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मुआवजे के लिए चंडीगढ़-हिसार हाईवे जाम किया
अमर उजाला ब्यूरो/कैथ्ाल
Updated Fri, 24 Jul 2015 12:05 AM IST
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कैथल-अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर बाईपास के लिए अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा बढ़ाने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों ने वीरवार को तितरम मोड़ पर हाईवे जाम कर दिया। किसानों ने प्रशासन को वीरवार तक का अल्टीमेटम दिया था कि वह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से समय लेकर मुलाकात करवाए। वीरवार को धरने के तीसरे दिन किसानों ने हाईवे पर आवाजाही रोक दी। सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी आने-जाने वाले वाहन चालकों और यात्रियों को भारी परेशानी हुई। उन्हें लिंक मार्गों से निकाला गया।
ये है मामला
राष्ट्रीय राजमार्ग कैथल-अंबाला-चंडीगढ़ के लिए कैथल में बाईपास बनेगा। कैथल में बाईपास के लिए करीब 200 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है। किसानों को प्रति एकड़ 27 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है। लेकिन किसान अब 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मांग रहे हैं। किसानों ने प्रशासन को 23 जुलाई तक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत करवाने का अल्टीमेटम दिया था।
वीरवार को कोई बातचीत न करवाए जाने पर किसानों ने जाम लगा दिया। किसानों ने हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी कर दी। जींद, हिसार एवं कैथल की ओर आने-जाने वाले तीनों मुख्य मार्गों पर जाम लगा दिया। यूनियन के प्रधान गुरनाम चढुनी, कर्मवीर सेगा, भूरा राम पबनावा, सुरेश कोथ, कांग्रेसी नेता रणवीर मान उर्फ बोबी मान, पूर्व संसदीय सचिव रामपाल माजरा, किसान नेता धर्मपाल छोत, महिला नेता संतरों देवी के नेतृत्व में तितरम मोड पर जाम लगाकर बैठ गए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों की अनदेखी कर रही है।
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‘जब नोटिफिकेशन हुआ उस समय मार्केट रेट अलग थे’
गुहला-चीका के एसडीएम बीर सिंह कालीरामण, कैथल एसडीएम आरके सिंह ने तितरम मोड पर पहुंच कर किसानों की संघर्ष समिति से बातचीत की। समिति ने उन्हें अपनी मांगों के बारे में अवगत करवाया। किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह व समिति के सदस्यों ने बताया कि हमारी एक ही मांग है। वर्ष 2013 में जो नोटिफिकेशन जारी हुआ था, उस सम जमीन का जो मार्केट रेट था, उस हिसाब से दो गुणा कीमत ब्याज सहित दी जाए। कलेक्टर रेट के हिसाब से मुआवजा मंजूर नहीं है।
साथ ही शहर से पांच किलोमीटर दूरी के हिसाब से नापते हुए हर पांच किलोमीटर पर मुआवजे में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। इस मार्ग के लिए गांव तितरम, प्यौदा, नरड़, बेगपुर, क्योड़क, उझाना सहित 2 अन्य गांवों की जमीन का अधिग्रहण हुआ है। उन्हें 27 लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका जाम जारी रहेगा।
पंखे, गद्दे और पूरी तैयारी के साथ सड़क पर डटे किसान
किसान पूरी तैयारी के साथ सड़क पर आ डटे हैं। सड़क पर शामियाना लगा लिया गया है। गर्मी से बचने के लिए अनाज साफ करने वाला पंखा चलाया जा रहा है। साथ ही सड़क पर बैठने के लिए गद्दों का प्रबंध किया गया है। उधर, धरने में भारी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। महिलाओं का कहना है कि वे अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगी। संतरों ने कहा कि हम कोई अमीर पिता की औलाद नहीं, जो गर्मी व धूप से डर जायेंगे। हमने गर्मी और धूप में ही जिंदगी गुजारी है। कलायत विधायक जय प्रकाश ने कहा कि उन्होंने इस संबंध मेें केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह से बातचीत कर किसानों की समस्या का समाधान करने का आग्रह किया है।
