध्यक्ष अनिल तंवर के अलावा भारी संख्या में महिलाएं एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। इससे पहले जवाहर पार्क में जनसभा की गई। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हरियाणा का पानी रोकने के विरोध में पंजाब के सीएम भगवंत मान की प्रतीक के तौर पर शवयात्रा भी निकाली। महिलाओं ने सीएम भगवंत मान के नाम के मटके भी फोड़े।
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कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्य संसदीय सचिव एवं प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की पंजाब से जड़े उखड़ती हुई दिख गई हैं।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोगों ने आम आदमी पार्टी का सफाया कर दिया है। अब पंजाब से भी इस पार्टी को अपना सूपड़ा साफ होता दिख रहा है तो लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने की फिराक में आम आदमी पार्टी सरकार ने अब संघीय ढांचे को नकार कर अराजकता फैलाने का काम किया है। माजरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के फैसले हों, बीबीएमबी के फैसले हों, जल समझौते हों या सुप्रीम कोर्ट के आदेश हों, पंजाब सरकार ने सभी को नकार कर संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि 29 जनवरी 1955 को सबसे पहला पानी बंटवारे का समझौता हुआ। इसके बाद श्रीराम कमेटी की सिफारिशों पर समझौता हुआ। 1971 में तत्कालीन योजना मंत्री दुर्गा प्रसाद धर की अध्यक्षता में कमेटी बनी और उसकी सिफारिशें पर समझौता हुआ। इसके बाद भारत सरकार ने 1976 में पानी बांटा। इसके बाद वधवा कमेटी की सिफारिश पर समझौता हुआ। इसके बाद 31 दिसंबर 1981 को भारत सरकार ने समझौता करवाया। इसके बाद 30 जनवरी 1987 को न्यायमूर्ति बीबी इराडी ने फैसला दिया।
इसके बाद 2002, 2004, 2016 में भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले आए। इन सभी समझौतों व फैसलों में हरियाणा को उसका पानी देने की बात कही गई लेकिन पंजाब ने इन किसी भी फैसलों व समझौतों को लागू नहीं किया। पिछले माह बीबीएमबी की तकनीकी कमेटी ने फैसला दिया कि हरियाणा सरकार द्वारा पानी छोड़ा जाना है, वह भी पंजाब ने नहीं माना। इसके बाद 30 अप्रैल को बीबीएमबी ने फैसला दिया, वह भी नहीं माना। दो अप्रैल को हुई बैठक में पंजाब के अधिकारी आए ही नहीं। माजरा ने कह कि हरियाणा का पानी का मामला राजनीति की भेंट चढ़ गया है।
पंजाब के नेताओं को पानी के मुद्दे में राजनीतिक सफलता नजर आती है लेकिन लोग अब जागरूक हो गए हैं।
माजरा ने दावा कर कहा कि आने वाले समय में पंजाब से आम आदमी पार्टी का सूपड़ा साफ होगा। माजरा ने कहा कि इनेलो पार्टी हरियाणा के किसानों के लिए किसी भी स्तर तक लड़ाई लड़ेगी। पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल ने भी जल युद्ध किया था। इसके बाद चौधरी अभय सिंह चौटाला ने भी एसवाईएल के पानी के लिए लगातार संघर्ष किया है। इनेलो पार्टी केंद्र सरकार से मांग करती है कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।
ये लोग रहे मौजूद
इनेलो जिलाध्यक्ष अनिल तंवर, शशी वालिया, रामप्रकाश गोगी, राजा राम माजरा, जसमेर तितरम, पप्पू, मोनी बालू, इंद्र पाई, सुरजीत पबनावा, महाबीर पट्टी अफगान, हलकाध्यक्ष रोहित कुंडू कैलरम, किसान सैल के जिलाध्यक्ष सलिंद्र राणा, ओबीसी अध्यक्ष सोनू वर्मा, जिलाध्यक्ष महिला सैल पूनम सुल्तानी, पवन ढुल, भूपेंद्र जैलदार, राजेश प्यौदा, काला प्यौदा, शहरी अध्यक्ष सतीश गर्ग, प्रदीप सिंह आदि।
टैंकों में बचा है केवल पांच दिन का पानी
कैथल। जनस्वास्थ्य विभाग के पास 11 मई तक सप्लाई करने के लिए स्टोरेज टैंकों में पानी बचा है। ऐसे में अगर नहर में पानी नहीं आया तो शहर में पेयजल की किल्लत बढ़ सकती है। इस समय जिले की सिरसा ब्रांच में 1300 की बजाय 400 क्यूसेक पानी आ रहा है।
शहर की 70 फीसदी आबादी नहरी पानी पर निर्भर है। जनस्वास्थ्य विभाग के पेयजल स्टोरेज टैंकों की क्षमता 10 हजार 817 लाख लीटर है। इसमें रोजाना शहर को 303 लाख लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। समय पर नहर में पानी नहीं आया तो दिक्कत होना तय है। संवाद