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Kaithal News: दूध बेचकर पिता ने गढ़ी चैंपियन
Mon, 08 Dec 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 08 Dec 2025 12:42 AM IST
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07kht_8_कोच अमरजीत के साथ बाक्सिंग खिलाड़ी जन्नत
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के गांव कुलतारन की 16 वर्षीय जन्नत आज देश की उभरती हुई बॉक्सिंग स्टार बन चुकी है। साधारण परिवार में जन्मी जन्नत ने असाधारण हौसलों के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिता राजीव कुमार दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं, लेकिन संसाधनों की कमी कभी भी जन्नत के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकी।
जन्नत को पहलवानी और मुक्केबाजी के संस्कार बचपन से ही मिले। हाल ही में उसने एशियन सब-जूनियर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 52 से 54 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर विदेशी धरती पर भारत का परचम लहराया। मुकाबले के दौरान जन्नत ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी पर ताबड़तोड़ पंचों की बौछार कर निर्णायक बढ़त बनाई।
गांव कुलतारन की यह होनहार बेटी पिछले चार वर्षों से लगातार पदक जीत रही है। उसने देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इससे पहले जन्नत ने जॉर्डन में आयोजित बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता था। अब वह अगले वर्ष अक्टूबर में होने वाले यूथ ओलंपिक की तैयारियों में जुटी हुई है।
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जन्नत बताती है कि उसका सपना ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है और इसी लक्ष्य को लेकर वह रोजाना इंडोर स्टेडियम में घंटों पसीना बहा रही है। उसने अपने बॉक्सिंग करियर की शुरुआत तीन वर्ष पहले गांव के ही कोच अमरजीत से ट्रायल देकर की थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि साधारण है। परिवार में दो बहनें और एक छोटा भाई है। कोच अमरजीत बताते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता जन्नत के लिए आसान नहीं था। समाज की संकीर्ण सोच को दरकिनार करते हुए उसने लगातार मेहनत जारी रखी और कभी भी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई।
सबसे खास बात यह है कि जन्नत ने खेल के साथ-साथ पढ़ाई को भी पूरी गंभीरता से जारी रखा। वह वर्तमान में शहर के जाट स्कूल में 12वीं कक्षा की छात्रा है। आमतौर पर खिलाड़ी पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं, लेकिन जन्नत ने इस धारणा को भी तोड़कर खेल और शिक्षा के बीच शानदार संतुलन बनाया है।
अपने जबरदस्त पंच और आत्मविश्वास के दम पर उसने जिला, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। अपनी सफलता का श्रेय वह अपने पिता की कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग को देती है। आगे चलकर वह देश के लिए और भी बड़े अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है।
कोच का बयान
जन्नत में शुरू से ही जीतने का जज़्बा था। उसे देखकर कभी नहीं लगा कि वह डरती है। उसमें सीखने की ललक और आगे बढ़ने की भूख है। मुझे उस पर गर्व है कि वह आज इस मुकाम पर पहुंची है। -अमरजीत, बॉक्सिंग कोच, कुलतारन
जन्नत की प्रमुख उपलब्धियां
एशियन अंडर-17 बॉक्सिंग चैंपियनशिप, जॉर्डन ः स्वर्ण पदक
स्कूल नेशनल, दिल्ली 2024 ः स्वर्ण पदक
खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 ः कांस्य पदक
जूनियर स्टेट चैंपियनशिप, रोहतक 2025 ः स्वर्ण पदक
स्कूल स्टेट, रोहतक 2024 ः स्वर्ण पदक
जूनियर स्टेट, हिसार 2024 ः रजत पदक
खेल महाकुंभ, रोहतक ः स्वर्ण पदक
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कैथल। जिले के गांव कुलतारन की 16 वर्षीय जन्नत आज देश की उभरती हुई बॉक्सिंग स्टार बन चुकी है। साधारण परिवार में जन्मी जन्नत ने असाधारण हौसलों के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिता राजीव कुमार दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं, लेकिन संसाधनों की कमी कभी भी जन्नत के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकी।
जन्नत को पहलवानी और मुक्केबाजी के संस्कार बचपन से ही मिले। हाल ही में उसने एशियन सब-जूनियर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 52 से 54 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर विदेशी धरती पर भारत का परचम लहराया। मुकाबले के दौरान जन्नत ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी पर ताबड़तोड़ पंचों की बौछार कर निर्णायक बढ़त बनाई।
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गांव कुलतारन की यह होनहार बेटी पिछले चार वर्षों से लगातार पदक जीत रही है। उसने देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इससे पहले जन्नत ने जॉर्डन में आयोजित बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता था। अब वह अगले वर्ष अक्टूबर में होने वाले यूथ ओलंपिक की तैयारियों में जुटी हुई है।
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जन्नत बताती है कि उसका सपना ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है और इसी लक्ष्य को लेकर वह रोजाना इंडोर स्टेडियम में घंटों पसीना बहा रही है। उसने अपने बॉक्सिंग करियर की शुरुआत तीन वर्ष पहले गांव के ही कोच अमरजीत से ट्रायल देकर की थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि साधारण है। परिवार में दो बहनें और एक छोटा भाई है। कोच अमरजीत बताते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता जन्नत के लिए आसान नहीं था। समाज की संकीर्ण सोच को दरकिनार करते हुए उसने लगातार मेहनत जारी रखी और कभी भी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई।
सबसे खास बात यह है कि जन्नत ने खेल के साथ-साथ पढ़ाई को भी पूरी गंभीरता से जारी रखा। वह वर्तमान में शहर के जाट स्कूल में 12वीं कक्षा की छात्रा है। आमतौर पर खिलाड़ी पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं, लेकिन जन्नत ने इस धारणा को भी तोड़कर खेल और शिक्षा के बीच शानदार संतुलन बनाया है।
अपने जबरदस्त पंच और आत्मविश्वास के दम पर उसने जिला, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। अपनी सफलता का श्रेय वह अपने पिता की कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग को देती है। आगे चलकर वह देश के लिए और भी बड़े अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है।
कोच का बयान
जन्नत में शुरू से ही जीतने का जज़्बा था। उसे देखकर कभी नहीं लगा कि वह डरती है। उसमें सीखने की ललक और आगे बढ़ने की भूख है। मुझे उस पर गर्व है कि वह आज इस मुकाम पर पहुंची है। -अमरजीत, बॉक्सिंग कोच, कुलतारन
जन्नत की प्रमुख उपलब्धियां
एशियन अंडर-17 बॉक्सिंग चैंपियनशिप, जॉर्डन ः स्वर्ण पदक
स्कूल नेशनल, दिल्ली 2024 ः स्वर्ण पदक
खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 ः कांस्य पदक
जूनियर स्टेट चैंपियनशिप, रोहतक 2025 ः स्वर्ण पदक
स्कूल स्टेट, रोहतक 2024 ः स्वर्ण पदक
जूनियर स्टेट, हिसार 2024 ः रजत पदक
खेल महाकुंभ, रोहतक ः स्वर्ण पदक