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पीडब्ल्यूडी कोड के आधार पर हुई है एफआईआर, ये कोड नगर परिषद में नहीं होता लागू
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नगर परिषद चेयरपर्सन की नियुक्ति म्यूनिसिपल एक्ट के तहत हुई है। पीडल्ब्यूडी कोड उनके ऊपर लागू ही नहीं होता। इसलिए उन पर दर्ज की गई एफआईआर भी अवैध है। ये विचार नगर परिषद चेयरपर्सन सीमा कश्यप ने शहरी निकाय विभाग के निदेशक को भेजे अपने लिखित जवाब में कहा है। सीमा कश्यप ने निजी तौर पर उपस्थित होने के बजाए लिखित में जवाब भेजा है। सीमा कश्यप ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को ही चुनौती दी है। अब देखना होगा कि विभाग के निदेशक उनके जवाब पर क्या संज्ञान लेते हैं?
सिटी स्कवेयर मामले में विभाग के निदेशक ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस
नगर परिषद चेयरपर्सन सीमा कश्यप को विभाग के निदेशक ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। इसीलिए क्यों ना उन्हें सस्पेंड कर दिया जाए। इससे पूर्व निजी तौर पर हाजिर होकर अपना पक्ष रखें।
विभाग मुख्यालय की अप्रूवल के बाद जारी किया गया था टेंडर
हाईकोर्ट के वकील के माध्यम से विभाग में दिए अपने लिखित जवाब में सीमा कश्यप ने कहा कि सिटी स्क्वेयर के टेंडर के लिए विभाग को अप्रूवल भेजी गई थी। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही इसका टेंडर जारी हुआ था। टेंडर प्रक्रिया में बिडस, डीएनआईटी व अन्य सभी कार्यों के लिए विभाग की ही अनुमति ली गई थी। साथ ही इसके टेंडर व डीएनआईटी की पूरी प्रक्रिया को विभाग की तकनीकी विंग द्वारा तैयार किया गया था। जिसमें जेई, एमई, एक्सईएन सहित अन्य अधिकारियों द्वारा तैयार करके उनके पास अनुमति के लिए आई थी, जब किसी भी अधिकारी द्वारा कोई सवाल नहीं उठाया गया तो उन्होंने भी उस पर सहमति दी थी। उन्हें तकनीकी जानकारी नहीं हैं। तकनीकी जानकारी में क्या खामी थी, क्या है या कोई खामी भी नहीं है। इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसलिए इस संबंध में उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
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जब पीडब्ल्यूडी कोड उन पर लागू ही नहीं होता तो एफआईआर क्यों?
चेयरपर्सन सीमा कश्यप के पिता सुरेश कश्यप ने कहा कि एफआईआर पीडब्ल्यूडी कोड को आधार बनाकर की गई है। जबकि चेयरपर्सन की नियुक्ति म्यूनिसिपल एक्ट के तहत हुई है। जिस कारण उन्होंने एफआईआर को भी चुनौती दी हुई है। इस संबंध में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। निदेशालय को भी यही जवाब दिया गया है कि उनकी नियुक्ति में पीडब्ल्यूडी कोड लागू नहीं होता, इसीलिए उन पर एफआईआर भी गलत दर्ज की गई है। उनसे पहले तो उन सभी कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेवारी बनती है, जिन्होंने तकनीकी तौर पर सारा काम किया था। इसीलिए यदि कोई कार्रवाई बनती है तो पहले उन पर होनी चाहिए। सीमा कश्यप ने कहा कि उनकी तबीयत खराब है। इसीलिए वे विभाग मुख्यालय निजी तौर पर उपस्थित नहीं हो पाईं। उन्होंने लिखित जवाब भेज दिया है।
32 से 52 करोड़ पहुंच चुकी है सिटी स्कवेयर की लागत
