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अर्जुन पुरस्कार लेने वाले जिले से तीसरे खिलाड़ी होंगे हरविंदर सिंह
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Harvinder Singh will be the third player from the district to receive the Arjuna Award
- फोटो : Kaithal
टोक्यो पैरालंपिक में तीरंदाजी के रिकर्व इवेंट में देश को पहला कांस्य पदक दिलवाने वाले गांव अजीतनगर निवासी हरविंदर सिंह तीसरे ऐसे खिलाड़ी होंगे, जिन्हें कैथल जिले से अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है। इससे पहले भी जिले के दो खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है।
बलवंत सिंह बल्लू को 1972 में वालीबॉल में उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया था। इसके बाद वर्ष 2014 में बॉक्सर मनोज को दो बार ओलंपिक में पदक लाने के बाद यह अवार्ड मिला था। वहीं अब इसी अवार्ड से 13 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से तीरंदाजी में कांस्य पदक जीतने वाले हरविंदर सिंह को सम्मानित किया जाएगा।
हरविंदर सिंह ने 2016 में पहली पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक, 2017 में तेलंगाना में हुई दूसरी पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय स्पर्धा में रजत पदक, 2017 में बीजिंग में हुई विश्व पैरा तीरंदाजी में सातवां स्थान, 2018 में इंडोनेशिया में एशियन पैरा खेलों में स्वर्ण पदक, 2019 में एशियन पैरा चैंपियनशिप में कांस्य पदक, जून 2019 में नीदरलैंड में विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पैरालंपिक 2020 का कोटा, 2019 में थाइलैंड में हुई तीसरी एशियन पैरा तीरंदाजी के टीम इवेंट में कांस्य पदक, 2019 में रोहतक में हुई तीसरी पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय स्पर्धा में रजत पदक, फरवरी 2021 में दुबई में हुए फीफा कप में टीम में स्वर्ण पदक जीता।
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वॉलीबॉल कोच कर्मबीर ने बताया कि बलवंत सिंह बल्लू जिले के पहले खिलाड़ी थे, जिन्होंने अर्जुन अवार्ड मिला था। पंजाब सरकार ने वॉलीबॉल में उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनकी उपलब्धि की सराहना की थी।
वर्ष 1972 में सरकार ने बलवंत सिंह को अर्जुन पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति वीवी गिरी ने प्रदान किया था। उन्होंने पहली बार सीनियर नेशनल में अपना कॅरियर शुरू किया था।1969 में बलवंत सिंह ने अच्छा प्रदर्शन किया और अपने भारतीय टीम में चुने गए। बलवंत सिंह ने 1974 से 1978 तक भारतीय वॉलीबॉल टीम की कप्तानी की। 1969 में बर्मा में स्वर्ण पदक, 1970 में श्रीलंका में स्वर्ण पदक, 1974 एशियाई खेल में स्वर्ण पदक, 1978 में आठवीं एशियाई खेल बैंकॉक में स्वर्ण पदक, 1979 में रूस में एशियाई चैंपियनशिप में भारत को पांचवां स्थान मिला। अखिल भारतीय पुलिस खेल टूर्नामेंट में 24 वर्षों तक पंजाब राज्य सीमा सुरक्षा बल का प्रतिनिधित्व किया और 16 स्वर्ण और 5 रजत और 2 कांस्य पदक जीते, 1965 में सीनियर नेशनल में पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। 1980 से 1990 तक लगातार सीमा सुरक्षा बल वॉलीबॉल टीम के कप्तान रहे।
कोच राजेश कुमार ने बताया कि बॉक्सर मनोज कुमार कैथल जिले के दूसरे खिलाड़ी है, जिन्हें अर्जुन अवार्ड मिला है। वह लंदन ओलंपिक 2012 और रियो ओलंपिक 2016 में भाग ले चुके हैं। उनकी रैंकिंग नौवीं थी और पांच बार विश्व चैंपियनशिप खेल चुके हैं। इनमें एक बार कांस्य पदक भी हासिल कर चुके हैं। इतने लंबे समय से भारतीय मुक्केबाजीऊ में खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। देश के लिए कॉमनवेल्थ खेलों में दूसरा पदक जीतने वाले भी पहले भारतीय मुक्केबाज हैं। साल 2017 में देश के बेस्ट मुक्केबाज अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। 2014 में इनको भारत सरकार ने अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया था। अब तक देश के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीत चुके हैं। विश्व मुक्केबाजी रैंकिंग में छह रैंक के बॉक्सर रह चुके है। फिलहाल भारतीय रेलवे अंबाला डिवीजन में स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
