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धूमधाम से किया भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन
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जिलेभर में धूमधाम से गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं द्वारा श्री गणेश भगवान की प्रतिमा जयकारों के साथ जल में विसर्जन किया। गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। लॉकडाउन के बावजूद बच्चों से लेकर बड़ों ने बाजार में उत्साह के साथ गणेश प्रतिमाएं खरीदी और घरों में स्थापित किया। कोरोना महामारी को देखते हुए अधिकांश श्रद्धालुओं ने घरों में ही श्री गणेश की पूजा अर्चना की। बहुत कम संख्या में श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा की मूर्ति का बहते जल में विसर्जन किया।
जयकारों के साथ किया भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन :
वहीं शहर के खरादिया मोहल्ला वासियों ने तीसरा गणेश महोत्सव एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर बड़े उत्साह पूर्वक मनाया। खरादिया महोल्ला वासी रूपलाल आहूजा ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष महामारी को देखते हुए घर में ही बीते 22 अगस्त को श्री गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई थी। कोरोना को देखते हुए हर रोज सुबह शाम साढे सात बजे सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए पूजा अर्चना की जाती है। मूर्ति स्थापना के ग्यारह दिन बाद मंगलवार को गांव चंदाना स्थित सिरसा ब्रांच नहर में बहते पानी में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का जयकारों के साथ विसर्जन किया। उसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर जतिन, कपिल, मोंटी, सन्नी, चांद, शुभम, जानू, वंशु, श्रवण, चिराग ठकरान, पन्नू, धीरज, रजत, मीनू, नीलम, आरती, वंशिका, कमलेश, राजप्यारी, गगन, कृति, वर्षा, मुक्ता, कनिका, खुशी, सुमन, रिया, गरिम व निशू मौजूद थी।
शहर में अन्य स्थानों पर भी श्रद्धालुओं ने डीजे पर गणपति बप्पा मोरया का सोंग लगाकर खूब मनोरंजन किया व एक दूसरे को रंग लगाकर खुशी मनाई। शहरवासी कपिल, मोंटी, सन्नी, चांद व शुभम ने बताया कि हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को बड़े ही धूमधाम से घर में लाया जाता है और ग्यारह दिनों तक इन्हें घर में स्थापित किया जाता है। भगवान गणेश को इस समय में बहुत ही सुंदर वस्त्रों व विभिन्न रंगों से सजाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस समय में भगवान गणेश की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और उन्हें मोदक और लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। इसके बाद ग्यारहवें दिन भगवान गणेश का बड़े ही धूमधाम से विसर्जन करके उनसे प्रार्थना की जाती है कि वह अगले साल भी जल्दी आएं और अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करें। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश जहां पर भी विराजते हैं वहां धन, संपत्ति, सुख और संपदा स्वयं ही चली आती है।
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जयकारों के साथ किया भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन :
वहीं शहर के खरादिया मोहल्ला वासियों ने तीसरा गणेश महोत्सव एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर बड़े उत्साह पूर्वक मनाया। खरादिया महोल्ला वासी रूपलाल आहूजा ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष महामारी को देखते हुए घर में ही बीते 22 अगस्त को श्री गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई थी। कोरोना को देखते हुए हर रोज सुबह शाम साढे सात बजे सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए पूजा अर्चना की जाती है। मूर्ति स्थापना के ग्यारह दिन बाद मंगलवार को गांव चंदाना स्थित सिरसा ब्रांच नहर में बहते पानी में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का जयकारों के साथ विसर्जन किया। उसके बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर जतिन, कपिल, मोंटी, सन्नी, चांद, शुभम, जानू, वंशु, श्रवण, चिराग ठकरान, पन्नू, धीरज, रजत, मीनू, नीलम, आरती, वंशिका, कमलेश, राजप्यारी, गगन, कृति, वर्षा, मुक्ता, कनिका, खुशी, सुमन, रिया, गरिम व निशू मौजूद थी।
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शहर में अन्य स्थानों पर भी श्रद्धालुओं ने डीजे पर गणपति बप्पा मोरया का सोंग लगाकर खूब मनोरंजन किया व एक दूसरे को रंग लगाकर खुशी मनाई। शहरवासी कपिल, मोंटी, सन्नी, चांद व शुभम ने बताया कि हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को बड़े ही धूमधाम से घर में लाया जाता है और ग्यारह दिनों तक इन्हें घर में स्थापित किया जाता है। भगवान गणेश को इस समय में बहुत ही सुंदर वस्त्रों व विभिन्न रंगों से सजाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस समय में भगवान गणेश की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और उन्हें मोदक और लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। इसके बाद ग्यारहवें दिन भगवान गणेश का बड़े ही धूमधाम से विसर्जन करके उनसे प्रार्थना की जाती है कि वह अगले साल भी जल्दी आएं और अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करें। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश जहां पर भी विराजते हैं वहां धन, संपत्ति, सुख और संपदा स्वयं ही चली आती है।
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