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Kaithal News: आत्मा के लिए भगवान का नाम और कथा है अमृत समान
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इस्कॉन प्रचार समिति कैथल की ओर से गीता भवन मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा व्यास साक्षी गोपाल दास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से कंस के वध तक का वृतांत का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा के लिए भगवान का नाम और कथा अमृत समान है। इनके बिना आत्मा का पोषण असंभव है।
उन्होंने बताया कि श्रील प्रभुपाद ने इस्कॉन के प्रत्येक मंदिर में श्रीमद्भगवद्गीता की एक घंटे की कक्षा को अनिवार्य किया, ताकि आत्मा को निरंतर दिव्य ऊर्जा मिलती रहे।
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कथा के दौरान उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवतम के दशम स्कंध में महाराज परीक्षित, अपने गुरु शुकदेव गोस्वामी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, गोकुल, मथुरा और द्वारका की लीलाएं सुनने की प्रार्थना करते हैं। शुकदेव गोस्वामी द्वारा वर्णित चंद्रवंश में, भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का वर्णन दो श्लोकों में कर कथा को विराम दे दिया गया।
उन्होंने विस्तार से बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में देवकी और वासुदेव के माध्यम से हुआ। वासुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल ले गए, जहां उनका पालन-पोषण नंद बाबा और यशोदा माता ने किया। गोकुल में भगवान ने पूतना, शकटासुर, कालिया, बकासुर जैसे असुरों का वध कर धरती को पापमुक्त किया।
इसके बाद वे अक्रूर के साथ मथुरा गए और कंस का वध किया। मथुरा में कुछ वर्ष निवास के पश्चात वे द्वारका गए, जहां उन्होंने 16,108 रानियों से विवाह किया और प्रत्येक से 10 पुत्र व एक पुत्री उत्पन्न हुई।
इस अवसर पर रमेश सचदेवा (खाद व्यवसायी), प्रमुख समाजसेवी अमरजीत छाबड़ा, सैनी समाज के जिलाध्यक्ष रिंकू सैनी और संदीप गोयल समेत अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन समिति के प्रधान दीपक अग्रवाल, राज गुलाटी, आशीष गर्ग, राम निवास, अमित गर्ग, सुमित ओबराय, संजय वाही, नीरज गर्ग, बलविंदर व रमेश आदि ने किया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पारंपरिक उल्लास और भक्ति भाव से मनाया गया। मुख्य अतिथि विधायक सतपाल जाम्बा, वरिष्ठ अधिवक्ता मनदीप सिंह, यूनिक चौधरी व नीरज मक्कड़ ने दीप प्रज्वलन कर कथा व्यास का पुष्पमालाओं से स्वागत किया।
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कैथल। इस्कॉन प्रचार समिति कैथल की ओर से गीता भवन मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा व्यास साक्षी गोपाल दास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से कंस के वध तक का वृतांत का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा के लिए भगवान का नाम और कथा अमृत समान है। इनके बिना आत्मा का पोषण असंभव है।
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उन्होंने बताया कि श्रील प्रभुपाद ने इस्कॉन के प्रत्येक मंदिर में श्रीमद्भगवद्गीता की एक घंटे की कक्षा को अनिवार्य किया, ताकि आत्मा को निरंतर दिव्य ऊर्जा मिलती रहे।
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कथा के दौरान उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवतम के दशम स्कंध में महाराज परीक्षित, अपने गुरु शुकदेव गोस्वामी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, गोकुल, मथुरा और द्वारका की लीलाएं सुनने की प्रार्थना करते हैं। शुकदेव गोस्वामी द्वारा वर्णित चंद्रवंश में, भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का वर्णन दो श्लोकों में कर कथा को विराम दे दिया गया।
उन्होंने विस्तार से बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में देवकी और वासुदेव के माध्यम से हुआ। वासुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल ले गए, जहां उनका पालन-पोषण नंद बाबा और यशोदा माता ने किया। गोकुल में भगवान ने पूतना, शकटासुर, कालिया, बकासुर जैसे असुरों का वध कर धरती को पापमुक्त किया।
इसके बाद वे अक्रूर के साथ मथुरा गए और कंस का वध किया। मथुरा में कुछ वर्ष निवास के पश्चात वे द्वारका गए, जहां उन्होंने 16,108 रानियों से विवाह किया और प्रत्येक से 10 पुत्र व एक पुत्री उत्पन्न हुई।
इस अवसर पर रमेश सचदेवा (खाद व्यवसायी), प्रमुख समाजसेवी अमरजीत छाबड़ा, सैनी समाज के जिलाध्यक्ष रिंकू सैनी और संदीप गोयल समेत अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन समिति के प्रधान दीपक अग्रवाल, राज गुलाटी, आशीष गर्ग, राम निवास, अमित गर्ग, सुमित ओबराय, संजय वाही, नीरज गर्ग, बलविंदर व रमेश आदि ने किया।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पारंपरिक उल्लास और भक्ति भाव से मनाया गया। मुख्य अतिथि विधायक सतपाल जाम्बा, वरिष्ठ अधिवक्ता मनदीप सिंह, यूनिक चौधरी व नीरज मक्कड़ ने दीप प्रज्वलन कर कथा व्यास का पुष्पमालाओं से स्वागत किया।