हरियाणा की किसी भी नगर परिषद के पास सिटी स्कवेयर सबसे बड़े बजट का प्रोजेक्ट है। शुरू में इसका अनुमान 32 करोड़ रुपये लगाया गया था। लेकिन करीब 7 साल से यह लटका हुआ है। ऐसे में इसकी लागत अब रिवाइज एस्टिमेट के तहत 52 करोड़ रुपये आंकी गई है। रिवाईज एस्टिमेट के लिए फाइल नगर परिषद में जमा हो चुकी है। वहां से अप्रूवल के लिए डीसी द्वारा बैठक बुलाई जानी है। इसके पूरा हो जाने के बाद शहर से बैंकों के बाहर होने वाली यातायात जाम संबंधी समस्या का समाधान हो जाएगा।
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सिटी स्कवेयर मामले में विभाग के निदेशक ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस
नगर परिषद चेयरपर्सन सीमा कश्यप को विभाग के निदेशक ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। इसीलिए क्यों ना उन्हें सस्पेंड कर दिया जाए। इससे पूर्व निजी तौर पर हाजिर होकर अपना पक्ष रखें।
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विभाग मुख्यालय की अप्रूवल के बाद जारी किया गया था टेंडर
हाईकोर्ट के वकील के माध्यम से विभाग में दिए अपने लिखित जवाब में सीमा कश्यप ने कहा कि सिटी स्क्वेयर के टेंडर के लिए विभाग को अप्रूवल भेजी गई थी। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही इसका टेंडर जारी हुआ था। टेंडर प्रक्रिया में बिडस, डीएनआईटी व अन्य सभी कार्यों के लिए विभाग की ही अनुमति ली गई थी। साथ ही इसके टेंडर व डीएनआईटी की पूरी प्रक्रिया को विभाग की तकनीकी विंग द्वारा तैयार किया गया था। जिसमें जेई, एमई, एक्सईएन सहित अन्य अधिकारियों द्वारा तैयार करके उनके पास अनुमति के लिए आई थी, जब किसी भी अधिकारी द्वारा कोई सवाल नहीं उठाया गया तो उन्होंने भी उस पर सहमति दी थी। उन्हें तकनीकी जानकारी नहीं हैं। तकनीकी जानकारी में क्या खामी थी, क्या है या कोई खामी भी नहीं है। इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसलिए इस संबंध में उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
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जब पीडब्ल्यूडी कोड उन पर लागू ही नहीं होता तो एफआईआर क्यों?
चेयरपर्सन सीमा कश्यप के पिता सुरेश कश्यप ने कहा कि एफआईआर पीडब्ल्यूडी कोड को आधार बनाकर की गई है। जबकि चेयरपर्सन की नियुक्ति म्यूनिसिपल एक्ट के तहत हुई है। जिस कारण उन्होंने एफआईआर को भी चुनौती दी हुई है। इस संबंध में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। निदेशालय को भी यही जवाब दिया गया है कि उनकी नियुक्ति में पीडब्ल्यूडी कोड लागू नहीं होता, इसीलिए उन पर एफआईआर भी गलत दर्ज की गई है। उनसे पहले तो उन सभी कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेवारी बनती है, जिन्होंने तकनीकी तौर पर सारा काम किया था। इसीलिए यदि कोई कार्रवाई बनती है तो पहले उन पर होनी चाहिए। सीमा कश्यप ने कहा कि उनकी तबीयत खराब है। इसीलिए वे विभाग मुख्यालय निजी तौर पर उपस्थित नहीं हो पाईं। उन्होंने लिखित जवाब भेज दिया है।
32 से 52 करोड़ पहुंच चुकी है सिटी स्कवेयर की लागत
हरियाणा की किसी भी नगर परिषद के पास सिटी स्कवेयर सबसे बड़े बजट का प्रोजेक्ट है। शुरू में इसका अनुमान 32 करोड़ रुपये लगाया गया था। लेकिन करीब 7 साल से यह लटका हुआ है। ऐसे में इसकी लागत अब रिवाइज एस्टिमेट के तहत 52 करोड़ रुपये आंकी गई है। रिवाईज एस्टिमेट के लिए फाइल नगर परिषद में जमा हो चुकी है। वहां से अप्रूवल के लिए डीसी द्वारा बैठक बुलाई जानी है। इसके पूरा हो जाने के बाद शहर से बैंकों के बाहर होने वाली यातायात जाम संबंधी समस्या का समाधान हो जाएगा।