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Kaithal News: चार बसें जर्जर घोषित, रूटों पर घटी संख्या

Tue, 13 Jan 2026 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 13 Jan 2026 01:37 AM IST
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Four buses declared dilapidated, number reduced on routes
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। सोमवार को कैथल रोडवेज डिपो का बेड़ा एक बार फिर घट गया। डिपो की चार बसों को जर्जर घोषित कर रूटों से हटा दिया गया है। इन बसों के हटने से खासकर लोकल और स्कूल-कॉलेज रूटों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। इन रूटों पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को आने वाले दिनों में परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

अगस्त माह से अब तक कैथल डिपो की कुल 67 बसें जर्जर हो चुकी हैं, जबकि जनवरी के अंतिम सप्ताह तक तीन और बसों के जर्जर होने की संभावना है। आंकड़ों के अनुसार अगस्त में 12 बसें, सितंबर में 30, अक्तूबर में 12 और दिसंबर में नौ बसें अपनी 10 साल की निर्धारित वैधता पूरी कर चुकी हैं।
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फिलहाल डिपो के पास केवल 183 बसें शेष बची हैं, जिनमें 160 रोडवेज की अपनी और 23 लीज पर ली गई बसें शामिल हैं। जबकि जनसंख्या और यात्री भार के अनुसार डिपो को लगभग 250 बसों की आवश्यकता है। इससे स्पष्ट है कि डिपो को मौजूदा समय में 67 नई बसों की दरकार है। इससे पहले डिपो के पास 164 अपनी और लीज सहित कुल 199 बसें थीं। हाल के महीनों में करीब 20 बसें डिपो में पुरानी और नई मिलाकर आई हैं, लेकिन इसके बावजूद कमी पूरी नहीं हो सकी। वर्तमान स्थिति की बात करें तो डिपो में केवल 73 बसें ही अपेक्षाकृत नई अवस्था में हैं, जबकि शेष अधिकांश बसें जर्जर हालत में वर्कशॉप से मरम्मत कराकर चलाई जा रही हैं। कई बार अधिक पुरानी बसें बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यात्री राजेश, बंटी, मनोज और रिसाल सिंह ने बताया कि कैथल डिपो की कई बसें बेहद खटारा हालत में पहुंच चुकी हैं। रूटों पर बसें बार-बार खराब हो जाती हैं। सरकार की ओर से नाममात्र ही नई बसें भेजी जा रही हैं। सरकार को चाहिए कि नई बसों की खरीद कर डिपो को उपलब्ध करवाए, ताकि यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो और वे समय पर अपने घर पहुंच सकें।
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इन रूटों पर बढ़ेगी यात्रियों की परेशानी : बसों की संख्या घटने से करनाल, कुरुक्षेत्र, जींद, असंध, गुहला-चीका और नरवाना रूटों पर सफर करना मुश्किल हो सकता है। इन रूटों पर पहले इन्हीं बसों का नियमित संचालन किया जा रहा था।

डिपो की आमदनी में भी आएगी गिरावट : जैसे-जैसे डिपो में बसों की कमी बढ़ रही है, वैसे-वैसे आमदनी भी घटती जा रही है। डिपो की रोजाना आमदनी 18 लाख रुपये से घटकर 16 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इससे सरकार के राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। कैथल जिला की बसों में रोजाना करीब 20 हजार यात्री सफर करते हैं।

सरकार को करनी चाहिए नई बसों की खरीद : रोडवेज कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार ने कहा कि प्रदेशभर में रोडवेज का बेड़ा लगातार घट रहा है। कैथल डिपो से हर महीने बसें जर्जर हो रही हैं। डिपो की अधिकतर बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। सरकार को तुरंत नई बसों की खरीद कर डिपो में भेजना चाहिए। जितनी अधिक बसें होंगी, उतनी ही आमदनी बढ़ेगी। पुरानी बसें बीच रास्ते खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों के साथ-साथ चालक और परिचालक को भी परेशानी होती है।
मुख्यालय की तकनीकी टीम करती है जर्जर बसों का निरीक्षण

10 वर्ष की वैधता पूरी कर चुकी बसों का निरीक्षण मुख्यालय द्वारा गठित तकनीकी टीम करती है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर बसों को जर्जर घोषित कर रूटों से हटा दिया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत सोमवार को चार बसों को जर्जर घोषित किया गया। उल्लेखनीय है कि कैथल डिपो की पुरानी बसों का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है, लेकिन इसके बावजूद बसों की कमी दूर नहीं हो पाई है।


चार बसें जर्जर हुई हैं

कैथल डिपो की चार बसों को सोमवार को जर्जर घोषित किया गया है। नई बसों को लेकर मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जा रही है और सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जा रहा है। -अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर
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