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बीमा फसल योजना किसानों के हित में नहीं : हाबड़ी
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 29 Jul 2016 12:44 AM IST
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फसल बीमा योजना का विरोध
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फसल बीमा योजना किसी भी तरह से किसान हित मेें नहीं है और ये किसानों को नहीं बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। यह बातें भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी ने पूंडरी में किसानों की एक बैठक में कही।
हलके के कई गांवों का दौरा करने के बाद पूंडरी में बैठक के दौरान हाबड़ी ने कहा कि भाकियू का प्रतिनिधिमंडल क्षेत्र के सभी गांवों में घूमकर लोगों को जागरूक कर रहा है। यदि सरकार ने बीमा योजना लागू करने में किसानों के साथ जबरदस्ती की तो भाकियू इसका डटकर विरोध करेगी और इसी मुद्दे पर 2 अगस्त को करनाल में किसानों की एक बड़ी बैठक कर वहां के उपायुक्त को ज्ञापन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि साजिश के तहत किसानों को प्राइवेट कंपनियों के हाथों में दिया जा रहा है और सरकार किसानों से पल्ला झाड़ रही है।
जब एक एकड़ को इकाई नहीं माना जाता तब तक किसानों को इस बीमा योजना का कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। प्रदेश कोषाध्यक्ष सुखविंद्र खारा ने कहा कि यदि सरकार किसानों को लाभ पहुंचाना चाहती है तो किसान हित में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट का लागू करे। इस मौके पर जिला प्रधान बलवान पाई, पालाराम संगरौली, करताराराम, मांगाराम, भागाराम, ओमप्रकाश, सूरजभान, सुरेश पंडीर व चंद्रभान सहित कई किसान मौजूद रहे।
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हलके के कई गांवों का दौरा करने के बाद पूंडरी में बैठक के दौरान हाबड़ी ने कहा कि भाकियू का प्रतिनिधिमंडल क्षेत्र के सभी गांवों में घूमकर लोगों को जागरूक कर रहा है। यदि सरकार ने बीमा योजना लागू करने में किसानों के साथ जबरदस्ती की तो भाकियू इसका डटकर विरोध करेगी और इसी मुद्दे पर 2 अगस्त को करनाल में किसानों की एक बड़ी बैठक कर वहां के उपायुक्त को ज्ञापन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि साजिश के तहत किसानों को प्राइवेट कंपनियों के हाथों में दिया जा रहा है और सरकार किसानों से पल्ला झाड़ रही है।
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जब एक एकड़ को इकाई नहीं माना जाता तब तक किसानों को इस बीमा योजना का कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। प्रदेश कोषाध्यक्ष सुखविंद्र खारा ने कहा कि यदि सरकार किसानों को लाभ पहुंचाना चाहती है तो किसान हित में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट का लागू करे। इस मौके पर जिला प्रधान बलवान पाई, पालाराम संगरौली, करताराराम, मांगाराम, भागाराम, ओमप्रकाश, सूरजभान, सुरेश पंडीर व चंद्रभान सहित कई किसान मौजूद रहे।
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