{"_id":"5f20555d8ebc3e9fa15b08ae","slug":"information-kaithal-news-knl38904834","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच साल में स्वच्छ भारत मिशन में पहुंचा 28 करोड़ 44 लाख 94 हजार रुपये का फंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच साल में स्वच्छ भारत मिशन में पहुंचा 28 करोड़ 44 लाख 94 हजार रुपये का फंड
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। एडीसी कार्यालय में तैनात स्वच्छ भारत मिशन कर्मचारियों का हैरानी भरा जवाब है कि पिछले पांच साल में केंद्र और राज्य सरकार से आई 28 करोड़ रुपये की राशि किस बैंक में जमा है, गोपनीय श्रेणी में आता है। इसकी आरटीआई के तहत जानकारी नहीं दी जा सकती। आरोप है कि कई और सवालों के सीधे जवाब नहीं दिए गए हैं। आरटीआई में बताया गया है कि स्वच्छ भारत मिशन में वर्ष 2015 से मार्च 2020 तक 28 करोड़ 44 लाख 94 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई है। तहत इस मिशन के तहत वर्ष 2015 से मार्च 2020 तक दो कर्मचारियों को डीसी के अनुमोदनार्थ पर रखा गया था। इसके अलावा एक अकाउंटेट, एक कंप्यूटर ऑपरेटर व छह ब्लॉक कोआर्डिनेटर की सूची दी गई। बाकी कर्मी किस आधार पर और कैसे रखे गए? इस बात की जानकारी नहीं दी गई।
मिशन के मानदंडों की जानकारी वेबसाइट पर देखी जा सकती है। कार्यों की सूची और बिलों की जानकारी कार्यालय से देख सकते हैं। कितनी राशि उपलब्ध है और इसे किन बैंकों में जमा किए हुए हैं। जिसे अधिकारियों ने कार्यालय का गोपनीय रिकॉर्ड बताते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता जगरुप ढुल ने कहा कि दी गई सूचना को देखकर लगता है कि काफी कुछ छुपाया जा हा रहा है। वे इस संबंध में अपील दायर करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया का कहना है कि सीक्रेट एक्ट को लेकर आरटीआई मेें स्पष्ट उल्लेख है। लेकिन किसी योजना के तहत जमा राशि गोपनीय नहीं हो सकती। विभाग इस तरह से जवाब नहीं दे सकता।
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मिशन के मानदंडों की जानकारी वेबसाइट पर देखी जा सकती है। कार्यों की सूची और बिलों की जानकारी कार्यालय से देख सकते हैं। कितनी राशि उपलब्ध है और इसे किन बैंकों में जमा किए हुए हैं। जिसे अधिकारियों ने कार्यालय का गोपनीय रिकॉर्ड बताते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता जगरुप ढुल ने कहा कि दी गई सूचना को देखकर लगता है कि काफी कुछ छुपाया जा हा रहा है। वे इस संबंध में अपील दायर करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया का कहना है कि सीक्रेट एक्ट को लेकर आरटीआई मेें स्पष्ट उल्लेख है। लेकिन किसी योजना के तहत जमा राशि गोपनीय नहीं हो सकती। विभाग इस तरह से जवाब नहीं दे सकता।
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