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लिंगानुपात में सुधार, जिले में एक साल में बढ़ीं 106 बेटियां
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Sun, 22 Jun 2014 11:58 PM IST
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कैथल। लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न संस्थाओं और प्रशासन की ओर से भ्रूण हत्या के खिलाफ चलाई गई मुहिम का असर कैथल में दिखने लगा है।
जिले में बेटियों की संख्या में इजाफा हुआ है। बीते साल मार्च तक जहां एक हजार लड़कों के मुकाबले 814 बेटियों ने जन्म लिया था, वहीं इस साल मार्च तक 106 की बढ़ोतरी के साथ 920 बेटियां पैदा हुईं। गौरतलब है कि लिंगानुपात सुधार में पूरे प्रदेश में कैथल तीसरे स्थान पर है।
पूरे प्रदेश में कैथल तीसरे स्थान पर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मासिक तौर पर एक रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसमें उस माह तक संबंधित वर्ष में लिंगानुपात का डाटा तैयार किया जाता है। इसी के अनुसार, पिछले साल मार्च 2013 में लिंगानुपात 814 था, जो इस वर्ष मार्च 2014 में बढ़कर 920 हो गया है। इसी तरह से एक साल के अंतराल में जिले में 1000 लड़कों के मुकाबले 106 का बढ़ोतरी के साथ 920 बेटियों ने जन्म लिया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना में लिंगानुपात 880 था।
लेकिन इसके बाद केवल वर्ष 2013 में एकत्रित डाटा में यह इससे भी कम 814 दर्ज किया गया था। गौरतलब है कि सुधार की इस कड़ी में अंबाला सबसे अव्वल तो मेवात दूसरे नंबर पर है। कैथल जिला मार्च माह की रिपोर्ट में तीसरे नंबर पर रहा है। अंबाला में 1000 लड़कों के मुकाबले 959 और मेवात में 932 बेटियों ने जन्म लिया है।
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सख्ती एवं जागरूकता अभियान का असर : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने कहा कि सख्ती एवं लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए गए अभियान का ही असर है कि जिले में लिंगानुपात में इतना सुधार हुआ है। यह आने वाले समय के लिए काफी सुखद संकेत है। उन्होंने कहा कि मार्च माह के बाद की रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि इसमें भी हमने काफी सुधार है।
‘संस्थागत डिलीवरी पर जोर’
सिविल सर्जन डा. गुप्ता ने कहा कि पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है। जिले में अवैध रूप से चल रहे गर्भपात केंद्र को बंद करवाया गया है। विभाग को जैसे ही शिकायत मिली है, तुरंत कार्रवाई की गई है। आगे भी यह सख्ती जारी रहेगी। इसके अलावा नियमित तौर पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की जाएगी। इसके साथ-साथ विभाग द्वारा संस्थागत डिलीवरी पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहे।
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जिले में बेटियों की संख्या में इजाफा हुआ है। बीते साल मार्च तक जहां एक हजार लड़कों के मुकाबले 814 बेटियों ने जन्म लिया था, वहीं इस साल मार्च तक 106 की बढ़ोतरी के साथ 920 बेटियां पैदा हुईं। गौरतलब है कि लिंगानुपात सुधार में पूरे प्रदेश में कैथल तीसरे स्थान पर है।
पूरे प्रदेश में कैथल तीसरे स्थान पर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मासिक तौर पर एक रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसमें उस माह तक संबंधित वर्ष में लिंगानुपात का डाटा तैयार किया जाता है। इसी के अनुसार, पिछले साल मार्च 2013 में लिंगानुपात 814 था, जो इस वर्ष मार्च 2014 में बढ़कर 920 हो गया है। इसी तरह से एक साल के अंतराल में जिले में 1000 लड़कों के मुकाबले 106 का बढ़ोतरी के साथ 920 बेटियों ने जन्म लिया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना में लिंगानुपात 880 था।
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लेकिन इसके बाद केवल वर्ष 2013 में एकत्रित डाटा में यह इससे भी कम 814 दर्ज किया गया था। गौरतलब है कि सुधार की इस कड़ी में अंबाला सबसे अव्वल तो मेवात दूसरे नंबर पर है। कैथल जिला मार्च माह की रिपोर्ट में तीसरे नंबर पर रहा है। अंबाला में 1000 लड़कों के मुकाबले 959 और मेवात में 932 बेटियों ने जन्म लिया है।
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सख्ती एवं जागरूकता अभियान का असर : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने कहा कि सख्ती एवं लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए गए अभियान का ही असर है कि जिले में लिंगानुपात में इतना सुधार हुआ है। यह आने वाले समय के लिए काफी सुखद संकेत है। उन्होंने कहा कि मार्च माह के बाद की रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि इसमें भी हमने काफी सुधार है।
‘संस्थागत डिलीवरी पर जोर’
सिविल सर्जन डा. गुप्ता ने कहा कि पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जा रहा है। जिले में अवैध रूप से चल रहे गर्भपात केंद्र को बंद करवाया गया है। विभाग को जैसे ही शिकायत मिली है, तुरंत कार्रवाई की गई है। आगे भी यह सख्ती जारी रहेगी। इसके अलावा नियमित तौर पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की जाएगी। इसके साथ-साथ विभाग द्वारा संस्थागत डिलीवरी पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहे।