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यूरिया के लिए मच रही मारामारी, किसान हो रहे परेशान
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कैथल। जिले में यूरिया खाद की किल्लत लगातार बनी हुई है। सरकारी खरीद केंद्रों पर खाद की उपलब्धता न होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठंड में सरकारी खरीद केंद्रों के बाहर कतार लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद यूरिया नहीं मिल पा रही है। गेहूं की फसल में इन दिनों यूरिया की जरूरत है, लेकिन किसानों को आसानी से यूरिया उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
बुधवार को अनाज मंडी स्थित खाद केंद्र पर सुबह सात बजे ही सैकड़ों की संख्या में किसान यूरिया खाद लेने के लिए पहुंच गए थे। लेकिन, दोपहर तक इंतजार करने के बाद अधिसंख्य किसानों वापस खाली हाथ ही लौटना पड़ा। किसान सुरेश, राजू, पवन, शमशेर, गुरमीत, तेजी, रामफल, सुभाष, कृष्ण ने बताया कि वह सुबह सात बजे ही यूरिया खाद लेने के लिए मंडी में पहुंच गए थे। एक ट्रक यूरिया ही पहुंचा पाया। किसानों की संख्या अधिक होने के कारण किसानों को यूरिया नहीं मिल पाई। ज्यादातर किसानों को बिना खाद लिए मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि हर बार किसानों के साथ ऐसा ही होता है। जब डीएपी की जरूरत थी तो पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिली। उसकी जगह किसानों ने सुपर डालकर काम चलाया, लेकिन अब यूरिया की जरूरत है तो पर्याप्त यूरिया नहीं मिल रही। किसान अब यूरिया की जगह क्या डालें?
कृषि विभाग के एसडीओ सतीश नारा ने कहा कि यूरिया की कमी नहीं है। बुधवार को रैंक में 40 हजार कट्टे आए हैं। जो सभी जगह डीलरों को वितरित कर दिए गए हैं। सभी जमींदारों को पांच-पांच कट्टे वितरित किए जा रहे हैं। अब दो जनवरी को रैक आएगी तो यूरिया सभी सोसायटी में वितरित की जाएगी। पांच जनवरी तक सभी किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में खाद पहुंच जाएगी।
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बुधवार को अनाज मंडी स्थित खाद केंद्र पर सुबह सात बजे ही सैकड़ों की संख्या में किसान यूरिया खाद लेने के लिए पहुंच गए थे। लेकिन, दोपहर तक इंतजार करने के बाद अधिसंख्य किसानों वापस खाली हाथ ही लौटना पड़ा। किसान सुरेश, राजू, पवन, शमशेर, गुरमीत, तेजी, रामफल, सुभाष, कृष्ण ने बताया कि वह सुबह सात बजे ही यूरिया खाद लेने के लिए मंडी में पहुंच गए थे। एक ट्रक यूरिया ही पहुंचा पाया। किसानों की संख्या अधिक होने के कारण किसानों को यूरिया नहीं मिल पाई। ज्यादातर किसानों को बिना खाद लिए मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि हर बार किसानों के साथ ऐसा ही होता है। जब डीएपी की जरूरत थी तो पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिली। उसकी जगह किसानों ने सुपर डालकर काम चलाया, लेकिन अब यूरिया की जरूरत है तो पर्याप्त यूरिया नहीं मिल रही। किसान अब यूरिया की जगह क्या डालें?
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कृषि विभाग के एसडीओ सतीश नारा ने कहा कि यूरिया की कमी नहीं है। बुधवार को रैंक में 40 हजार कट्टे आए हैं। जो सभी जगह डीलरों को वितरित कर दिए गए हैं। सभी जमींदारों को पांच-पांच कट्टे वितरित किए जा रहे हैं। अब दो जनवरी को रैक आएगी तो यूरिया सभी सोसायटी में वितरित की जाएगी। पांच जनवरी तक सभी किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में खाद पहुंच जाएगी।
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