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Kaithal News: टीबी से मुक्ति की ओर जिला, 20 गांव हो चुके हैं रोग मुक्त
Wed, 10 Jul 2024 06:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 10 Jul 2024 06:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कैथल जिला टीबी से मुक्ति की राह पर चल चुका है। अभियान का असर है कि इसके 20 गांव टीबी मुक्त हो चुके हैं। यह बात एडीसी सी जया श्रद्धा ने कही।
खुराना रोड स्थित ओढ एवं सरोजनी नायडू बस्ती में मंगलवार को लगाए स्वास्थ्य जांच शिविर में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने यह बात कही। जिला रेडक्रॉस सोसायटी के प्रधान एवं डीसी प्रशांत पंवार के मार्गदर्शन इस शिविर का आयोजन किया गया था।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि जिला टीबी से मुक्ति की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रही है। टीबी हारेगा और देश जीतेगा।
एडीसी ने कहा कि बीमारी से घृणा करनी चाहिए न कि बीमार व्यक्ति से। बीमार व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत रहना चाहिए। मजबूत व्यक्ति को बीमारी हरा नहीं सकती। रोगियों को चाहिए कि वे अपनी दवा समय पर लेते रहें। शिविर में जरूरतमंद रोगियों के स्वास्थ्य की जांच करके दवाएं वितरित की गईं। एडीसी सी जया श्रद्धा ने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि टीबी के लक्षण आएं-तुरन्त डाक्टर के पास जाएं। टीबी क्षय रोग के लक्षण होने पर दो हफ्ते से अधिक खांसी, बुखार आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन घटना आदि प्रमुख लक्षण है।
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उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच और इलाज की सुविधा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि निक्षय मित्र योजना के तहत बनाए गए डोनरों/दाताओं और उन द्वारा गोद लिए गए टीबी पीडि़त रोगियों की सहायतार्थ रैडक्रॅस सोसायटी एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा न्यूट्रीशियन की जिम्मेदारी ली है, जिससे टीबी पीडि़त रोगियों छह माह तक पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा सके।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव रामजी लाल ने इस मौके पर सामाजिक, धार्मिक एवं स्वैच्छिक संस्थाओं से अपील करते हुए कहा कि टीबी से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए राशन किट/न्यूट्रीशियन सुर्पोट उपलब्ध करवाने में सहयोग देवें। इस मौके पर उप सिविल सर्जन डॉ. संदीप बातिश, प्राचार्य गौतम बंसल, प्रदीप शर्मा, सतपाल भारद्वाज, हरीश चावला, संजीव कुमार, सुभाष चावला, डॉ. रमेश पबरेजा, डॉ. संजीव बंसल, पवन कुमार, रामपाल सहित रेडक्रॉस सोसायटी का स्टाफ मौजूद रहा।
ये गांव हैं टीबी मुक्त
मंझेड़ी, बुडनपुर गुजरान, छन्ना जाटान, हरनौला, जनेदपुर, सुल्तानिया करतारपुर, कसौली, खेड़ी दाबन, मेगामाजरा, फर्शमाजरा, डडवाना, धेरडू, भालंग, दुमाड़ा, कलासर, नरवलगढ़, सिल्ला खेड़ा, बदनारा, जठेड़ी तथा मुन्नारेहड़ी।
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कैथल। कैथल जिला टीबी से मुक्ति की राह पर चल चुका है। अभियान का असर है कि इसके 20 गांव टीबी मुक्त हो चुके हैं। यह बात एडीसी सी जया श्रद्धा ने कही।
खुराना रोड स्थित ओढ एवं सरोजनी नायडू बस्ती में मंगलवार को लगाए स्वास्थ्य जांच शिविर में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने यह बात कही। जिला रेडक्रॉस सोसायटी के प्रधान एवं डीसी प्रशांत पंवार के मार्गदर्शन इस शिविर का आयोजन किया गया था।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि जिला टीबी से मुक्ति की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर चल रही है। टीबी हारेगा और देश जीतेगा।
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एडीसी ने कहा कि बीमारी से घृणा करनी चाहिए न कि बीमार व्यक्ति से। बीमार व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत रहना चाहिए। मजबूत व्यक्ति को बीमारी हरा नहीं सकती। रोगियों को चाहिए कि वे अपनी दवा समय पर लेते रहें। शिविर में जरूरतमंद रोगियों के स्वास्थ्य की जांच करके दवाएं वितरित की गईं। एडीसी सी जया श्रद्धा ने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि टीबी के लक्षण आएं-तुरन्त डाक्टर के पास जाएं। टीबी क्षय रोग के लक्षण होने पर दो हफ्ते से अधिक खांसी, बुखार आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन घटना आदि प्रमुख लक्षण है।
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उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच और इलाज की सुविधा सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि निक्षय मित्र योजना के तहत बनाए गए डोनरों/दाताओं और उन द्वारा गोद लिए गए टीबी पीडि़त रोगियों की सहायतार्थ रैडक्रॅस सोसायटी एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा न्यूट्रीशियन की जिम्मेदारी ली है, जिससे टीबी पीडि़त रोगियों छह माह तक पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा सके।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव रामजी लाल ने इस मौके पर सामाजिक, धार्मिक एवं स्वैच्छिक संस्थाओं से अपील करते हुए कहा कि टीबी से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए राशन किट/न्यूट्रीशियन सुर्पोट उपलब्ध करवाने में सहयोग देवें। इस मौके पर उप सिविल सर्जन डॉ. संदीप बातिश, प्राचार्य गौतम बंसल, प्रदीप शर्मा, सतपाल भारद्वाज, हरीश चावला, संजीव कुमार, सुभाष चावला, डॉ. रमेश पबरेजा, डॉ. संजीव बंसल, पवन कुमार, रामपाल सहित रेडक्रॉस सोसायटी का स्टाफ मौजूद रहा।
ये गांव हैं टीबी मुक्त
मंझेड़ी, बुडनपुर गुजरान, छन्ना जाटान, हरनौला, जनेदपुर, सुल्तानिया करतारपुर, कसौली, खेड़ी दाबन, मेगामाजरा, फर्शमाजरा, डडवाना, धेरडू, भालंग, दुमाड़ा, कलासर, नरवलगढ़, सिल्ला खेड़ा, बदनारा, जठेड़ी तथा मुन्नारेहड़ी।