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Kaithal News: पिता लगाते हैं चाय का खोखा, खुशी ने जूडो में रचा सफलता का नया अध्याय
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कैथल। चंदाना गेट पर चाय का खोखा लगाने वाले परिवार की बेटी खुशी ने मेहनत और हौसले के दम पर खेल की दुनिया में अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली खुशी ने राज्य स्तरीय जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर नेशनल स्कूल अंडर-17 प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया है।
खुशी इससे पहले एशियन गेम्स यूथ में कुराश में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वहीं एशियन चैंपियनशिप कुराश में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। करीब दो महीने पहले चंडीगढ़ में हुई कैडेट नेशनल प्रतियोगिता में भी खुशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया था। अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतकर उन्होंने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
खुशी का कहना है कि उनका सपना कॉमनवेल्थ गेम और ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना है। वह अपनी जीत और उपलब्धियों का श्रेय जूडो कोच जोगिंद्र सिंह और कोच व डीपीई संदीप कुमार को देती हैं। खुशी के अनुसार प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास ने उसे बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास दिया है।
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कोच जोगिंद्र सिंह ने बताया कि खुशी कठिन परिस्थितियों के बावजूद अभ्यास में कोई कमी नहीं छोड़ती। वह नियमित रूप से सुबह और शाम दोनों समय मैदान में पहुंचकर अभ्यास करती है। उन्होंने कहा कि यही मेहनत और खेल के प्रति उसका समर्पण उसे लगातार नई उपलब्धियों की ओर ले जा रहा है। कोच को भरोसा है कि आने वाले समय में खुशी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जिले का नाम रोशन करेगी।
परिवार की सीमित आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद खुशी का हौसला बड़ा है। चाय के खोखे से घर चलाने वाले माता-पिता की बेटी अब खेल के मैदान में अपने प्रदर्शन से यह संदेश दे रही है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और मेहनत के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।
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खुशी इससे पहले एशियन गेम्स यूथ में कुराश में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वहीं एशियन चैंपियनशिप कुराश में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। करीब दो महीने पहले चंडीगढ़ में हुई कैडेट नेशनल प्रतियोगिता में भी खुशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया था। अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतकर उन्होंने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
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खुशी का कहना है कि उनका सपना कॉमनवेल्थ गेम और ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना है। वह अपनी जीत और उपलब्धियों का श्रेय जूडो कोच जोगिंद्र सिंह और कोच व डीपीई संदीप कुमार को देती हैं। खुशी के अनुसार प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास ने उसे बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास दिया है।
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कोच जोगिंद्र सिंह ने बताया कि खुशी कठिन परिस्थितियों के बावजूद अभ्यास में कोई कमी नहीं छोड़ती। वह नियमित रूप से सुबह और शाम दोनों समय मैदान में पहुंचकर अभ्यास करती है। उन्होंने कहा कि यही मेहनत और खेल के प्रति उसका समर्पण उसे लगातार नई उपलब्धियों की ओर ले जा रहा है। कोच को भरोसा है कि आने वाले समय में खुशी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जिले का नाम रोशन करेगी।
परिवार की सीमित आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद खुशी का हौसला बड़ा है। चाय के खोखे से घर चलाने वाले माता-पिता की बेटी अब खेल के मैदान में अपने प्रदर्शन से यह संदेश दे रही है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और मेहनत के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।