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किसानों ने की स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Tue, 07 Mar 2017 12:13 AM IST
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आयोजित की गई किसान रैली
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हुडा सेेक्टर-20 में किसान महासंघ द्वारा आयोजित किसान बचाओ रैली में देशभर से किसानों ने भाग लिया। रैली की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष पाला राम गौड़ ने की। रैली में किसानों ने सरकार की वादा खिलाफ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रैली में किसान नेताओं ने बड़े आंदोलन का शंखनाथ करते हुए 9 अगस्त को देश में एक-एक घंटे के लिए नेशनल हाईवे जाम करने का फैसला गया। इसकेे बाद भी अगर सरकार ने किसानों की मांगें नहीं मानी तो 23 जनवरी को देश भर के रेलवे ट्रक को जाम कर दिया जाएगा और किसान तब तक रेलवे व नेशनल हाईवे से नहीं उठेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती है।
किसान रैली को संबोधित करते हुए किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष शमशेर सिंह दहिया, कर्म सिंह मथाना, सेवा सिंह आर्य, सुरेश कौथ जसबीर भट्ठी ने कहा कि किसान भारी आर्थिक मंदी की हालत में है और खेती छोड़ने को मजबूर हो चुका है। इस मजबूरी की हालत में देश का किसान आत्महत्या कर रहा है। इस सरकार में किसानों की आत्महत्या का ग्राफ भारत 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। 2004 में केंद्र सरकार ने किसानों की हालत जानने के लिए किसान आयोग का गठन किया था। जब से सरकार ने इस आयोग को लागू किया। तब से लेकर किसानों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। 2014 में देश के प्रधानमंत्री ने चुनावी रैलियों व चुनावी घोषणा-पत्र में खुले मंच से भारत के किसानों की स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। प्रधानमंत्री ने रैलियों में कहा था कि अगर केंद्र में मेरी सरकार आती है तो उसको मैं तुरंत प्रभाव से लागू करूंगा। किसानों को लागत मूल्यों का 50 प्रतिशत भाव दूंगा। किसान नेताओं ने कहा कि अगर 2007 से स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाती है तो किसानों को किसी प्रकार का कोई कर्जा नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना के तहत किसानों के खातों से बीमे के नाम पर जबरन पैसे काटे जा रहे है। यह योजना केवल बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए है।
रैली को-मध्यप्रदेश से शिव कुमार शर्मा, मध्यप्रदेश से केदार सिरोही, केवी बिजु, महेंद्र शर्मा उत्तर प्रदेश, पारस नाथ साहु छतीसगढ़, बजरंग सिंह बराला राजस्थान, विरेन्द्र पांडे छत्तीसगढ़, अबुल कलाम बिहार, हरपाल सिंह उत्तर प्रदेश, गुणवंत पाटिल महाराष्ट्र रविदत्त मध्यप्रदेश, हरमीत पंजाब सहित कई किसान नेताओं ने रैली को संबोधित किया। कर्नाटक से आए किसान नेता ने अपनी भाषा में भाषण दिया। जिसे समझाने के लिए दुभाषिये का प्रयोग किया गया।
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50 किसान संगठनों ने एकत्रित होकर बनाया किसान महासंघ-सरकार से मांगे मनवाने के लिए 50 संगठनों से एकत्रित होकर किसान महासंघ का संगठन किया। जिसमें सरकार ने केवल तीन ही मांगों पर बातचीत होगी। जिसको लेकर 18 भाषाओं में आंदोलन की तैयारियों को लेकर बैनर तैयार किए गए। इस अवसर पर रैली में पहुंचे लोगों के लिए अलग से देशी घी, शक्कर, चावल व सब्जी-रोटी का खुला भंडारा लगाया गया।
आंदोलन का लिया फैसला-किसान नेताओं ने फैसला लिया है कि अगर सरकार ने उनकी तीनों मांगों को पूरा नहीं किया तो 9 अगस्त को एक घंटे के लिए रेलवे व नेशनल हाईवे पर एक-एक घंटे का जाम लगाकर चेतावानी दी जाएगी। पूरे देश के किसान इसमें भाग लेंगे। इसके बाद सरकार के खिलाफ आर-पार की आंदोलन को लेकर 23 जनवरी को देश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जिसमें देश के सभी रेलवे व नेशनल हाईवे का जाम कर दिया जाएगा। चाहे किसानों को इसके लिए कोई भी कुर्बानी देनी पड़े।