प्रशासन से किसानों की वार्ता विफल
किसानों ने वीरवार को 12 बजकर 26 मिनट पर जाम लगाया। इसके बाद पौने दो बजे गुहला एसडीएम बीएस कालीरमण पहुंचे। उन्होंने किसानों के पांच नेताओं को वार्तालाप के लिए बुलाया। गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कुमार कौथ, धर्मपाल छौत, सुलतान सिंह व कर्मवीर सेगा एवं डीएसपी टेकनराज, गुहला एसडीएम कसे बीच करीब 20 मिनट वार्तालाप चली, लेकिन वार्ता विफल हो गई। किसानों ने जाम नहीं खोला।
माजरा ने कहा, किसानों की मांगें माने सरकार
धरने पर बैठे किसानों का पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने समर्थन किया। धरने में शामिल होकर माजरा ने उनकी मांगों को जायज बताते हुए कहा कि मेहनतकश किसान जब अपने खेती किसानी के कामकाज छोड़कर सड़क पर बैठने पर मजबूर होता है, तो उसके पीछे उसकी मांग वास्तव में जायज होती। इसे सरकार को तुरंत मान लेना चाहिए।
स्वराज अभियान ने भी दिया समर्थन
स्वराज अभियान ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। अभियान के जिला प्रभारी सुरेन्द्र चुघ एडवोकेट ने बताया कि किसानों के आंदोलन के समर्थन में स्वराज अभियान की ओर से कलश यात्रा निकाली जाएगी। जो पंजाब से शुरू होकर हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। चुघ ने बताया कि जिला के किसानों के सर्मथन में 23 जुलाई को योगेंद्र यादव ने आना था, मगर आयोजकों के एक गुट की आपत्ति के कारण वे नहीं आ सके।
डीसी ने की जाम खोलने की अपील
डीसी के मकरंद पांडुरंग ने किसानों से जाम खोलने की अपील की है। डीसी ने कहा कि प्रशासन ने मुआवजा राशि में बढ़ोत्तरी की मांग पहले ही सरकार को भेज दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना या रास्ता जाम जनहित में नहीं है। इससे आम जनता को परेशानी होती है। कुछ शरारती तत्व इस धरने की आड़ में अपना स्वार्थ पूरा करना चाहते हैं, जो कि गलत है। धरना तुरंत खत्म करें तथा आम नागरिक की सुविधा का ध्यान रखें।
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ये है मामला
राष्ट्रीय राजमार्ग कैथल-अंबाला-चंडीगढ़ के लिए कैथल में बाईपास बनेगा। कैथल में बाईपास के लिए करीब 200 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है। किसानों को प्रति एकड़ 27 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है। लेकिन किसान अब 2 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मांग रहे हैं। किसानों ने प्रशासन को 23 जुलाई तक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत करवाने का अल्टीमेटम दिया था।
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वीरवार को कोई बातचीत न करवाए जाने पर किसानों ने जाम लगा दिया। किसानों ने हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी कर दी। जींद, हिसार एवं कैथल की ओर आने-जाने वाले तीनों मुख्य मार्गों पर जाम लगा दिया। यूनियन के प्रधान गुरनाम चढुनी, कर्मवीर सेगा, भूरा राम पबनावा, सुरेश कोथ, कांग्रेसी नेता रणवीर मान उर्फ बोबी मान, पूर्व संसदीय सचिव रामपाल माजरा, किसान नेता धर्मपाल छोत, महिला नेता संतरों देवी के नेतृत्व में तितरम मोड पर जाम लगाकर बैठ गए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों की अनदेखी कर रही है।
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‘जब नोटिफिकेशन हुआ उस समय मार्केट रेट अलग थे’
