{"_id":"65245c304ebc2fb10f017a57","slug":"farmers-have-become-aware-of-stubble-management-kaithal-news-c-245-1-kht1001-5611-2023-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक हुए हैं किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक हुए हैं किसान
Tue, 10 Oct 2023 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 10 Oct 2023 01:31 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन/ कैथल। प्रदेश में पराली का निपटारा करना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। इसके निपटारे को लेकर सरकार की ओर से भी कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। अधिकांश किसान जागरूकता के अभाव में पराली को जलाकर नष्ट कर देते हैं। इसके कारण वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ किसानों ने पराली का समाधान ढूंढ लिया हैै। किसान अब पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक हुए हैं। पराली प्रबंधन को लेकर सीवन के प्रगतिशील किसानों ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के तहत बातचीत की।
आग न लगे इसके लिए करते हैं खेतों की रखवाली
किसान सुरेश सरदाना ने बताया कि पराली में आग जलाने की घटनाओं के कारण यहां पर दिन में सड़कों पर धुंध छा जाती थी। इस कारण सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो जाता है। इससे दुर्घटनाओं का भी भय बना रहता है। किसानों को आग लगाने के बाद अपने खेतों में बैठ कर रखवाली भी करनी पड़ती है कि कहीं आग फैल न जाए। सरकार की तरफ से फसल अवशेष प्रबंधन के कई उपाय किए गए हैं। इन उपायों के अब सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं।
बंडल बनवाकर फसल अवशेषों के निपटान में जुटे
संगीत बंसल ने बताया कि किसान पराली के बंडल बनवाकर फसल अवशेषों के निपटान में जुटे हैं। इससे सभी को फायदा हो रहा है। इतना ही नहीं किसान अब तो अपील करने लगे हैं कि कोई भी किसान फसल अवशेषों को जलाने की बजाए फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को अपनाएं। किसान इन तरीकों को अपना कर आर्थिक लाभ भी कमा सकते हैं।
विज्ञापन
फसल अवशेष न जलाकर पर्यावरण बचाने का दे रहे संदेश
गुरदयाल मलिकपुर ने बताया कि पराली निस्तारण के लिए इस साल प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट रखा है। किसानों को कृषि यंत्र मुहैया कराए जा रहे हैं, जिसके जरिये वे आसानी से पराली को बिना जलाए ही खेतों में मिलाकर उर्वरा शक्ति बढ़ा रहे हैं। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसान आगे आ रहे हैं। खेतों में फसल अवशेष न जलाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे है। इससे किसान जागरूक हो रहे हैं और प्रशासन का सहयोग भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
सीवन/ कैथल। प्रदेश में पराली का निपटारा करना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। इसके निपटारे को लेकर सरकार की ओर से भी कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। अधिकांश किसान जागरूकता के अभाव में पराली को जलाकर नष्ट कर देते हैं। इसके कारण वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ किसानों ने पराली का समाधान ढूंढ लिया हैै। किसान अब पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक हुए हैं। पराली प्रबंधन को लेकर सीवन के प्रगतिशील किसानों ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के तहत बातचीत की।
आग न लगे इसके लिए करते हैं खेतों की रखवाली
किसान सुरेश सरदाना ने बताया कि पराली में आग जलाने की घटनाओं के कारण यहां पर दिन में सड़कों पर धुंध छा जाती थी। इस कारण सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो जाता है। इससे दुर्घटनाओं का भी भय बना रहता है। किसानों को आग लगाने के बाद अपने खेतों में बैठ कर रखवाली भी करनी पड़ती है कि कहीं आग फैल न जाए। सरकार की तरफ से फसल अवशेष प्रबंधन के कई उपाय किए गए हैं। इन उपायों के अब सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं।
विज्ञापन
बंडल बनवाकर फसल अवशेषों के निपटान में जुटे
संगीत बंसल ने बताया कि किसान पराली के बंडल बनवाकर फसल अवशेषों के निपटान में जुटे हैं। इससे सभी को फायदा हो रहा है। इतना ही नहीं किसान अब तो अपील करने लगे हैं कि कोई भी किसान फसल अवशेषों को जलाने की बजाए फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों को अपनाएं। किसान इन तरीकों को अपना कर आर्थिक लाभ भी कमा सकते हैं।
विज्ञापन
फसल अवशेष न जलाकर पर्यावरण बचाने का दे रहे संदेश
गुरदयाल मलिकपुर ने बताया कि पराली निस्तारण के लिए इस साल प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट रखा है। किसानों को कृषि यंत्र मुहैया कराए जा रहे हैं, जिसके जरिये वे आसानी से पराली को बिना जलाए ही खेतों में मिलाकर उर्वरा शक्ति बढ़ा रहे हैं। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसान आगे आ रहे हैं। खेतों में फसल अवशेष न जलाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे है। इससे किसान जागरूक हो रहे हैं और प्रशासन का सहयोग भी कर रहे हैं।