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देश सेवा की राह चुन कैथल का बेटा बना लेफ्टिनेंट
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 13 Dec 2016 11:57 PM IST
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चिरंजीव कालौनी निवासी गौरव वर्मा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सेना से सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त पूर्व सैन्य अधिकारी के पुत्र गौरव वर्मा ने सेना में लेफ्टिनेंट बन अपने पिता व परिवार का नाम रोशन किया है। गत दस दिसंबर को बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में गौरव को यह पद दिया गया। इस अवसर पर उनके साथ उनके परिजन भी मौजूद थे।
गौरव वर्मा ने बताया कि उसके पिता सुरेश वर्मा सेना में सूबेदार मेजर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस समय वे सरकारी विभाग में बतौर जेई कार्यरत हैं। उसने दसवीं देहरादून स्थित सेंट्रल स्कूल से की।
इसके बाद बारहवीं ऋषिकुल विद्यापीठ सोनीपत से की। बारहवीं में मेरिट के बाद उसने टेकभनीकल इंट्री स्कीम के लिए आवेदन किया। जिसमें देश भर से दस हजार बच्चों का चयन किया जाता है। इन दस हजार बच्चों की परीक्षा होती है। बारहवीं में मेरिट के आधार पर उसका इन दस हजार में चयन हुआ। इसके बाद सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया। जिसमें करीब 100 युवाओं का चयन किया गया। इस परीक्षा में भी उसने अच्छा रैंक हासिल किया। जिस पर वह लेफ्टिनेंट के लिए चयनित हो गया था।
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गत चार सालों से वह बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग कर रहा था। गत 10 दिसंबर को पास आउट परेड में उसे यह रैंक हासिल हुआ। देश सेवा के लिए वह इस क्षेत्र में आया है। उसकी बहन ने बीडीएस करने के बाद क्लीनिक खोला था। अब वह भी एमबीबीएस कर रही हैं। वहीं परिवार में भी गौरव के लेफ्टिनेंट बनने पर जश्र का माहौल है। उनके चाचा डा. रमेश वर्मा कृषि अनुसंधान संस्थान कौल में बतौर प्रोफेसर नियुक्त हैं तो दूसरे चाचा जाखौली स्थित राजकीय विद्यालय में प्राध्यापक हैं।
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गौरव वर्मा ने बताया कि उसके पिता सुरेश वर्मा सेना में सूबेदार मेजर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इस समय वे सरकारी विभाग में बतौर जेई कार्यरत हैं। उसने दसवीं देहरादून स्थित सेंट्रल स्कूल से की।
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इसके बाद बारहवीं ऋषिकुल विद्यापीठ सोनीपत से की। बारहवीं में मेरिट के बाद उसने टेकभनीकल इंट्री स्कीम के लिए आवेदन किया। जिसमें देश भर से दस हजार बच्चों का चयन किया जाता है। इन दस हजार बच्चों की परीक्षा होती है। बारहवीं में मेरिट के आधार पर उसका इन दस हजार में चयन हुआ। इसके बाद सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया। जिसमें करीब 100 युवाओं का चयन किया गया। इस परीक्षा में भी उसने अच्छा रैंक हासिल किया। जिस पर वह लेफ्टिनेंट के लिए चयनित हो गया था।
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गत चार सालों से वह बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग कर रहा था। गत 10 दिसंबर को पास आउट परेड में उसे यह रैंक हासिल हुआ। देश सेवा के लिए वह इस क्षेत्र में आया है। उसकी बहन ने बीडीएस करने के बाद क्लीनिक खोला था। अब वह भी एमबीबीएस कर रही हैं। वहीं परिवार में भी गौरव के लेफ्टिनेंट बनने पर जश्र का माहौल है। उनके चाचा डा. रमेश वर्मा कृषि अनुसंधान संस्थान कौल में बतौर प्रोफेसर नियुक्त हैं तो दूसरे चाचा जाखौली स्थित राजकीय विद्यालय में प्राध्यापक हैं।