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फसल का मुआवजा न मिला तो करेंगे प्रदर्शन : जसबीर
Wed, 12 Nov 2025 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। खराब फसल के मुआवजे की मांग के संदर्भ में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त प्रीति से मुलाकात की। डीसी ने किसानों को आश्वस्त किया कि मुआवजे की पूरी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है और अब दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा।
किसानों ने मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम ज्ञापन भी सौंपा और कई स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान जसबीर सिंह, कवरजीत सिंह, बलबीर सिंह, नरेश कुमार रेहड़ा, महेंद्र सिंह रामगढ़, सतपाल, आनंद, नाथ सिंह माण्डी और सुरेंद्र सिंह पोलड़ मौजूद रहे।
पराली प्रबंधन का जिम्मा सरकार ले या किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल अथवा 7,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। जिला प्रधान जसबीर सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कृषि मंडियों के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर योजना के नाम पर सरकार निजी बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। जसबीर ने चेतावनी दी कि यदि फसल खराबे का मुआवजा शीघ्र जारी नहीं हुआ तो किसान बड़ा प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। किसानों ने मांग की कि खाद के साथ जबरन अन्य सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाए।
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किसानों की मुख्य मांगे
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अत्यधिक बारिश व बाढ़ से बर्बाद हुई खरीफ फसलों का मुआवजा दिया जाए।
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2023 की बाढ़ से टूटी सड़कों का पुनर्निर्माण पुराने आधार पर किया जाए।
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जलभराव प्रभावित गांवों में स्थायी समाधान निकाला जाए।
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बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाए।
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बाहर से आने वाले धान की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
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खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
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पराली जलाने के मामलों में दर्ज मुकदमे रद्द किए जाएं।
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कैथल। खराब फसल के मुआवजे की मांग के संदर्भ में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त प्रीति से मुलाकात की। डीसी ने किसानों को आश्वस्त किया कि मुआवजे की पूरी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है और अब दोबारा रिमाइंडर भेजा जाएगा।
किसानों ने मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम ज्ञापन भी सौंपा और कई स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान जसबीर सिंह, कवरजीत सिंह, बलबीर सिंह, नरेश कुमार रेहड़ा, महेंद्र सिंह रामगढ़, सतपाल, आनंद, नाथ सिंह माण्डी और सुरेंद्र सिंह पोलड़ मौजूद रहे।
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पराली प्रबंधन का जिम्मा सरकार ले या किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल अथवा 7,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। जिला प्रधान जसबीर सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कृषि मंडियों के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर योजना के नाम पर सरकार निजी बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है। जसबीर ने चेतावनी दी कि यदि फसल खराबे का मुआवजा शीघ्र जारी नहीं हुआ तो किसान बड़ा प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। किसानों ने मांग की कि खाद के साथ जबरन अन्य सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाए।
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किसानों की मुख्य मांगे
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अत्यधिक बारिश व बाढ़ से बर्बाद हुई खरीफ फसलों का मुआवजा दिया जाए।
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2023 की बाढ़ से टूटी सड़कों का पुनर्निर्माण पुराने आधार पर किया जाए।
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जलभराव प्रभावित गांवों में स्थायी समाधान निकाला जाए।
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बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाए।
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बाहर से आने वाले धान की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
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खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
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पराली जलाने के मामलों में दर्ज मुकदमे रद्द किए जाएं।