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Kaithal News: पांच माह बाद भी अब तक नहीं बनाई चहारदीवारी
Mon, 08 Dec 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 08 Dec 2025 12:49 AM IST
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07kht_20_बगैर चारदीवारी के गांव का तालाब।
अजय कुमार
कसान। साहरण गांव में तालाब में डूबने से तीन मासूम बच्चों की मौत के मामले को करीब पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज तक उस तालाब की चहारदीवारी नहीं बन पाई है।
9 जुलाई को हुई दर्दनाक घटना में गांव के नमन (9), वंश (8) और अक्षय (7) तालाब में डूब गए थे। तीनों आपस में चचेरे भाई थे और खेलते-खेलते काल के गाल में समा गए थे। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया था और जिले भर में गहरा शोक व्याप्त हो गया था, लेकिन हादसा स्थल आज भी उसी हालात में पड़ा है।
घटना के बाद से ग्रामीण लगातार तालाब के चारों ओर चहारदीवारी बनाने की मांग उठाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगें अब तक केवल फाइलों तक ही सिमट कर रह गई हैं। ग्रामीण सुभाष ने बताया कि यह घटना आज भी गांव वालों के दिल को झकझोर देती है।
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उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह अपने स्तर पर चहारदीवारी बनवा सके, इसलिए जिला प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया, तो भविष्य में कोई और बड़ा हादसा हो सकता है। सरपंच सुदेश कुमारी ने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से कई बार कैथल जिला प्रशासन को लिखित पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पंचकूला स्थित हरियाणा पौंड अथॉरिटी से भी इस बारे में संपर्क किया गया था, जहां से जवाब मिला कि इस समय उनके पास बजट की कमी है और उपलब्ध फंड पुराने प्रोजेक्ट्स में लगा हुआ है। उधर, नाराजगी जताते हुए ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की जान कीमत फाइलों और फंड से बड़ी होनी चाहिए और प्रशासन को बिना देरी सुरक्षा व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। संवाद
जब नए प्रोजेक्ट मंजूर होंगे, तब इस तालाब को भी शामिल किया जाएगा। फिलहाल ग्राम पंचायत के पास इतना फंड नहीं है कि वह अपने स्तर पर चहारदीवारी का निर्माण करवा सके, इसलिए वे जिला प्रशासन और पौंड अथॉरिटी पर ही निर्भर हैं। -सुदेश कुमारी, सरपंच
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कसान। साहरण गांव में तालाब में डूबने से तीन मासूम बच्चों की मौत के मामले को करीब पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज तक उस तालाब की चहारदीवारी नहीं बन पाई है।
9 जुलाई को हुई दर्दनाक घटना में गांव के नमन (9), वंश (8) और अक्षय (7) तालाब में डूब गए थे। तीनों आपस में चचेरे भाई थे और खेलते-खेलते काल के गाल में समा गए थे। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया था और जिले भर में गहरा शोक व्याप्त हो गया था, लेकिन हादसा स्थल आज भी उसी हालात में पड़ा है।
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घटना के बाद से ग्रामीण लगातार तालाब के चारों ओर चहारदीवारी बनाने की मांग उठाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगें अब तक केवल फाइलों तक ही सिमट कर रह गई हैं। ग्रामीण सुभाष ने बताया कि यह घटना आज भी गांव वालों के दिल को झकझोर देती है।
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उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह अपने स्तर पर चहारदीवारी बनवा सके, इसलिए जिला प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया, तो भविष्य में कोई और बड़ा हादसा हो सकता है। सरपंच सुदेश कुमारी ने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से कई बार कैथल जिला प्रशासन को लिखित पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पंचकूला स्थित हरियाणा पौंड अथॉरिटी से भी इस बारे में संपर्क किया गया था, जहां से जवाब मिला कि इस समय उनके पास बजट की कमी है और उपलब्ध फंड पुराने प्रोजेक्ट्स में लगा हुआ है। उधर, नाराजगी जताते हुए ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की जान कीमत फाइलों और फंड से बड़ी होनी चाहिए और प्रशासन को बिना देरी सुरक्षा व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। संवाद
जब नए प्रोजेक्ट मंजूर होंगे, तब इस तालाब को भी शामिल किया जाएगा। फिलहाल ग्राम पंचायत के पास इतना फंड नहीं है कि वह अपने स्तर पर चहारदीवारी का निर्माण करवा सके, इसलिए वे जिला प्रशासन और पौंड अथॉरिटी पर ही निर्भर हैं। -सुदेश कुमारी, सरपंच