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Kaithal News: पूर्व मुख्य संसदीय सचिव ने खोला मोर्चा
Sun, 20 Aug 2023 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 20 Aug 2023 01:25 AM IST
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कैथल। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर अपने चहेेतों को अपनी विशेषाधिकार ग्रांट बांटने के आरोप लगाए हैं।
माजरा ने आरोप लगाते हुए कि इस ग्रांट से वे हलका के गरीब लोगों की मदद की जा सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। गरीब कार्यकर्ता अपने कार्यों के लिए भटक रहे हैं। फिर भी राज्यमंत्री ने गरीब लोगों को दी जाने वाली ग्रांट को उनके कुछ चहेतों में बांट दिया। माजरा ने अपने आवास पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया।
माजरा ने यहां तक आरोप लगाए कि जिन सक्षम संस्थाओं को 30 से 50 लाख रुपये तक की ग्रांट दी गई है, उसमें भी गड़बड़ है। कहा कि वर्ष 2019-20 में राज्यमंत्री ने विशेषाधिकार ग्रांट को केवल 95 लोगों में बांटा। इसमें अधिकतर ऐसे लोग हैं, जो हर तरह से सक्षम हैं। यह कारवां पिछले तीन साल से लगातार चल रहा है। यदि पूरे मामले की जांच की जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
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स्वैच्छिक कोष से अनुदान लेने के लिए गंभीर बीमारियों से पीड़ित, मकान की मरम्मत जैसी कई प्रकार की मदद के लिए सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं द्वारा मांग रखी जाती हैं। मेरे पास जो आवेदन आए थे, उनपर ही विचार करके ही यह अनुदान दिए हैं और भविष्य में कोई व्यक्ति आवेदन करेगा, तो उसपर विचार करके मदद की जाएगी। मेरा प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक जरूरतमंदों की मदद की जा सके। सामाजिक, शैक्षणिक संस्थाओं को अनुदान देने के अतिरिक्त मैंने कभी किसी जरूरतमंद की मदद को राजनीतिक फायदे का माध्यम नहीं बनाया। जनसेवा के अवसर को गंवा चुके कुछ लोग पूरी प्रक्रिया से वाकिफ होने के बाद भी ऐसे सवाल उठा रहे हैं। -कमलेश ढांडा, महिला एवं बाल विकास मंत्री
माजरा ने आरोप लगाते हुए कि इस ग्रांट से वे हलका के गरीब लोगों की मदद की जा सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। गरीब कार्यकर्ता अपने कार्यों के लिए भटक रहे हैं। फिर भी राज्यमंत्री ने गरीब लोगों को दी जाने वाली ग्रांट को उनके कुछ चहेतों में बांट दिया। माजरा ने अपने आवास पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित किया।
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माजरा ने यहां तक आरोप लगाए कि जिन सक्षम संस्थाओं को 30 से 50 लाख रुपये तक की ग्रांट दी गई है, उसमें भी गड़बड़ है। कहा कि वर्ष 2019-20 में राज्यमंत्री ने विशेषाधिकार ग्रांट को केवल 95 लोगों में बांटा। इसमें अधिकतर ऐसे लोग हैं, जो हर तरह से सक्षम हैं। यह कारवां पिछले तीन साल से लगातार चल रहा है। यदि पूरे मामले की जांच की जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
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स्वैच्छिक कोष से अनुदान लेने के लिए गंभीर बीमारियों से पीड़ित, मकान की मरम्मत जैसी कई प्रकार की मदद के लिए सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं द्वारा मांग रखी जाती हैं। मेरे पास जो आवेदन आए थे, उनपर ही विचार करके ही यह अनुदान दिए हैं और भविष्य में कोई व्यक्ति आवेदन करेगा, तो उसपर विचार करके मदद की जाएगी। मेरा प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक जरूरतमंदों की मदद की जा सके। सामाजिक, शैक्षणिक संस्थाओं को अनुदान देने के अतिरिक्त मैंने कभी किसी जरूरतमंद की मदद को राजनीतिक फायदे का माध्यम नहीं बनाया। जनसेवा के अवसर को गंवा चुके कुछ लोग पूरी प्रक्रिया से वाकिफ होने के बाद भी ऐसे सवाल उठा रहे हैं। -कमलेश ढांडा, महिला एवं बाल विकास मंत्री