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टीमों का गठन कर सड़कों से हटवाएं पशु : डीसी
Wed, 12 Nov 2025 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। डीसी प्रीति ने जिले के अधिकारियों को बेसहारा और आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिला नगर आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें और इस समस्या का स्थाई समाधान निकाले।
जिले के सभी शहरी क्षेत्रों की गलियों, मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर बड़ी संख्या में गाय, बैल, घोड़े जैसे बेसहारा पशु घूम रहे हैं। इन पशुओं के कारण कई गंभीर दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप जान-माल का काफी नुकसान होता है उन्होंने नगर आयुक्त को निर्देश जारी किए कि शहरी क्षेत्रों में संबंधित कार्यकारी अधिकारी, सचिव नगरपालिका की टीमों का गठन करें और मौका निरीक्षण करवाएं। इसके साथ ही उप-निदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जल्द बेसहारा पशुओं की समस्या का निवारण करवाना सुनिश्चित करें, ताकि सरकार की हिदायतों के अनुपालन में जिले को बेसहारा पशु मुक्त बनाया जा सके और भविष्य में इस वजह से कोई हादसा न हो।
पशुओं के कारण हो रहे हादसे
गोवंश वाहन चालकों के लिए किसी काल से कम नहीं। वहीं दुर्घटना में इनकी जिंदगी भी दांव पर है। इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर तक 237 सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें 145 ने अपनी जिंदगी गंवाई। आंकड़ों के अनुसार 10-15 प्रतिशत हादसे पशुओं के कारण हुए हैं। फिर भी नगर परिषद हादसों से सबक नहीं ले रहा है और एजेंसी को ढील दे रखी है। इस कारण पशु मुक्त शहर नहीं हो पा रहा है।
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दो माह से थमा परिषद का अभियान
नगर परिषद की तरफ से जिस एजेंसी को पशु पकड़ने का टेंडर दिया गया है, वह प्रति पशु पकड़ने के करीब 1180 रुपये लेती है। फिर भी सड़कों से पशु नहीं हट रहे। अनुमान अनुसार केले शहर में ही 250-300 से अधिक गोवंश सड़कों पर हैं। शहर ें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, शिक्षा संस्थानों के आगे पशु देखे जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार और निकायों को पशु हटाने के आदेश दिए है।
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कैथल। डीसी प्रीति ने जिले के अधिकारियों को बेसहारा और आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिला नगर आयुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें और इस समस्या का स्थाई समाधान निकाले।
जिले के सभी शहरी क्षेत्रों की गलियों, मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर बड़ी संख्या में गाय, बैल, घोड़े जैसे बेसहारा पशु घूम रहे हैं। इन पशुओं के कारण कई गंभीर दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप जान-माल का काफी नुकसान होता है उन्होंने नगर आयुक्त को निर्देश जारी किए कि शहरी क्षेत्रों में संबंधित कार्यकारी अधिकारी, सचिव नगरपालिका की टीमों का गठन करें और मौका निरीक्षण करवाएं। इसके साथ ही उप-निदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए जल्द बेसहारा पशुओं की समस्या का निवारण करवाना सुनिश्चित करें, ताकि सरकार की हिदायतों के अनुपालन में जिले को बेसहारा पशु मुक्त बनाया जा सके और भविष्य में इस वजह से कोई हादसा न हो।
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पशुओं के कारण हो रहे हादसे
गोवंश वाहन चालकों के लिए किसी काल से कम नहीं। वहीं दुर्घटना में इनकी जिंदगी भी दांव पर है। इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर तक 237 सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें 145 ने अपनी जिंदगी गंवाई। आंकड़ों के अनुसार 10-15 प्रतिशत हादसे पशुओं के कारण हुए हैं। फिर भी नगर परिषद हादसों से सबक नहीं ले रहा है और एजेंसी को ढील दे रखी है। इस कारण पशु मुक्त शहर नहीं हो पा रहा है।
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दो माह से थमा परिषद का अभियान
नगर परिषद की तरफ से जिस एजेंसी को पशु पकड़ने का टेंडर दिया गया है, वह प्रति पशु पकड़ने के करीब 1180 रुपये लेती है। फिर भी सड़कों से पशु नहीं हट रहे। अनुमान अनुसार केले शहर में ही 250-300 से अधिक गोवंश सड़कों पर हैं। शहर ें बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, शिक्षा संस्थानों के आगे पशु देखे जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार और निकायों को पशु हटाने के आदेश दिए है।