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ऐसे कैसे सुधरेगी स्वास्थ्य सेवाएं, हकीकत से अलग हैं हालात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 02:15 AM IST
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How will health services improve like this, the situation is different from reality
कैथल। जिला बनने के बाद कैथल में उस गति से स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार नहीं हुआ, जिस गति से आबादी बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों व सामुदायिक स्तर पर स्थित सरकारी अस्पतालों में ही चिकित्सकों के 31 पद खाली पड़े हैं। वहीं अकेले जिला अस्पताल में 55 में से 24 चिकित्सक नियुक्त हैं। ऐसे में जैसे-तैसे स्वास्थ्य सेवाओं को मौजूदा स्टाफ द्वारा खींचा जा रहा है।
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28 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कइयों में तो अपनी इमारत भी नहीं हैं और ये किराये के भवनों में चल रहे हैं। वहीं 145 उप स्वास्थ्य केंद्र भी बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर पंचायत भवनों में चल रहे हैं। ऐसे में पीएचसी और सीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं रेंग-रेंग कर चल रही हैं। इमरजेंसी स्थिति में मरीजों को इलाज के लिए तुरंत जिला नागरिक अस्पताल या फिर शहर के निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
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प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के स्वीकृत व खाली पद-
केंद्र स्वीकृत पद खाली पद
सीएचसी सीवन 08 01
सीएचसी कलायत 13 09
सीएचसी पूंडरी 07 04
सीएचसी राजौंद 08 04
सीएचसी गुहला 13 07
सीएचसी कौल 08 06
जिला अस्पताल 55 24
इन पीएचसी में नहीं हैं एक भी डॉक्टर
जिले की कुल 22 पीएचसी में से सजूमा, कौल, रसीना, पाई, किठाना, करोड़ा व खरकां में दो-दो स्वीकृत पदों में से एक भी डॉक्टर नहीं है।
इन पीएचसी में हैं एक-एक डॉक्टर
पीएचसी बात्ता, देवबन, टीक, ढांड, हाबड़ी, जाखौली, अगौंध व भागल में एक-एक डॉक्टर से काम चलाया जा रहा है। सहयोगी स्टॉफ की भी कमी बनी हुई है।
इन पीएचसी में नहीं है विभाग का भवन
जिले में ढांड, पटेल नगर और शक्ति नगर में पीएचसी किराये की इमारतों में चल रहीं हैं। सजूमा और खुराना पीएचसी पंचायत भवन में चलाई जा रही हैं। इसके अलावा अरनौली, फरल व अगौंध में पीएचसी के लिए जमीन तो है, लेकिन भवन निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में यहां भी अभी तक समस्या बनी हुई है।
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सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि डॉक्टरों की कमी के बारे में विभाग के मुख्यालय को समय-समय पर पत्र लिखे जा रहे हैं। जैसे ही नए डॉक्टर आते हैं, उन्हें अस्पतालों में लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की इमारतों के बारे में भी उच्चाधिकारियों से बातचीत की गई है। उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी अस्पतालों के पास खुद की इमारत हो, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर पूर्ण सुविधाएं मिल सकें।
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