गुहला-चीका के एसडीएम बीर सिंह कालीरामण, कैथल एसडीएम आरके सिंह ने तितरम मोड पर पहुंच कर किसानों की संघर्ष समिति से बातचीत की। समिति ने उन्हें अपनी मांगों के बारे में अवगत करवाया। किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह व समिति के सदस्यों ने बताया कि हमारी एक ही मांग है। वर्ष 2013 में जो नोटिफिकेशन जारी हुआ था, उस सम जमीन का जो मार्केट रेट था, उस हिसाब से दो गुणा कीमत ब्याज सहित दी जाए। कलेक्टर रेट के हिसाब से मुआवजा मंजूर नहीं है।
साथ ही शहर से पांच किलोमीटर दूरी के हिसाब से नापते हुए हर पांच किलोमीटर पर मुआवजे में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। इस मार्ग के लिए गांव तितरम, प्यौदा, नरड़, बेगपुर, क्योड़क, उझाना सहित 2 अन्य गांवों की जमीन का अधिग्रहण हुआ है। उन्हें 27 लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका जाम जारी रहेगा।
पंखे, गद्दे और पूरी तैयारी के साथ सड़क पर डटे किसान
किसान पूरी तैयारी के साथ सड़क पर आ डटे हैं। सड़क पर शामियाना लगा लिया गया है। गर्मी से बचने के लिए अनाज साफ करने वाला पंखा चलाया जा रहा है। साथ ही सड़क पर बैठने के लिए गद्दों का प्रबंध किया गया है। उधर, धरने में भारी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। महिलाओं का कहना है कि वे अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगी। संतरों ने कहा कि हम कोई अमीर पिता की औलाद नहीं, जो गर्मी व धूप से डर जायेंगे। हमने गर्मी और धूप में ही जिंदगी गुजारी है। कलायत विधायक जय प्रकाश ने कहा कि उन्होंने इस संबंध मेें केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह से बातचीत कर किसानों की समस्या का समाधान करने का आग्रह किया है।
प्रशासन से किसानों की वार्ता विफल
किसानों ने वीरवार को 12 बजकर 26 मिनट पर जाम लगाया। इसके बाद पौने दो बजे गुहला एसडीएम बीएस कालीरमण पहुंचे। उन्होंने किसानों के पांच नेताओं को वार्तालाप के लिए बुलाया। गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कुमार कौथ, धर्मपाल छौत, सुलतान सिंह व कर्मवीर सेगा एवं डीएसपी टेकनराज, गुहला एसडीएम कसे बीच करीब 20 मिनट वार्तालाप चली, लेकिन वार्ता विफल हो गई। किसानों ने जाम नहीं खोला।
माजरा ने कहा, किसानों की मांगें माने सरकार
धरने पर बैठे किसानों का पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने समर्थन किया। धरने में शामिल होकर माजरा ने उनकी मांगों को जायज बताते हुए कहा कि मेहनतकश किसान जब अपने खेती किसानी के कामकाज छोड़कर सड़क पर बैठने पर मजबूर होता है, तो उसके पीछे उसकी मांग वास्तव में जायज होती। इसे सरकार को तुरंत मान लेना चाहिए।
स्वराज अभियान ने भी दिया समर्थन
स्वराज अभियान ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। अभियान के जिला प्रभारी सुरेन्द्र चुघ एडवोकेट ने बताया कि किसानों के आंदोलन के समर्थन में स्वराज अभियान की ओर से कलश यात्रा निकाली जाएगी। जो पंजाब से शुरू होकर हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। चुघ ने बताया कि जिला के किसानों के सर्मथन में 23 जुलाई को योगेंद्र यादव ने आना था, मगर आयोजकों के एक गुट की आपत्ति के कारण वे नहीं आ सके।
डीसी ने की जाम खोलने की अपील
डीसी के मकरंद पांडुरंग ने किसानों से जाम खोलने की अपील की है। डीसी ने कहा कि प्रशासन ने मुआवजा राशि में बढ़ोत्तरी की मांग पहले ही सरकार को भेज दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना या रास्ता जाम जनहित में नहीं है। इससे आम जनता को परेशानी होती है। कुछ शरारती तत्व इस धरने की आड़ में अपना स्वार्थ पूरा करना चाहते हैं, जो कि गलत है। धरना तुरंत खत्म करें तथा आम नागरिक की सुविधा का ध्यान रखें।