यह है किसानों की तीन मुख्य मांगे-
1. देश में एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाली रिपोर्ट लागू करवाई जाए।
2. पूरे देश के किसानों को कर्जा मुफ्त किया जाए।
3. हरियाणा से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बंद किया जाए।
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किसान रैली को संबोधित करते हुए किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष शमशेर सिंह दहिया, कर्म सिंह मथाना, सेवा सिंह आर्य, सुरेश कौथ जसबीर भट्ठी ने कहा कि किसान भारी आर्थिक मंदी की हालत में है और खेती छोड़ने को मजबूर हो चुका है। इस मजबूरी की हालत में देश का किसान आत्महत्या कर रहा है। इस सरकार में किसानों की आत्महत्या का ग्राफ भारत 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है। 2004 में केंद्र सरकार ने किसानों की हालत जानने के लिए किसान आयोग का गठन किया था। जब से सरकार ने इस आयोग को लागू किया। तब से लेकर किसानों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। 2014 में देश के प्रधानमंत्री ने चुनावी रैलियों व चुनावी घोषणा-पत्र में खुले मंच से भारत के किसानों की स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। प्रधानमंत्री ने रैलियों में कहा था कि अगर केंद्र में मेरी सरकार आती है तो उसको मैं तुरंत प्रभाव से लागू करूंगा। किसानों को लागत मूल्यों का 50 प्रतिशत भाव दूंगा। किसान नेताओं ने कहा कि अगर 2007 से स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाती है तो किसानों को किसी प्रकार का कोई कर्जा नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना के तहत किसानों के खातों से बीमे के नाम पर जबरन पैसे काटे जा रहे है। यह योजना केवल बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए है।
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रैली को-मध्यप्रदेश से शिव कुमार शर्मा, मध्यप्रदेश से केदार सिरोही, केवी बिजु, महेंद्र शर्मा उत्तर प्रदेश, पारस नाथ साहु छतीसगढ़, बजरंग सिंह बराला राजस्थान, विरेन्द्र पांडे छत्तीसगढ़, अबुल कलाम बिहार, हरपाल सिंह उत्तर प्रदेश, गुणवंत पाटिल महाराष्ट्र रविदत्त मध्यप्रदेश, हरमीत पंजाब सहित कई किसान नेताओं ने रैली को संबोधित किया। कर्नाटक से आए किसान नेता ने अपनी भाषा में भाषण दिया। जिसे समझाने के लिए दुभाषिये का प्रयोग किया गया।
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50 किसान संगठनों ने एकत्रित होकर बनाया किसान महासंघ-सरकार से मांगे मनवाने के लिए 50 संगठनों से एकत्रित होकर किसान महासंघ का संगठन किया। जिसमें सरकार ने केवल तीन ही मांगों पर बातचीत होगी। जिसको लेकर 18 भाषाओं में आंदोलन की तैयारियों को लेकर बैनर तैयार किए गए। इस अवसर पर रैली में पहुंचे लोगों के लिए अलग से देशी घी, शक्कर, चावल व सब्जी-रोटी का खुला भंडारा लगाया गया।
आंदोलन का लिया फैसला-किसान नेताओं ने फैसला लिया है कि अगर सरकार ने उनकी तीनों मांगों को पूरा नहीं किया तो 9 अगस्त को एक घंटे के लिए रेलवे व नेशनल हाईवे पर एक-एक घंटे का जाम लगाकर चेतावानी दी जाएगी। पूरे देश के किसान इसमें भाग लेंगे। इसके बाद सरकार के खिलाफ आर-पार की आंदोलन को लेकर 23 जनवरी को देश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जिसमें देश के सभी रेलवे व नेशनल हाईवे का जाम कर दिया जाएगा। चाहे किसानों को इसके लिए कोई भी कुर्बानी देनी पड़े।
यह है किसानों की तीन मुख्य मांगे-
1. देश में एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाली रिपोर्ट लागू करवाई जाए।
2. पूरे देश के किसानों को कर्जा मुफ्त किया जाए।
3. हरियाणा से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बंद किया जाए।