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गुरबाणी की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करें : ज्ञानी मान सिंह
Thu, 18 Dec 2025 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:21 AM IST
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धार्मिक समागम में शामिल श्रद्धालु शांति और श्रद्धा के साथ शबद कीर्तन का श्रवण करती हुईं।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। श्री दरबार साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी सिंघ साहिब ज्ञानी मान सिंह ने गुरबाणी की महिमा अपरम्पार बताते हुए कहा कि व्यक्ति को नितनेम कर गुरबाणी की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी द्वारा दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराजा, माता गुजर कौर और चार साहिबजादों की शहादत को समर्पित गुरमत समागम में ज्ञानी मान सिंह संगत का मार्गदर्शन कर रहे थे।
गुरुद्वारा श्री नीम साहिब में आयोजित इस समागम में हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा, संयुकत सचिव बलविंदर सिंह भिंडर, बलदेव सिंह हाबड़ी, मेजर सिंह, गुरमेज सिंह, पूर्व मेंबर अंग्रेज सिंह, धर्म प्रचार के एडिशनल सेक्रेटरी परमजीत सिंह शेरगढ़, धर्म प्रचार प्रभारी प्रगट सिंह तथा गुरुद्वारा मैनेजर हरकीरतन सिंह सहित भारी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी।
ज्ञानी मान सिंह ने सरबंसदानी धन-धन साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज, माता गुजर कौर और साहिबजादों के शहीदी इतिहास का वर्णन करते हुए बताया कि श्री आनंदपुर साहिब का किला छोड़ने के पश्चात दुश्मनों के हमले से बचने के लिए कुशल युद्ध योजना कैसे बनाई गई। इसके साथ ही बड़े साहिबजादों के युद्ध कौशल और उनकी वीरता के प्रसंगों को भी उन्होंने संगत के सामने रखा।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता गुजर कौर ने गुरु साहिब के साहिबजादों को शिक्षा और संस्कार दिए, उसी तरह हमें भी अपने बच्चों को धर्म, पंथ और कौम के प्रति समर्पित बनाने के लिए संस्कार और शिक्षा देनी चाहिए। धर्म प्रचारक ज्ञानी बचित्तर सिंह और ज्ञानी साहिब सिंह ने भी शहीदी इतिहास के प्रसंग सुनाए। समागम में ज्ञानी गुरप्रीत सिंह हजूरी रागी जत्थे ने शबद कीर्तन कर संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। इसके उपरांत पंथ प्रसिद्ध ढाडी जत्था, भाई गुरप्रीत सिंह लांडरा ने भी दशमेश पिता की महिमा का मार्मिक गुणगान प्रस्तुत किया।
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कैथल। श्री दरबार साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी सिंघ साहिब ज्ञानी मान सिंह ने गुरबाणी की महिमा अपरम्पार बताते हुए कहा कि व्यक्ति को नितनेम कर गुरबाणी की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी द्वारा दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराजा, माता गुजर कौर और चार साहिबजादों की शहादत को समर्पित गुरमत समागम में ज्ञानी मान सिंह संगत का मार्गदर्शन कर रहे थे।
गुरुद्वारा श्री नीम साहिब में आयोजित इस समागम में हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा, संयुकत सचिव बलविंदर सिंह भिंडर, बलदेव सिंह हाबड़ी, मेजर सिंह, गुरमेज सिंह, पूर्व मेंबर अंग्रेज सिंह, धर्म प्रचार के एडिशनल सेक्रेटरी परमजीत सिंह शेरगढ़, धर्म प्रचार प्रभारी प्रगट सिंह तथा गुरुद्वारा मैनेजर हरकीरतन सिंह सहित भारी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी।
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ज्ञानी मान सिंह ने सरबंसदानी धन-धन साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज, माता गुजर कौर और साहिबजादों के शहीदी इतिहास का वर्णन करते हुए बताया कि श्री आनंदपुर साहिब का किला छोड़ने के पश्चात दुश्मनों के हमले से बचने के लिए कुशल युद्ध योजना कैसे बनाई गई। इसके साथ ही बड़े साहिबजादों के युद्ध कौशल और उनकी वीरता के प्रसंगों को भी उन्होंने संगत के सामने रखा।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता गुजर कौर ने गुरु साहिब के साहिबजादों को शिक्षा और संस्कार दिए, उसी तरह हमें भी अपने बच्चों को धर्म, पंथ और कौम के प्रति समर्पित बनाने के लिए संस्कार और शिक्षा देनी चाहिए। धर्म प्रचारक ज्ञानी बचित्तर सिंह और ज्ञानी साहिब सिंह ने भी शहीदी इतिहास के प्रसंग सुनाए। समागम में ज्ञानी गुरप्रीत सिंह हजूरी रागी जत्थे ने शबद कीर्तन कर संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। इसके उपरांत पंथ प्रसिद्ध ढाडी जत्था, भाई गुरप्रीत सिंह लांडरा ने भी दशमेश पिता की महिमा का मार्मिक गुणगान प्रस्तुत किया।

धार्मिक समागम में शामिल श्रद्धालु शांति और श्रद्धा के साथ शबद कीर्तन का श्रवण करती हुईं।