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बलवंत सिंह बल्लू को 1972 में वालीबॉल में उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया था। इसके बाद वर्ष 2014 में बॉक्सर मनोज को दो बार ओलंपिक में पदक लाने के बाद यह अवार्ड मिला था। वहीं अब इसी अवार्ड से 13 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से तीरंदाजी में कांस्य पदक जीतने वाले हरविंदर सिंह को सम्मानित किया जाएगा।
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हरविंदर सिंह ने 2016 में पहली पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक, 2017 में तेलंगाना में हुई दूसरी पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय स्पर्धा में रजत पदक, 2017 में बीजिंग में हुई विश्व पैरा तीरंदाजी में सातवां स्थान, 2018 में इंडोनेशिया में एशियन पैरा खेलों में स्वर्ण पदक, 2019 में एशियन पैरा चैंपियनशिप में कांस्य पदक, जून 2019 में नीदरलैंड में विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पैरालंपिक 2020 का कोटा, 2019 में थाइलैंड में हुई तीसरी एशियन पैरा तीरंदाजी के टीम इवेंट में कांस्य पदक, 2019 में रोहतक में हुई तीसरी पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय स्पर्धा में रजत पदक, फरवरी 2021 में दुबई में हुए फीफा कप में टीम में स्वर्ण पदक जीता।
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वॉलीबॉल कोच कर्मबीर ने बताया कि बलवंत सिंह बल्लू जिले के पहले खिलाड़ी थे, जिन्होंने अर्जुन अवार्ड मिला था। पंजाब सरकार ने वॉलीबॉल में उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनकी उपलब्धि की सराहना की थी।
वर्ष 1972 में सरकार ने बलवंत सिंह को अर्जुन पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति वीवी गिरी ने प्रदान किया था। उन्होंने पहली बार सीनियर नेशनल में अपना कॅरियर शुरू किया था।1969 में बलवंत सिंह ने अच्छा प्रदर्शन किया और अपने भारतीय टीम में चुने गए। बलवंत सिंह ने 1974 से 1978 तक भारतीय वॉलीबॉल टीम की कप्तानी की। 1969 में बर्मा में स्वर्ण पदक, 1970 में श्रीलंका में स्वर्ण पदक, 1974 एशियाई खेल में स्वर्ण पदक, 1978 में आठवीं एशियाई खेल बैंकॉक में स्वर्ण पदक, 1979 में रूस में एशियाई चैंपियनशिप में भारत को पांचवां स्थान मिला। अखिल भारतीय पुलिस खेल टूर्नामेंट में 24 वर्षों तक पंजाब राज्य सीमा सुरक्षा बल का प्रतिनिधित्व किया और 16 स्वर्ण और 5 रजत और 2 कांस्य पदक जीते, 1965 में सीनियर नेशनल में पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। 1980 से 1990 तक लगातार सीमा सुरक्षा बल वॉलीबॉल टीम के कप्तान रहे।
कोच राजेश कुमार ने बताया कि बॉक्सर मनोज कुमार कैथल जिले के दूसरे खिलाड़ी है, जिन्हें अर्जुन अवार्ड मिला है। वह लंदन ओलंपिक 2012 और रियो ओलंपिक 2016 में भाग ले चुके हैं। उनकी रैंकिंग नौवीं थी और पांच बार विश्व चैंपियनशिप खेल चुके हैं। इनमें एक बार कांस्य पदक भी हासिल कर चुके हैं। इतने लंबे समय से भारतीय मुक्केबाजीऊ में खेलने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। देश के लिए कॉमनवेल्थ खेलों में दूसरा पदक जीतने वाले भी पहले भारतीय मुक्केबाज हैं। साल 2017 में देश के बेस्ट मुक्केबाज अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं। 2014 में इनको भारत सरकार ने अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया था। अब तक देश के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीत चुके हैं। विश्व मुक्केबाजी रैंकिंग में छह रैंक के बॉक्सर रह चुके है। फिलहाल भारतीय रेलवे अंबाला डिवीजन में स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।