{"_id":"6265a53c99739a04d84b2e8f","slug":"if-you-do-jyoti-seva-for-40-days-your-wish-is-fulfilled-kaithal-news-knl1060022111","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां चालीस दिन तक ज्योति सेवा करने पर होती है मनोकामना पूर्ण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां चालीस दिन तक ज्योति सेवा करने पर होती है मनोकामना पूर्ण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। आज जहां पर गुरुद्वारा श्री मंजि साहिब है, वहां हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी ने रात्रि विश्राम किया था। कैथल शहर में आज जहां गुरुद्वारा नीमसाहिब है उस जगह पर उपदेश दे रहे थे। उनके सेवादारों ने नगर के अंदर पधारने का आग्रह किया। श्री गुरु तेग बहादुर जी शहर के अंदर आए और उस जगह पर बैठकर लोगों के दुख दूर किए, जहां आज गुरुद्वारा मंजि साहिब बना हुआ है।
मंदिर के हेड ग्रंथी साहब सिंह ने बताया कि नौंवी पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर जी दिल्ली सल्तनत को कड़ा जवाब देने के लिए दिल्ली जाते समय कैथल आए थे। उन्होंने पहले उस समय के शहर से बाहर नीम के पेड़ के नीचे बैठकर उपदेश दिया। इसके बाद उनके श्रद्धालु तरखान सिख और बनिया सिख ने उन्हें शहर के अंदर पधारने का आग्रह किया। इसके बाद गुरु जी यहां पहुंचे, जहां आज गुरुद्वारा मंजि साहिब परिसर है। यहां उन्होंने पूरी रात विश्राम किया। तरखान सिख ने गुरु जी से विनती की कि उन्हें आशीर्वाद दें कि उन्हें औलाद हो जाए। उनके पास औलाद नहीं थी। इस पर गुरुदेव ने उन्हें वरदान दिया कि इस जगह पर पूजा करते रहना, तुम्हारा वंश कई पीढ़ियों तक जाना जाएगा। उसने वहां पूजा की तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हुई। हेड ग्रंथी ने बताया कि आज भी यहां 40 दिन तक लगातार ज्योति की सेवा करने पर विशेष मनोकामना भी पूर्ण हो जाती है।
इसी गुरुद्वारे में लिखा गया समूची सिखी का इतिहास
गुरुद्वारे के हेड ग्रंथी बताते हैं कि महान कवि भाई संतोख सिंह ने इसी गुरुद्वारे में बैठकर सूरजप्रकाश नामक ग्रंथ लिखा। इसमें संपूर्ण सिखी का इतिहास संकलित है। यही सबसे पहली पुस्तक थी जिसमें सिखों का पूरा इतिहास शामिल किया गया था। इस कारण भी यह गुरुद्वारा पूरे सिख समाज में विशेष श्रद्धा का केंद्र है। इस गुरुद्वारे का भव्य भवन अभी निर्माणाधीन है। एसजीपीसी की मदद से गुरु तेग बहादुर सेवा दल इसका निर्माण करा रहा है। इसमें तीन मंजिला भवन को अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर के हेड ग्रंथी साहब सिंह ने बताया कि नौंवी पातशाही श्री गुरु तेग बहादुर जी दिल्ली सल्तनत को कड़ा जवाब देने के लिए दिल्ली जाते समय कैथल आए थे। उन्होंने पहले उस समय के शहर से बाहर नीम के पेड़ के नीचे बैठकर उपदेश दिया। इसके बाद उनके श्रद्धालु तरखान सिख और बनिया सिख ने उन्हें शहर के अंदर पधारने का आग्रह किया। इसके बाद गुरु जी यहां पहुंचे, जहां आज गुरुद्वारा मंजि साहिब परिसर है। यहां उन्होंने पूरी रात विश्राम किया। तरखान सिख ने गुरु जी से विनती की कि उन्हें आशीर्वाद दें कि उन्हें औलाद हो जाए। उनके पास औलाद नहीं थी। इस पर गुरुदेव ने उन्हें वरदान दिया कि इस जगह पर पूजा करते रहना, तुम्हारा वंश कई पीढ़ियों तक जाना जाएगा। उसने वहां पूजा की तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हुई। हेड ग्रंथी ने बताया कि आज भी यहां 40 दिन तक लगातार ज्योति की सेवा करने पर विशेष मनोकामना भी पूर्ण हो जाती है।
विज्ञापन
इसी गुरुद्वारे में लिखा गया समूची सिखी का इतिहास
गुरुद्वारे के हेड ग्रंथी बताते हैं कि महान कवि भाई संतोख सिंह ने इसी गुरुद्वारे में बैठकर सूरजप्रकाश नामक ग्रंथ लिखा। इसमें संपूर्ण सिखी का इतिहास संकलित है। यही सबसे पहली पुस्तक थी जिसमें सिखों का पूरा इतिहास शामिल किया गया था। इस कारण भी यह गुरुद्वारा पूरे सिख समाज में विशेष श्रद्धा का केंद्र है। इस गुरुद्वारे का भव्य भवन अभी निर्माणाधीन है। एसजीपीसी की मदद से गुरु तेग बहादुर सेवा दल इसका निर्माण करा रहा है। इसमें तीन मंजिला भवन को अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर बनाया जा रहा है।
विज्ञापन