{"_id":"61099aa78ebc3ec1ac217938","slug":"fake-investigation-report-of-corona-surfaced-department-conducted-investigation-kaithal-news-knl787660194","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना की फर्जी जांच रिपोर्ट सामने आई, विभाग ने बैठाई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना की फर्जी जांच रिपोर्ट सामने आई, विभाग ने बैठाई जांच
विज्ञापन
Fake investigation report of Corona surfaced, department conducted investigation
- फोटो : Kaithal
विभिन्न जरूरी कार्यों के लिए जिले में कोरोना की जांच की फर्जी रिपोर्ट सामने आई है। जिससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के भी होश उड़ गए हैं। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। फर्जी मिली जांच रिपोर्ट के ऊपर फर्जी नंबर व फर्जी मोहर लगी हुई मिली है।
मिली जानकारी के अनुसार सेक्टर 19 निवासी एक युवक मंगलवार को जिला अस्पताल में अपनी एंटीपीसीआर जांच करवाने के लिए पहुंचा। उसके पास एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट पहले से थी। उसने मोबाइल में यह रिपोर्ट दिखाई तो लैब में मौजूद कर्मचारियों ने उस पर कुछ संदेह हुआ। कर्मचारियों ने उस जांच रिपोर्ट पर पंजीकृत नंबर का मिलान किया तो वह एक महिला के नाम से दर्ज हुआ मिला। जिससे उनका शक सही निकला। इसके बाद मोहर की जांच की गई तो मोहर भी फर्जी पाई गई। जिस पर मामले की सूचना आला अधिकारियों को दी गई। विभाग ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में ब्लड बैंक इंचार्ज डा. राजेंद्र, फिजिशियन डा. राजीव मित्तल व एक अन्य को शामिल किया गया है।
बताया जा रहा है कि संदेह के घेरे में विभाग के कुछ कर्मचारी भी हैं। वहीं जिले में इस तरह की यदि जांच रिपोर्ट की जा रही हैं तो यह एक गंभीर मामला है। यदि किसी कोरोना पॉजिटिव को निगेटिव फर्जी रिपोर्ट दे दी जा रही है तो वह कोरोना फैला सकता है। इसीलिए यह मामला गंभीर जांच का विषय है।
विज्ञापन
अस्पताल इंचार्ज को इस बारे में फोन किया गया तो उनका पहले तो फोन व्यस्त आता रहा। दो बार घंटी जाने पर भी उनका फोन रिसीव नहीं हो पाया। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ आने लगा।
विज्ञापन
मिली जानकारी के अनुसार सेक्टर 19 निवासी एक युवक मंगलवार को जिला अस्पताल में अपनी एंटीपीसीआर जांच करवाने के लिए पहुंचा। उसके पास एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट पहले से थी। उसने मोबाइल में यह रिपोर्ट दिखाई तो लैब में मौजूद कर्मचारियों ने उस पर कुछ संदेह हुआ। कर्मचारियों ने उस जांच रिपोर्ट पर पंजीकृत नंबर का मिलान किया तो वह एक महिला के नाम से दर्ज हुआ मिला। जिससे उनका शक सही निकला। इसके बाद मोहर की जांच की गई तो मोहर भी फर्जी पाई गई। जिस पर मामले की सूचना आला अधिकारियों को दी गई। विभाग ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में ब्लड बैंक इंचार्ज डा. राजेंद्र, फिजिशियन डा. राजीव मित्तल व एक अन्य को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि संदेह के घेरे में विभाग के कुछ कर्मचारी भी हैं। वहीं जिले में इस तरह की यदि जांच रिपोर्ट की जा रही हैं तो यह एक गंभीर मामला है। यदि किसी कोरोना पॉजिटिव को निगेटिव फर्जी रिपोर्ट दे दी जा रही है तो वह कोरोना फैला सकता है। इसीलिए यह मामला गंभीर जांच का विषय है।
विज्ञापन
अस्पताल इंचार्ज को इस बारे में फोन किया गया तो उनका पहले तो फोन व्यस्त आता रहा। दो बार घंटी जाने पर भी उनका फोन रिसीव नहीं हो पाया। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ आने लगा।