{"_id":"68409e01c497516dee099063","slug":"flash-card-game-shows-the-diversity-of-indian-cuisine-kaithal-news-c-18-1-knl1004-662885-2025-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: फ्लैश कार्ड खेल से जानी भारतीय व्यंजनों में विविधता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: फ्लैश कार्ड खेल से जानी भारतीय व्यंजनों में विविधता
Thu, 05 Jun 2025 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 05 Jun 2025 12:56 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरोही स्कूल, ग्योंग में आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर के पहले सत्र में विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक विविधता और खासतौर पर क्षेत्रीय व्यंजनों की विविधता और एकता की जानकारी दी गई। इस मौके पर बूझो तो जानो फ्लैश कार्ड खेल से विद्यार्थियों ने भारत के व्यंजनों में विविधता को भी जाना।
प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार चावला ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजन न सिर्फ स्वाद में अनूठे हैं, बल्कि वे देश की विविध संस्कृतियों, धर्मों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व भी करते हैं।
डॉ. चावला ने कहा कि भारतीय भोजन प्रणाली विभिन्न स्वादों और पाक परंपराओं का अद्वितीय संगम है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। विद्यार्थियों ने बूझो तो जानो नामक फ्लैश कार्ड गेम के जरिए खेल-खेल में व्यंजनों के माध्यम से भाषा, संस्कृति और आपसी सम्मान के बारे में सीखा।
विज्ञापन
इसके बाद विद्यार्थियों ने रोल-प्ले गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने खरीदारी करना, रेस्तरां में ऑर्डर देना, खाद्य सामग्री बेचना, तथा सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी देना जैसे जीवन से जुड़ी गतिविधियों में संवाद आधारित भूमिकाएं निभाईं।
दूसरे सत्र में प्राध्यापक कुलदीप ने अंग्रेज़ी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा कोई भी हो, हमें हर भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। तीसरे सत्र में संगीत प्राध्यापिका डॉ. प्रोमिला ने विभिन्न भाषाओं में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने छात्रों को अनूठे वाद्ययंत्रों, गीत पत्रक (सॉन्ग शीट्स), नृत्य मुद्राओं आदि के बारे में भी जानकारी दी।
विज्ञापन
कैथल। आरोही स्कूल, ग्योंग में आयोजित भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर के पहले सत्र में विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक विविधता और खासतौर पर क्षेत्रीय व्यंजनों की विविधता और एकता की जानकारी दी गई। इस मौके पर बूझो तो जानो फ्लैश कार्ड खेल से विद्यार्थियों ने भारत के व्यंजनों में विविधता को भी जाना।
प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार चावला ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजन न सिर्फ स्वाद में अनूठे हैं, बल्कि वे देश की विविध संस्कृतियों, धर्मों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व भी करते हैं।
विज्ञापन
डॉ. चावला ने कहा कि भारतीय भोजन प्रणाली विभिन्न स्वादों और पाक परंपराओं का अद्वितीय संगम है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। विद्यार्थियों ने बूझो तो जानो नामक फ्लैश कार्ड गेम के जरिए खेल-खेल में व्यंजनों के माध्यम से भाषा, संस्कृति और आपसी सम्मान के बारे में सीखा।
विज्ञापन
इसके बाद विद्यार्थियों ने रोल-प्ले गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने खरीदारी करना, रेस्तरां में ऑर्डर देना, खाद्य सामग्री बेचना, तथा सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी देना जैसे जीवन से जुड़ी गतिविधियों में संवाद आधारित भूमिकाएं निभाईं।
दूसरे सत्र में प्राध्यापक कुलदीप ने अंग्रेज़ी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा कोई भी हो, हमें हर भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। तीसरे सत्र में संगीत प्राध्यापिका डॉ. प्रोमिला ने विभिन्न भाषाओं में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने छात्रों को अनूठे वाद्ययंत्रों, गीत पत्रक (सॉन्ग शीट्स), नृत्य मुद्राओं आदि के बारे में भी जानकारी दी।