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Kaithal News: श्री कपिल मुनि तीर्थ के कायाकल्प का बेसब्री से इंतजार
Wed, 28 Jan 2026 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 28 Jan 2026 01:27 AM IST
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निशीकांत शर्मा
कलायत। विश्व पटल पर सांख्य दर्शन के प्रवर्तक भगवान कपिल मुनि की तपोभूमि के रूप में विख्यात कलायत स्थित ऐतिहासिक श्री कपिल मुनि तीर्थ के कायाकल्प का श्रद्धालु वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। यह धार्मिक धरोहर उपेक्षा, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार बनी हुई है। तीर्थ के संरक्षण और विकास की मुख्य जिम्मेदारी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) पर होने के बावजूद हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं।
वर्तमान में तीर्थ का परिक्रमा मार्ग कई स्थानों से धंस चुका है। श्मशान भूमि के मुख्य द्वार से सटा परिसर पशुओं की शरण स्थली बन गया है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाए गए शौचालय बदहाल हैं। पेयजल, जल निकासी, सफाई व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
तीर्थ के पवित्र जल में बड़ी संख्या में जंगली वनस्पति उग आई है, वहीं जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी से श्रद्धालुओं में भय बना रहता है। परिक्रमा मार्ग के साथ लगी दीवारों में उगे बड़े-बड़े पौधे किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इन हालातों को देखकर श्रद्धालु और पर्यटक गहरी निराशा और हताशा व्यक्त कर रहे हैं।
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महिला श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर विशेष आक्रोश है कि तीर्थ में न तो शुद्ध स्नान योग्य जल उपलब्ध है और न ही महिलाओं के लिए पृथक स्नान घाट की व्यवस्था। श्रद्धालुओं का कहना है कि केडीबी द्वारा तीर्थ के कायाकल्प के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी योजनाएं वर्षों बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी हैं, जिससे आस्था को ठेस पहुंच रही है। संवाद
नशेबाजों का अड्डा बने घाट और शौचालय
श्रद्धालुओं मास्टर सुरेश राणा, बीरभान निर्मल और प्रियव्रत शर्मा ने बताया कि उचित देखरेख के अभाव में तीर्थ के पश्चिमी छोर पर बने घाट और शौचालय नशेबाजों की शरण स्थली बन चुके हैं। पूरी तरह क्षतिग्रस्त शौचालयों में इस्तेमाल की गई सिरिंज, खाली बोतलें और नशे का अन्य सामान खुलेआम पड़ा रहता है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि तीर्थ की मर्यादा भी भंग हो रही है। विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड मंत्री कृष्ण ढुल ने कहा कि कपिल तीर्थ के रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी तरह से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बनती है, लेकिन दशकों से केडीबी ने इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि तीर्थ की बदहाल स्थिति और केडीबी की उदासीनता को लेकर श्रद्धालुओं के साथ विहिप का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। इस दौरान तीर्थ की मर्यादा, स्वच्छता और पूर्व में स्वीकृत विकास योजनाओं को शीघ्र लागू करने की मांग उठाई जाएगी।
पुराणों में वर्णित है कपिल तीर्थ की महिमा
नारद पुराण, वायु पुराण और अग्नि पुराण में कलायत स्थित श्री कपिल तीर्थ का उल्लेख मिलता है। नारद पुराण के अनुसार कपिल तीर्थ में स्नान कर भगवान कपिल की पूजा करने से एक हजार कपिला गायों के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है। वायु पुराण और अग्नि पुराण में भी कपिल तीर्थ की महिमा और धार्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है।
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कलायत। विश्व पटल पर सांख्य दर्शन के प्रवर्तक भगवान कपिल मुनि की तपोभूमि के रूप में विख्यात कलायत स्थित ऐतिहासिक श्री कपिल मुनि तीर्थ के कायाकल्प का श्रद्धालु वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। यह धार्मिक धरोहर उपेक्षा, अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार बनी हुई है। तीर्थ के संरक्षण और विकास की मुख्य जिम्मेदारी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) पर होने के बावजूद हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं।
वर्तमान में तीर्थ का परिक्रमा मार्ग कई स्थानों से धंस चुका है। श्मशान भूमि के मुख्य द्वार से सटा परिसर पशुओं की शरण स्थली बन गया है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाए गए शौचालय बदहाल हैं। पेयजल, जल निकासी, सफाई व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
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तीर्थ के पवित्र जल में बड़ी संख्या में जंगली वनस्पति उग आई है, वहीं जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी से श्रद्धालुओं में भय बना रहता है। परिक्रमा मार्ग के साथ लगी दीवारों में उगे बड़े-बड़े पौधे किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इन हालातों को देखकर श्रद्धालु और पर्यटक गहरी निराशा और हताशा व्यक्त कर रहे हैं।
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महिला श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर विशेष आक्रोश है कि तीर्थ में न तो शुद्ध स्नान योग्य जल उपलब्ध है और न ही महिलाओं के लिए पृथक स्नान घाट की व्यवस्था। श्रद्धालुओं का कहना है कि केडीबी द्वारा तीर्थ के कायाकल्प के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी योजनाएं वर्षों बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी हैं, जिससे आस्था को ठेस पहुंच रही है। संवाद
नशेबाजों का अड्डा बने घाट और शौचालय
श्रद्धालुओं मास्टर सुरेश राणा, बीरभान निर्मल और प्रियव्रत शर्मा ने बताया कि उचित देखरेख के अभाव में तीर्थ के पश्चिमी छोर पर बने घाट और शौचालय नशेबाजों की शरण स्थली बन चुके हैं। पूरी तरह क्षतिग्रस्त शौचालयों में इस्तेमाल की गई सिरिंज, खाली बोतलें और नशे का अन्य सामान खुलेआम पड़ा रहता है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, बल्कि तीर्थ की मर्यादा भी भंग हो रही है। विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड मंत्री कृष्ण ढुल ने कहा कि कपिल तीर्थ के रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी तरह से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बनती है, लेकिन दशकों से केडीबी ने इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि तीर्थ की बदहाल स्थिति और केडीबी की उदासीनता को लेकर श्रद्धालुओं के साथ विहिप का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। इस दौरान तीर्थ की मर्यादा, स्वच्छता और पूर्व में स्वीकृत विकास योजनाओं को शीघ्र लागू करने की मांग उठाई जाएगी।
पुराणों में वर्णित है कपिल तीर्थ की महिमा
नारद पुराण, वायु पुराण और अग्नि पुराण में कलायत स्थित श्री कपिल तीर्थ का उल्लेख मिलता है। नारद पुराण के अनुसार कपिल तीर्थ में स्नान कर भगवान कपिल की पूजा करने से एक हजार कपिला गायों के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है। वायु पुराण और अग्नि पुराण में भी कपिल तीर्थ की महिमा और धार्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है।