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Kaithal News: बाबा रोड़ा की 70वीं पुण्यतिथि पर दुड़ाना में विशाल मेला, हजारों श्रद्धालुओं ने टेका मत्था
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गुरु महिमा का बखान करते राखी जत्थे
राजौंद। राजौंद के निकटवर्ती गांव दुड़ाना में बाबा रोड़ा की 70वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दूर-दराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बाबा रोड़ा के स्थान पर मत्था टेकते हुए मन्नतें मांगी। मेला स्थल पर पूरे दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। वीरवार सुबह अखंड पाठ का भोग डालकर दीवान सजाए गए।
इस दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान से आए कीर्तन एवं ढाडी रागियों ने गुरु महिमा का गुणगान किया, जिसे श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से सुना। इस मौके पर सरपंच संदीप सिंह, काबल सिंह, रत्न सिंह, सरपंच अमर सिंह, सुबा सिंह, भूपेंद्र सिंह, शेर सिंह, इन्द्र सिंह चीमा, अंग्रेज सिंह, डाॅ. बलविंदर सिंह ने बताया कि बाबा रोड़ा 1947 में पाकिस्तान से अन्य पंजाबियों के साथ यहां आए थे। वे प्रारंभ से ही भक्ति और तपस्या में लीन रहते थे। गांव में ही साधना करते हुए 18 जुलाई 1957 को उन्होंने देह त्याग दी।
तभी से हर वर्ष 18 जुलाई को उनकी स्मृति में इस मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि बाबा रोड़ा की समाधि पर जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा से मत्था टेककर मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होती है। इसी आस्था के कारण पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मेले के सफल आयोजन में गांव के सभी लोगों का पूरा सहयोग रहता है, जिससे यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है।
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इस दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान से आए कीर्तन एवं ढाडी रागियों ने गुरु महिमा का गुणगान किया, जिसे श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से सुना। इस मौके पर सरपंच संदीप सिंह, काबल सिंह, रत्न सिंह, सरपंच अमर सिंह, सुबा सिंह, भूपेंद्र सिंह, शेर सिंह, इन्द्र सिंह चीमा, अंग्रेज सिंह, डाॅ. बलविंदर सिंह ने बताया कि बाबा रोड़ा 1947 में पाकिस्तान से अन्य पंजाबियों के साथ यहां आए थे। वे प्रारंभ से ही भक्ति और तपस्या में लीन रहते थे। गांव में ही साधना करते हुए 18 जुलाई 1957 को उन्होंने देह त्याग दी।
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तभी से हर वर्ष 18 जुलाई को उनकी स्मृति में इस मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि बाबा रोड़ा की समाधि पर जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा से मत्था टेककर मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होती है। इसी आस्था के कारण पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मेले के सफल आयोजन में गांव के सभी लोगों का पूरा सहयोग रहता है, जिससे यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है।

गुरु महिमा का बखान करते राखी जत्थे

गुरु महिमा का बखान करते राखी जत्थे
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