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Kaithal News: परंपरा से हटकर खेती करने पर किसान महेंद्र रसीना को मिला राष्ट्रीय अवाॅर्ड
Sun, 10 Dec 2023 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 10 Dec 2023 02:20 AM IST
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कैथल। दिल्ली में हुए कृषि अनुसंधान विज्ञान केंद्र में कैथल के रसीना गांव के प्रगतिशील किसान महेंद्र रसीना को परंपरा से हटकर खेती करने में राष्ट्रीय अवार्ड मिला है। महेंद्र सिंह प्रगतिशील किसान क्लब के सदस्य हैं। वह वर्ष 1989 से परंपरा से हटकर खेती कर रहे हैं, वह अब तक कई बार जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित हो चुके हैं। किसान महेंद्र की इस उपलब्धि से किसानों में खुशी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार प्रगतिशील किसान महेंद्र रसीना ने बताया कि वर्ष 1989 में उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी और खेती करने लगे थे। उन्होंने खेती में कुछ अलग करने की ठानी और परंपरागत खेती से हटकर खेती करने लगे। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र कैथल में जाना शुरू कर दिया। वहां से प्रशिक्षण लेकर दूसरे राज्यों में जाकर खेती की तकनीक देखी। जहां पर नए नए बीत और उत्पादों पर शोध किया। इस दौरा वह महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में घूमे। जहां से नए नए बीज लेकर उनकी बिजाई की और आसपास के किसानों को भी उसकी गुणवत्ता से अवगत कराया। जब वह दूसरे राज्यों में खेती के तरीके को देखने के लिए पहुंचे तो उस समय हरियाणा में गन्ने में 250-300 क्विंटल ही प्रति एकड़ में उत्पादन होता था। जब उन्होंने दूसरे राज्यों में गन्ने का उत्पादन देखा तो वह हैरान रह गए थे। वहां पर 1100 से 1200 प्रति एकड़ का उत्पादन होता था, जबकि दोनों राज्यों उस समय खर्च बराबर होता था, लेकिन हरियाणा से बाहर के राज्यों में उत्पादन चार गुणा तक अधिक था। वहां पर देखकर उन्होंने वर्ष 2007 में कृषि विभाग से अनुदान पर मशीन ली। जिसके बाद गड्ढा विधि से गन्ने की बिजाई शुरू की। उस समय उन्होंने 10 एकड़ में गड्ढा विधि से गन्ने की बिजाई की। जिसमें पहली बार हरियाणा में भी 900 क्विंटल प्रति एकड़ गन्ने का उत्पादन हुआ था। इसके बाद उस समय के उपायुक्त ने उनको सम्मानित किया था। उस समय से वह परंपरागत खेती से हटकर ही खेती कर रहे हैं। कई बार जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित हो चुके हैं। अब उन्हें दिल्ली में आयोजित कृषि अनुसंधान विज्ञान केंद्र में उनको राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।
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जानकारी के अनुसार प्रगतिशील किसान महेंद्र रसीना ने बताया कि वर्ष 1989 में उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी और खेती करने लगे थे। उन्होंने खेती में कुछ अलग करने की ठानी और परंपरागत खेती से हटकर खेती करने लगे। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र कैथल में जाना शुरू कर दिया। वहां से प्रशिक्षण लेकर दूसरे राज्यों में जाकर खेती की तकनीक देखी। जहां पर नए नए बीत और उत्पादों पर शोध किया। इस दौरा वह महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में घूमे। जहां से नए नए बीज लेकर उनकी बिजाई की और आसपास के किसानों को भी उसकी गुणवत्ता से अवगत कराया। जब वह दूसरे राज्यों में खेती के तरीके को देखने के लिए पहुंचे तो उस समय हरियाणा में गन्ने में 250-300 क्विंटल ही प्रति एकड़ में उत्पादन होता था। जब उन्होंने दूसरे राज्यों में गन्ने का उत्पादन देखा तो वह हैरान रह गए थे। वहां पर 1100 से 1200 प्रति एकड़ का उत्पादन होता था, जबकि दोनों राज्यों उस समय खर्च बराबर होता था, लेकिन हरियाणा से बाहर के राज्यों में उत्पादन चार गुणा तक अधिक था। वहां पर देखकर उन्होंने वर्ष 2007 में कृषि विभाग से अनुदान पर मशीन ली। जिसके बाद गड्ढा विधि से गन्ने की बिजाई शुरू की। उस समय उन्होंने 10 एकड़ में गड्ढा विधि से गन्ने की बिजाई की। जिसमें पहली बार हरियाणा में भी 900 क्विंटल प्रति एकड़ गन्ने का उत्पादन हुआ था। इसके बाद उस समय के उपायुक्त ने उनको सम्मानित किया था। उस समय से वह परंपरागत खेती से हटकर ही खेती कर रहे हैं। कई बार जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित हो चुके हैं। अब उन्हें दिल्ली में आयोजित कृषि अनुसंधान विज्ञान केंद्र में उनको राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।
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