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Kaithal News: लंपी से बचाव के लिए चार माह से अधिक उम्र के गोवंश का मुफ्त टीकाकरण
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कैथल। जिले में गोवंश को लंपी स्किन डिजीज से बचाने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत चार माह से अधिक आयु के स्वस्थ गोवंश को नि:शुल्क टीका लगाया जा रहा है। विभाग का विशेष टीकाकरण अभियान 20 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। जिले की सभी गोशालाओं में पात्र पशुओं का टीकाकरण पूरा हो चुका है, जबकि गांवों में अभियान अंतिम चरण में है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डॉ. सूर्या खटकड़ ने बताया कि लंपी रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण के साथ निगरानी उपचार और पशुपालकों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर पशुपालकों को बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी दे रही हैं।
मच्छर-मक्खी और चिचड़ी से फैलता है रोग
डॉ. खटकड़ ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज विषाणुजनित संक्रामक रोग है। यह मुख्य रूप से मच्छर मक्खी और चिचड़ी जैसे रक्त चूसने वाले परजीवियों के माध्यम से पशुओं में फैलता है। तेज बुखार शरीर पर गांठें आंख और नाक से पानी आना गले की ग्रंथियों में सूजन और दूध उत्पादन में कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह रोग मनुष्यों में नहीं फैलता।
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बीमार पशु को तुरंत करें अलग
उन्होंने पशुपालकों से पशु आवास और आसपास पानी जमा न होने देने और गोबर-कूड़ा नियमित हटाने की अपील की। मक्खी मच्छर और चिचड़ी की रोकथाम के लिए उचित कीटनाशक का प्रयोग करने की सलाह दी। नया पशु खरीदने पर उसे कम से कम तीन से चार सप्ताह अलग रखने और इसके बाद ही दूसरे पशुओं के साथ रखने को कहा। बीमारी के लक्षण दिखने पर पशु को तुरंत अलग कर उसके लिए अलग बर्तन चारा और पानी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। बिना पंजीकृत पशु चिकित्सक की सलाह के दवा न देने को कहा गया है। किसी पशु में लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय या टोल फ्री हेल्पलाइन 1962 पर सूचना देने की अपील की गई है।
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पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप निदेशक डॉ. सूर्या खटकड़ ने बताया कि लंपी रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण के साथ निगरानी उपचार और पशुपालकों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है। विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर पशुपालकों को बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी दे रही हैं।
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मच्छर-मक्खी और चिचड़ी से फैलता है रोग
डॉ. खटकड़ ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज विषाणुजनित संक्रामक रोग है। यह मुख्य रूप से मच्छर मक्खी और चिचड़ी जैसे रक्त चूसने वाले परजीवियों के माध्यम से पशुओं में फैलता है। तेज बुखार शरीर पर गांठें आंख और नाक से पानी आना गले की ग्रंथियों में सूजन और दूध उत्पादन में कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह रोग मनुष्यों में नहीं फैलता।
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बीमार पशु को तुरंत करें अलग
उन्होंने पशुपालकों से पशु आवास और आसपास पानी जमा न होने देने और गोबर-कूड़ा नियमित हटाने की अपील की। मक्खी मच्छर और चिचड़ी की रोकथाम के लिए उचित कीटनाशक का प्रयोग करने की सलाह दी। नया पशु खरीदने पर उसे कम से कम तीन से चार सप्ताह अलग रखने और इसके बाद ही दूसरे पशुओं के साथ रखने को कहा। बीमारी के लक्षण दिखने पर पशु को तुरंत अलग कर उसके लिए अलग बर्तन चारा और पानी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। बिना पंजीकृत पशु चिकित्सक की सलाह के दवा न देने को कहा गया है। किसी पशु में लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय या टोल फ्री हेल्पलाइन 1962 पर सूचना देने की अपील की गई है।