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Kaithal News: बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने डालीं आहुतियां
Wed, 28 Jan 2026 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 28 Jan 2026 01:15 AM IST
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27केएलटी4: यज्ञ में पूर्णाहुति डालते श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। गुप्त नवरात्र की अष्टमी से शुरू हुए अनुष्ठान का समापन मंगलवार को मां बगलामुखी के निमित्त हवन के साथ हुआ। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डिगी नहीं और उन्होंने हवन कुंड में आहुतियां डालकर सर्व मंगल, सुख-शांति की प्रार्थना की। बाद में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि माघ मास की गुप्त नवरात्र की शुरुआत से ही धार्मिक अनुष्ठान निरंतर चल रहे थे। मंगलवार को मां पीतांबरा के निमित्त हवन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना गया है। शास्त्रों में उन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। मां बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और रहस्यमय माना गया है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और पीले आसन पर विराजमान रहती हैं। एक हाथ से वे शत्रु की जीभ को पकड़ती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं, जो शत्रु की शक्ति के स्तंभन का प्रतीक है। शांडिल्य ने बताया कि यह स्वरूप इस बात का संकेत है कि मां बगलामुखी नकारात्मक शक्तियों, झूठ, अन्याय और अधर्म को नियंत्रित करने वाली देवी हैं। साधना शास्त्रों में उनकी उपासना को त्वरित फल देने वाली साधना माना गया है। हवन-यज्ञ के बाद श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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कलायत। गुप्त नवरात्र की अष्टमी से शुरू हुए अनुष्ठान का समापन मंगलवार को मां बगलामुखी के निमित्त हवन के साथ हुआ। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डिगी नहीं और उन्होंने हवन कुंड में आहुतियां डालकर सर्व मंगल, सुख-शांति की प्रार्थना की। बाद में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि माघ मास की गुप्त नवरात्र की शुरुआत से ही धार्मिक अनुष्ठान निरंतर चल रहे थे। मंगलवार को मां पीतांबरा के निमित्त हवन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना गया है। शास्त्रों में उन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। मां बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और रहस्यमय माना गया है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और पीले आसन पर विराजमान रहती हैं। एक हाथ से वे शत्रु की जीभ को पकड़ती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं, जो शत्रु की शक्ति के स्तंभन का प्रतीक है। शांडिल्य ने बताया कि यह स्वरूप इस बात का संकेत है कि मां बगलामुखी नकारात्मक शक्तियों, झूठ, अन्याय और अधर्म को नियंत्रित करने वाली देवी हैं। साधना शास्त्रों में उनकी उपासना को त्वरित फल देने वाली साधना माना गया है। हवन-यज्ञ के बाद श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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